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प्रदोष व्रत 2026

प्रदोष व्रत 2026 और 2027: तारीखें और प्रदोष काल

प्रदोष व्रत भगवान शिव के लिए त्रयोदशी को रखा जाता है, जो चंद्र मास के हर पक्ष की 13वीं तिथि है, इसलिए यह महीने में दो बार आता है। प्रदोष काल सूर्यास्त के ठीक बाद का समय है और पूजा इसी समय होती है। हर प्रदोष का नाम उसके वार से होता है: सोमवार को सोम प्रदोष, मंगलवार को भौम प्रदोष, शनिवार को शनि प्रदोष, इसी तरह। यहाँ 2026 और 2027 का हर प्रदोष व्रत है, शाम की पूजा के समय के साथ।

अगला प्रदोष: शुक्र प्रदोष व्रत, शुक्रवार, 6 नवंबर 2026। प्रदोष काल: 5:35 pm से 8:08 pm तक।

प्रदोष व्रत 2026 की तारीखें

प्रदोषदिनप्रदोष काल (नागपुर)तिथि शुरू (IST)तिथि समाप्त (IST)
गुरु प्रदोष व्रत
पौष शुक्ल पक्ष
गुरुवार, 1 जनवरी 20265:43 pm से 8:20 pm तक1 जनवरी, 1:49 am1 जनवरी, 10:23 pm
शुक्र प्रदोष व्रत
पौष कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में माघ
शुक्रवार, 16 जनवरी 20265:53 pm से 8:29 pm तक15 जनवरी, 8:17 pm16 जनवरी, 10:23 pm
शुक्र प्रदोष व्रत
माघ शुक्ल पक्ष
शुक्रवार, 30 जनवरी 20266:02 pm से 8:36 pm तक30 जनवरी, 11:10 am31 जनवरी, 8:27 am
शनि प्रदोष व्रत
माघ कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में फाल्गुन
शनिवार, 14 फ़रवरी 20266:11 pm से 8:41 pm तक14 फ़रवरी, 4:03 pm15 फ़रवरी, 5:06 pm
रवि प्रदोष व्रत
फाल्गुन शुक्ल पक्ष
रविवार, 1 मार्च 20266:17 pm से 7:10 pm तक28 फ़रवरी, 8:44 pm1 मार्च, 7:10 pm
सोम प्रदोष व्रत
फाल्गुन कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में चैत्र
सोमवार, 16 मार्च 20266:23 pm से 8:46 pm तक16 मार्च, 9:42 am17 मार्च, 9:24 am
सोम प्रदोष व्रत
चैत्र शुक्ल पक्ष
सोमवार, 30 मार्च 20266:27 pm से 8:47 pm तक30 मार्च, 7:11 am31 मार्च, 6:57 am
बुध प्रदोष व्रत
चैत्र कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में वैशाख
बुधवार, 15 अप्रैल 20266:32 pm से 8:49 pm तक15 अप्रैल, 12:13 am15 अप्रैल, 10:32 pm
भौम प्रदोष व्रत
वैशाख शुक्ल पक्ष
मंगलवार, 28 अप्रैल 20266:53 pm से 8:50 pm तक28 अप्रैल, 6:53 pm29 अप्रैल, 7:53 pm
गुरु प्रदोष व्रत
वैशाख कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में ज्येष्ठ
गुरुवार, 14 मई 20266:43 pm से 8:54 pm तक14 मई, 11:21 am15 मई, 8:32 am
गुरु प्रदोष व्रत
अधिक ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष
गुरुवार, 28 मई 20266:49 pm से 8:58 pm तक28 मई, 7:58 am29 मई, 9:52 am
शुक्र प्रदोष व्रत
अधिक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में अधिक ज्येष्ठ
शुक्रवार, 12 जून 20267:38 pm से 9:02 pm तक12 जून, 7:38 pm13 जून, 4:09 pm
शनि प्रदोष व्रत
ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष
शनिवार, 27 जून 20266:59 pm से 9:06 pm तक26 जून, 10:23 pm28 जून, 12:44 am
रवि प्रदोष व्रत
ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में आषाढ़
रविवार, 12 जुलाई 20266:59 pm से 9:07 pm तक12 जुलाई, 2:05 am12 जुलाई, 10:31 pm
रवि प्रदोष व्रत
आषाढ़ शुक्ल पक्ष
रविवार, 26 जुलाई 20266:55 pm से 9:05 pm तक26 जुलाई, 1:59 pm27 जुलाई, 4:16 pm
सोम प्रदोष व्रत
आषाढ़ कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में श्रावण
सोमवार, 10 अगस्त 20266:47 pm से 9:00 pm तक10 अगस्त, 8:02 am11 अगस्त, 4:55 am
भौम प्रदोष व्रत
श्रावण शुक्ल पक्ष
मंगलवार, 25 अगस्त 20266:36 pm से 8:51 pm तक25 अगस्त, 6:22 am26 अगस्त, 8:00 am
भौम प्रदोष व्रत
श्रावण कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में भाद्रपद
मंगलवार, 8 सितंबर 20266:23 pm से 8:42 pm तक8 सितंबर, 2:44 pm9 सितंबर, 12:32 pm
गुरु प्रदोष व्रत
भाद्रपद शुक्ल पक्ष
गुरुवार, 24 सितंबर 20266:08 pm से 8:31 pm तक23 सितंबर, 10:51 pm24 सितंबर, 11:19 pm
गुरु प्रदोष व्रत
भाद्रपद कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में आश्विन
गुरुवार, 8 अक्टूबर 20265:55 pm से 8:21 pm तक7 अक्टूबर, 11:17 pm8 अक्टूबर, 10:17 pm
शुक्र प्रदोष व्रत
आश्विन शुक्ल पक्ष
शुक्रवार, 23 अक्टूबर 20265:43 pm से 8:13 pm तक23 अक्टूबर, 2:37 pm24 अक्टूबर, 1:38 pm
शुक्र प्रदोष व्रत
आश्विन कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में कार्तिक
शुक्रवार, 6 नवंबर 20265:35 pm से 8:08 pm तक6 नवंबर, 10:32 am7 नवंबर, 10:49 am
रवि प्रदोष व्रत
कार्तिक शुक्ल पक्ष
रविवार, 22 नवंबर 20265:30 pm से 8:06 pm तक22 नवंबर, 4:57 am23 नवंबर, 2:38 am
रवि प्रदोष व्रत
कार्तिक कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में मार्गशीर्ष
रविवार, 6 दिसंबर 20265:31 pm से 8:08 pm तक6 दिसंबर, 12:53 am7 दिसंबर, 2:23 am
सोम प्रदोष व्रत
मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष
सोमवार, 21 दिसंबर 20265:37 pm से 8:14 pm तक21 दिसंबर, 5:37 pm22 दिसंबर, 2:25 pm

