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अंक ज्योतिष · मुफ़्त कैलकुलेटर

लो शू ग्रिड कैलकुलेटर

अपनी जन्म तिथि भरें और अपना लो शू ग्रिड देखें: ग़ायब और बार-बार आने वाले अंक, पूरे और अधूरे तल, और हर ग़ायब अंक के लिए एक आसान उपाय। भारतीय तरीके में मूलांक और भाग्यांक भी ग्रिड में जुड़ते हैं; एक टिक हटाकर आप क्लासिक ग्रिड भी देख सकते हैं।

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अपना लो शू ग्रिड बनाएँ

लो शू ग्रिड क्या है और आपके अंक कैसे रखे जाते हैं

लो शू ग्रिड प्राचीन चीन का 3×3 का एक जादुई वर्ग है। इसमें 1 से 9 तक के अंक तय ख़ानों में ऐसे बैठे हैं कि हर पंक्ति, हर कॉलम और दोनों तिरछी रेखाओं का जोड़ 15 आता है। ऊपर की पंक्ति देखें: 4 + 9 + 2 = 15। एक तिरछी रेखा: 4 + 5 + 6 = 15।

अंक ज्योतिष में हर ख़ाना एक अंक और उसके स्वामी ग्रह का होता है। आपकी जन्म तिथि तय करती है कि कौन-से ख़ाने भरेंगे, कौन-से एक से ज़्यादा बार भरेंगे और कौन-से ख़ाली रहेंगे। ख़ाली ख़ाने आपके ग़ायब अंक हैं, और पूरी पंक्तियों, कॉलम और तिरछी रेखाओं को तल कहा जाता है।

लो शू की तय बनावट: 4 9 2 / 3 5 7 / 8 1 6

492
357
816

भारतीय तरीका या क्लासिक तरीका

क्लासिक तरीके में सिर्फ़ आपकी जन्म तिथि के अंक ग्रिड में जाते हैं। ज़्यादातर भारतीय अंक ज्योतिषी दो अंक और जोड़ते हैं: आपका मूलांक, यानी जन्म का दिन एक अंक तक घटाया हुआ, और आपका भाग्यांक, यानी DD-MM-YYYY के सारे अंक जोड़कर एक अंक तक घटाया हुआ। ऊपर का कैलकुलेटर पहले से भारतीय तरीका अपनाता है। टिक हटाएँ तो क्लासिक ग्रिड दिखेगा, और आप दोनों की तुलना कर सकते हैं।

दोनों तरीकों में शून्य छोड़ दिए जाते हैं। ग्रिड में 0 का कोई ख़ाना नहीं, इसलिए तारीख का 0 बस रखा नहीं जाता।

  1. पूरी तारीख लिखें। इसे DD-MM-YYYY में लिखें, जैसे 14-07-1992, और हर अंक की सूची बनाएँ।
  2. मूलांक और भाग्यांक निकालें। मूलांक दिन को एक अंक तक घटाकर आता है। भाग्यांक सारे अंक जोड़कर एक अंक तक घटाकर आता है।
  3. हर अंक उसके ख़ाने में रखें। हर अंक अपने तय ख़ाने में जाता है। जो अंक दो बार आए, वह दो बार लिखा जाता है। शून्य छोड़ दिए जाते हैं।
  4. ग्रिड पढ़ें। देखें कि कौन-से अंक ग़ायब हैं, कौन-से बार-बार आए हैं और कौन-से तल पूरे हैं।

उदाहरण: अनन्या, जन्म 14-07-1992

अनन्या, जन्म तिथि 14-07-1992, भारतीय तरीका

चरणगणनापरिणाम
14-07-1992 के अंक1, 4, 0, 7, 1, 9, 9, 20 ग्रिड में नहीं रखा जाता
मूलांक1 + 4 = 55
भाग्यांक1 + 4 + 0 + 7 + 1 + 9 + 9 + 2 = 33 → 66
ग्रिड में रखे अंकजन्म तिथि के अंक, साथ में मूलांक 5 और भाग्यांक 61, 1, 2, 4, 5, 6, 7, 9, 9
ग़ायब अंकजो ख़ाने ख़ाली रहे3 और 8
एक से ज़्यादा बारजो ख़ाने एक से ज़्यादा बार भरे1 (2 बार), 9 (2 बार)
पूरे तलतीनों अंक मौजूदमानसिक तल 4-9-2, इच्छाशक्ति तल 9-5-1, कर्म तल 2-7-6, स्वर्ण (सफलता) योग 4-5-6

ऊपर वाले कैलकुलेटर के ही इंजन से निकाला गया।

अनन्या, 14-07-1992 का ग्रिड, भारतीय तरीका

ख़ाना 4
4
ख़ाना 9
9 9
ख़ाना 2
2
ख़ाना 3
ख़ाली
ख़ाना 5
5
ख़ाना 7
7
ख़ाना 8
ख़ाली
ख़ाना 1
1 1
ख़ाना 6
6

ऊपर वाले कैलकुलेटर के ही इंजन से निकाला गया।

यही तारीख क्लासिक तरीके से देखें तो तस्वीर बदल जाती है। मूलांक 5 और भाग्यांक 6 के बिना अनन्या के ग्रिड में 3, 5, 6 और 8 ग़ायब हैं, और सिर्फ़ मानसिक तल पूरा है। इसीलिए दोनों तरीके अलग विश्लेषण दे सकते हैं, और इसीलिए कैलकुलेटर आपको चुनने देता है।

अनन्या, 14-07-1992 का ग्रिड, क्लासिक तरीका

ख़ाना 4
4
ख़ाना 9
9 9
ख़ाना 2
2
ख़ाना 3
ख़ाली
ख़ाना 5
ख़ाली
ख़ाना 7
7
ख़ाना 8
ख़ाली
ख़ाना 1
1 1
ख़ाना 6
ख़ाली

ऊपर वाले कैलकुलेटर के ही इंजन से निकाला गया।

ग़ायब अंक 1 से 9: ग्रह, तत्व, वास्तु दिशा और उपाय

ग्रिड का हर ख़ाना एक ग्रह, एक तत्व और घर की एक दिशा से जुड़ा है। कोई अंक ग़ायब हो, तो आम सलाह यह है कि उस अंक वाला गुण अपनाएँ और घर में उसकी दिशा का ध्यान रखें। ये आज़माने लायक आसान आदतें हैं, किसी नतीजे का वादा नहीं।

अंकग्रहतत्ववास्तु दिशाअंक न हो तो: आसान उपाय
1सूर्यजलउत्तरअंक 1 न हो तो अपनी बात कहने में झिझक दिख सकती है। रोज़ की छोटी-छोटी बातों में अपनी बात रखने का अभ्यास करें। वास्तु के हिसाब से घर का उत्तर भाग खाली और साफ़ रखें।
2चंद्रपृथ्वीदक्षिण-पश्चिमअंक 2 न हो तो धैर्य रखना और दूसरों की भावनाएँ समझना मुश्किल हो सकता है। प्रतिक्रिया देने से पहले थोड़ा रुकें। वास्तु के हिसाब से दक्षिण-पश्चिम को भारी और स्थिर रखें।
3गुरुलकड़ीपूर्वअंक 3 न हो तो योजना बनाना और खुद को व्यक्त करना मुश्किल हो सकता है। योजनाएँ लिखें और हर हफ़्ते उन्हें दोबारा देखें। वास्तु के हिसाब से पूर्व को खुला और रोशन रखें।
4राहुलकड़ीदक्षिण-पूर्वअंक 4 न हो तो दिनचर्या और व्यवस्था बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। रोज़ की छोटी आदतें बनाएँ और काम की जगह साफ़-सुथरी रखें। वास्तु के हिसाब से दक्षिण-पूर्व (रसोई का क्षेत्र) साफ़ और इस्तेमाल में रखें।
5बुधपृथ्वीकेंद्रअंक 5 न हो तो संतुलन रखना और काम पूरा करना मुश्किल हो सकता है। अगला काम शुरू करने से पहले पिछला पूरा करें। वास्तु के हिसाब से घर का केंद्र (ब्रह्मस्थान) खुला रखें।
6शुक्रधातुउत्तर-पश्चिमअंक 6 न हो तो घर-गृहस्थी और ज़िम्मेदारी निभाना कम स्थिर लग सकता है। परिवार के साथ मिलकर रीति-रिवाज़ निभाने का समय निकालें। वास्तु के हिसाब से उत्तर-पश्चिम में हवा का आना-जाना अच्छा रखें।
7केतुधातुपश्चिमअंक 7 न हो तो अड़चनों से सीखना मुश्किल हो सकता है। अपने अनुभवों की एक डायरी रखें। वास्तु के हिसाब से घर का पश्चिम भाग व्यवस्थित रखें।
8शनिपृथ्वीउत्तर-पूर्वअंक 8 न हो तो पैसे का प्रबंधन और लंबी योजना मुश्किल हो सकती है। एक सीधा-सा बजट बनाकर रखें। वास्तु के हिसाब से उत्तर-पूर्व को साफ़, हल्का और खाली रखें।
9मंगलअग्निदक्षिणअंक 9 न हो तो महत्वाकांक्षा और जोश कमज़ोर लग सकता है। एक समय में एक ही साफ़ लक्ष्य रखें। वास्तु के हिसाब से घर का दक्षिण भाग रोशन रखें।