प्रदोष व्रत 2027 की तारीखें

प्रदोषदिनप्रदोष काल (नागपुर)तिथि शुरू (IST)तिथि समाप्त (IST)
भौम प्रदोष व्रत
मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में पौष
मंगलवार, 5 जनवरी 20275:45 pm से 8:23 pm तक4 जनवरी, 6:17 pm5 जनवरी, 8:40 pm
बुध प्रदोष व्रत
पौष शुक्ल पक्ष
बुधवार, 20 जनवरी 20275:55 pm से 8:31 pm तक20 जनवरी, 4:42 am21 जनवरी, 1:12 am
बुध प्रदोष व्रत
पौष कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में माघ
बुधवार, 3 फ़रवरी 20276:04 pm से 8:37 pm तक3 फ़रवरी, 1:51 pm4 फ़रवरी, 4:32 pm
गुरु प्रदोष व्रत
माघ शुक्ल पक्ष
गुरुवार, 18 फ़रवरी 20276:12 pm से 8:42 pm तक18 फ़रवरी, 2:29 pm19 फ़रवरी, 11:15 am
शुक्र प्रदोष व्रत
माघ कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में फाल्गुन
शुक्रवार, 5 मार्च 20276:19 pm से 8:45 pm तक5 मार्च, 9:55 am6 मार्च, 12:04 pm
शनि प्रदोष व्रत
फाल्गुन शुक्ल पक्ष
शनिवार, 20 मार्च 20276:24 pm से 8:46 pm तक19 मार्च, 11:18 pm20 मार्च, 8:46 pm
रवि प्रदोष व्रत
फाल्गुन कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में चैत्र
रविवार, 4 अप्रैल 20276:29 pm से 8:48 pm तक4 अप्रैल, 4:27 am5 अप्रैल, 5:24 am
रवि प्रदोष व्रत
चैत्र शुक्ल पक्ष
रविवार, 18 अप्रैल 20276:33 pm से 8:49 pm तक18 अप्रैल, 7:43 am19 अप्रैल, 6:09 am
भौम प्रदोष व्रत
चैत्र कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में वैशाख
मंगलवार, 4 मई 20276:39 pm से 7:32 pm तक3 मई, 8:05 pm4 मई, 7:32 pm
सोम प्रदोष व्रत
वैशाख शुक्ल पक्ष
सोमवार, 17 मई 20276:45 pm से 8:55 pm तक17 मई, 4:29 pm18 मई, 4:05 pm
बुध प्रदोष व्रत
वैशाख कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में ज्येष्ठ
बुधवार, 2 जून 20276:51 pm से 8:59 pm तक2 जून, 8:30 am3 जून, 6:35 am
बुध प्रदोष व्रत
ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष
बुधवार, 16 जून 20276:56 pm से 9:03 pm तक16 जून, 2:32 am17 जून, 3:21 am
गुरु प्रदोष व्रत
ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में आषाढ़
गुरुवार, 1 जुलाई 20276:59 pm से 9:06 pm तक1 जुलाई, 6:16 pm2 जुलाई, 3:24 pm
गुरु प्रदोष व्रत
आषाढ़ शुक्ल पक्ष
गुरुवार, 15 जुलाई 20276:58 pm से 9:07 pm तक15 जुलाई, 2:41 pm16 जुलाई, 4:36 pm
शनि प्रदोष व्रत
आषाढ़ कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में श्रावण
शनिवार, 31 जुलाई 20276:53 pm से 9:03 pm तक31 जुलाई, 2:19 am31 जुलाई, 10:59 pm
शनि प्रदोष व्रत
श्रावण शुक्ल पक्ष