अनन्या के लिए ग़ायब 3 (गुरु, पूर्व) और 8 (शनि, उत्तर-पूर्व) दो आदतों की ओर इशारा करते हैं: योजनाएँ लिखकर रखना और एक सीधा-सा बजट बनाना, साथ में पूर्व को खुला और उत्तर-पूर्व को साफ़ रखना।

लो शू ग्रिड के 8 तल

तल तीन ख़ानों की एक रेखा है: तीन पंक्तियाँ, तीन कॉलम और दो तिरछी रेखाएँ। किसी तल के तीनों अंक कम से कम एक बार आएँ, तो वह पूरा माना जाता है। कैलकुलेटर हर तल को पूरा, अधूरा (3 में से 1 या 2) या ख़ाली दिखाता है।

तलअंककहाँ हैक्या दिखाता है
मानसिक तल4-9-2ऊपर की पंक्तिसोच, याददाश्त और योजना।
भावनात्मक तल3-5-7बीच की पंक्तिभावनाएँ, संतुलन और रिश्ते।
व्यावहारिक तल8-1-6नीचे की पंक्तिभौतिक जीवन, पैसा और काम पूरे करना।
विचार तल4-3-8बायाँ कॉलमविचार और आगे की योजना।
इच्छाशक्ति तल9-5-1बीच का कॉलमदृढ़ता और लगन।
कर्म तल2-7-6दायाँ कॉलमयोजनाओं को अमल में लाना।
स्वर्ण (सफलता) योग4-5-6तिरछी रेखापूरा हो तो सफलता और पहचान का संकेत माना जाता है।
रजत (संपत्ति) योग2-5-8तिरछी रेखापूरा हो तो संपत्ति और स्थिरता का संकेत माना जाता है।

अंकों के जोड़: 951, 456, 258 और बाकी

बहुत से लोग ग्रिड की किसी रेखा को उसके तीन अंकों से ढूँढते हैं, जैसे “लो शू ग्रिड में 951” या “4 5 6 ग़ायब”। ऐसा हर जोड़ ऊपर के आठ तलों में से एक है। नीचे की तालिका में हर रेखा के साथ उसका तीन अंकों वाला रूप भी दिया है, जिसे लोग खोजते हैं।

अंकनामग्रिड में जगहकिस बात का संकेत
4-9-2 (492)मानसिक तलऊपर की पंक्तिसोच, याददाश्त और योजना।
3-5-7 (357)भावनात्मक तलबीच की पंक्तिभावनाएँ, संतुलन और रिश्ते।
8-1-6 (816)व्यावहारिक तलनीचे की पंक्तिभौतिक जीवन, पैसा और काम पूरे करना।
4-3-8 (438)विचार तलबायाँ कॉलमविचार और आगे की योजना।
9-5-1 (951)इच्छाशक्ति तलबीच का कॉलमदृढ़ता और लगन।
2-7-6 (276)कर्म तलदायाँ कॉलमयोजनाओं को अमल में लाना।
4-5-6 (456)स्वर्ण (सफलता) योगतिरछी रेखापूरा हो तो सफलता और पहचान का संकेत माना जाता है।
2-5-8 (258)रजत (संपत्ति) योगतिरछी रेखापूरा हो तो संपत्ति और स्थिरता का संकेत माना जाता है।

9-5-1 और राज योग। कुछ जानकार बीच के कॉलम 9-5-1 को राज योग कहते हैं, तो कुछ यही नाम 4-5-6 या 2-5-8 वाली तिरछी रेखा को देते हैं। यह साइट 9-5-1 को इच्छाशक्ति तल कहती है और योग के नाम सिर्फ़ दोनों तिरछी रेखाओं के लिए रखती है, ताकि हमेशा साफ़ रहे कि कौन-सी रेखा की बात हो रही है। नाम जो भी हो, कोई रेखा तभी पूरी मानी जाती है जब उसके तीनों अंक आपके ग्रिड में हों।

ख़ाली रेखा: जब तीनों अंक ग़ायब हों

अगर किसी रेखा का एक भी अंक आपके ग्रिड में नहीं है, जैसे 4, 5 और 6 तीनों ग़ायब हों, तो वह रेखा ख़ाली है। कैलकुलेटर ऐसी रेखा को ख़ाली दिखाता है। उसे उसके तीन ग़ायब अंकों के ज़रिए पढ़ें: ऊपर की ग़ायब अंकों वाली तालिका में हर अंक की आदत और वास्तु दिशा दी है। शुरुआत एक समय में एक अंक से करना ठीक रहता है।

एक से ज़्यादा बार आने वाले अंक

जो अंक एक से ज़्यादा बार आए, वह अपने गुणों को और वज़न देता है। किसी अंक का दो बार आना आम तौर पर ताक़त माना जाता है। तीन या ज़्यादा बार आने पर वह गुण ज़रूरत से ज़्यादा हो सकता है, इसलिए कैलकुलेटर आपके ग्रिड के हर दोहराए गए अंक के लिए एक छोटी टिप्पणी जोड़ता है।

अनन्या के ग्रिड में 1 और 9 दोनों दो-दो बार हैं। 1 के लिए टिप्पणी है: “अंक 1 एक से ज़्यादा बार हो तो अपनी बात रखने की क्षमता मज़बूत होती है; तीन या ज़्यादा बार हो तो ध्यान रखें कि बातचीत में आप ही हावी न हो जाएँ।” 9 के लिए: “अंक 9 एक से ज़्यादा बार हो तो जोश बहुत होता है; तीन या ज़्यादा बार हो तो इस ऊर्जा को व्यायाम या सेवा में लगाएँ।”

उदाहरण 2: जन्म 20-11-2001, तीन बार 1 और तीन बार 2

यह दूसरी तारीख भी ऊपर वाले कैलकुलेटर के ही इंजन से निकाली गई है। 20-11-2001 के अंक हैं 2, 0, 1, 1, 2, 0, 0, 1; तीनों शून्य छोड़ दिए जाते हैं। मूलांक 2 + 0 = 2 है और भाग्यांक 2 + 0 + 1 + 1 + 2 + 0 + 0 + 1 = 7। भारतीय तरीके में 1 तीन बार आता है, 2 भी तीन बार (दो बार तारीख से और एक बार मूलांक के रूप में) और 7 एक बार (भाग्यांक)।

ग़ायब (4)ग़ायब (9)2 2 2
ग़ायब (3)ग़ायब (5)7
ग़ायब (8)1 1 1ग़ायब (6)
  • ग़ायब अंक: 3, 4, 5, 6, 8 और 9।
  • तीन या ज़्यादा बार आने वाले अंक (111 और 222): 1 के लिए टिप्पणी है: “अंक 1 एक से ज़्यादा बार हो तो अपनी बात रखने की क्षमता मज़बूत होती है; तीन या ज़्यादा बार हो तो ध्यान रखें कि बातचीत में आप ही हावी न हो जाएँ।” 2 के लिए: “अंक 2 एक से ज़्यादा बार हो तो अंतर्ज्ञान तेज़ होता है; तीन या ज़्यादा बार हो तो बातों को दिल पर लेने से बचें।”
  • पूरी रेखाएँ: कोई नहीं।
  • ख़ाली रेखाएँ: विचार तल 4-3-8 और स्वर्ण योग 4-5-6।

क्लासिक तरीके (सिर्फ़ तारीख के अंक) में 7 भी ग़ायब हो जाता है, 2 तीन की जगह दो बार रह जाता है, और भावनात्मक तल 3-5-7 भी ख़ाली हो जाता है। जिन तारीखों में कई शून्य होते हैं, जैसे 2000 के बाद की कई तारीखें, उनके ग्रिड में अक्सर कई अंक ग़ायब रहते हैं; यह विश्लेषण का एक हिस्सा है, कोई फ़ैसला नहीं।

ग्रिड को अपने बाकी अंकों के साथ पढ़ें

लो शू ग्रिड कभी अकेले नहीं पढ़ा जाता। आपका मूलांक बताता है कि आप रोज़ के जीवन में कैसे काम करते हैं, और आपका भाग्यांक कि जीवन आपको किस ओर ले जाता है; भारतीय तरीके में दोनों ग्रिड में भी जुड़ते हैं। अंक ज्योतिष चार्ट कैलकुलेटर ग्रिड को आपके नाम के अंकों के साथ एक जगह दिखाता है, और नाम अंक ज्योतिष कैलकुलेटर बताता है कि आपका नाम आपकी जन्म तिथि से मेल खाता है या नहीं। इस वर्ग की कहानी के लिए लो शू ग्रिड पर हमारा लेख पढ़ें। अंक ज्योतिष के सारे मुख्य अंक और उनके कैलकुलेटर एक जगह देखने हों, तो हमारी अंक ज्योतिष गाइड से शुरू करें।

अपने मूलांक और भाग्यांक का पूरा अर्थ जानने के लिए मूलांक और भाग्यांक कैलकुलेटर देखें, और घर की शुभ दिशाओं के लिए कुआ नंबर कैलकुलेटर।

लो शू ग्रिड: आम सवाल

अंक ज्योतिष में लो शू ग्रिड क्या है?

लो शू ग्रिड 3×3 का एक जादुई वर्ग है, जिसमें 1 से 9 तक के अंक तय ख़ानों में बैठते हैं और हर पंक्ति, कॉलम और तिरछी रेखा का जोड़ 15 आता है। अंक ज्योतिष में आपकी जन्म तिथि के अंक इन ख़ानों में रखे जाते हैं। इससे दिखता है कि आपके चार्ट में कौन-से अंक मज़बूत हैं, कौन-से बार-बार आए हैं और कौन-से ग़ायब हैं।

क्या लो शू ग्रिड में मूलांक और भाग्यांक जोड़ने चाहिए?

ज़्यादातर भारतीय अंक ज्योतिषी दोनों जोड़ते हैं, और यह कैलकुलेटर भी पहले से यही करता है। क्लासिक लो शू तरीका सिर्फ़ जन्म तिथि के अंक इस्तेमाल करता है। दोनों तरीके चलन में हैं, इसलिए कैलकुलेटर में एक टिक से आप दोनों ग्रिड बदलकर देख सकते हैं।

लो शू ग्रिड में शून्य क्यों नहीं गिना जाता?

ग्रिड में 1 से 9 तक के अंकों के नौ ख़ाने हैं, 0 का कोई ख़ाना नहीं। इसलिए तारीख में आया 0, जैसे 1990 या 2001 में, बस ग्रिड में नहीं रखा जाता। 0 को ग़ायब अंक भी नहीं माना जाता।

लो शू ग्रिड में राज योग या स्वर्ण योग क्या है?

अलग-अलग जानकार ग्रिड की अलग-अलग रेखाओं को राज योग कहते हैं। इस कैलकुलेटर में 4-5-6 वाली तिरछी रेखा को स्वर्ण (सफलता) योग और 2-5-8 वाली को रजत (संपत्ति) योग कहा गया है। किसी योग के तीनों अंक आपके ग्रिड में हों, तो उसे पूरा माना जाता है।

क्या ग़ायब अंक के लिए वास्तु उपाय मदद करते हैं?

हर ग़ायब अंक घर की एक दिशा से जुड़ा है, जैसे 1 उत्तर से और 9 दक्षिण से। उस हिस्से को साफ़, खुला और इस्तेमाल में रखना एक आम और आसान उपाय है, साथ में वह आदत बनाना जिसका वह अंक प्रतीक है। इससे आगे कुछ सुझाने से पहले नमिता जी आपका ग्रिड और आपका घर, दोनों साथ देखती हैं।

क्या लो शू ग्रिड और कुआ नंबर एक ही हैं?

नहीं। लो शू ग्रिड आपकी जन्म तिथि से बनता है। कुआ नंबर एक अलग गणना है जो जन्म वर्ष और लिंग से निकलती है; उसके लिए कुआ नंबर कैलकुलेटर देखें।

लो शू ग्रिड में 9-5-1 या 4-5-6 का क्या मतलब है?

तीन अंकों का हर जोड़ ग्रिड की एक रेखा है। 9-5-1 बीच का कॉलम है, जिसे यह साइट इच्छाशक्ति तल (दृढ़ता और लगन) कहती है; कुछ जानकार इसे राज योग कहते हैं। 4-5-6 एक तिरछी रेखा है, स्वर्ण (सफलता) योग, और 2-5-8 रजत (संपत्ति) योग। कोई रेखा तभी पूरी मानी जाती है जब उसके तीनों अंक आपके ग्रिड में हों।

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