शनिवार, 14 अगस्त 20276:44 pm से 8:58 pm तक14 अगस्त, 5:22 am15 अगस्त, 7:55 am
रवि प्रदोष व्रत
श्रावण कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में भाद्रपद
रविवार, 29 अगस्त 20276:32 pm से 8:49 pm तक29 अगस्त, 9:36 am30 अगस्त, 6:13 am
सोम प्रदोष व्रत
भाद्रपद शुक्ल पक्ष
सोमवार, 13 सितंबर 20276:19 pm से 8:39 pm तक12 सितंबर, 10:14 pm14 सितंबर, 12:41 am
सोम प्रदोष व्रत
भाद्रपद कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में आश्विन
सोमवार, 27 सितंबर 20276:05 pm से 8:29 pm तक27 सितंबर, 4:56 pm28 सितंबर, 1:55 pm
भौम प्रदोष व्रत
आश्विन शुक्ल पक्ष
मंगलवार, 12 अक्टूबर 20275:52 pm से 8:19 pm तक12 अक्टूबर, 4:15 pm13 अक्टूबर, 5:49 pm
बुध प्रदोष व्रत
आश्विन कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में कार्तिक
बुधवार, 27 अक्टूबर 20275:41 pm से 8:11 pm तक27 अक्टूबर, 1:04 am27 अक्टूबर, 10:51 pm
गुरु प्रदोष व्रत
कार्तिक शुक्ल पक्ष
गुरुवार, 11 नवंबर 20275:33 pm से 8:07 pm तक11 नवंबर, 10:08 am12 नवंबर, 10:22 am
गुरु प्रदोष व्रत
कार्तिक कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में मार्गशीर्ष
गुरुवार, 25 नवंबर 20275:30 pm से 8:06 pm तक25 नवंबर, 10:52 am26 नवंबर, 9:49 am
शनि प्रदोष व्रत
मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष
शनिवार, 11 दिसंबर 20275:32 pm से 8:10 pm तक11 दिसंबर, 2:54 am12 दिसंबर, 1:44 am
शनि प्रदोष व्रत
मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में पौष
शनिवार, 25 दिसंबर 20275:38 pm से 8:16 pm तक24 दिसंबर, 11:09 pm25 दिसंबर, 11:33 pm

तिथि का समय IST में है और पूरे भारत के लिए सही है। व्रत का दिन और दिया गया समय नागपुर के सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय से निकाला गया है। गणना सूर्य और चंद्रमा की स्थिति से की गई है (निरयण, लाहिड़ी अयनांश); महीने अमांत हैं, और कृष्ण पक्ष के व्रत के साथ वह महीना भी लिखा है जो उत्तर भारत के (पूर्णिमांत) कैलेंडर में आता है।

प्रदोष व्रत आम तौर पर कैसे रखा जाता है

  • बहुत से लोग सूर्योदय से व्रत रखते हैं और शाम की पूजा के बाद भोजन करते हैं; कुछ लोग फल और दूध लेते हैं या एक बार सादा भोजन करते हैं।
  • पूजा सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में होती है: स्नान, फिर शिवलिंग पर जल या दूध से अभिषेक, बेलपत्र, फूल और दीपक, घर पर या शिव मंदिर में।
  • "ॐ नमः शिवाय" का जाप और उस वार की प्रदोष व्रत कथा का पाठ।
  • सोम प्रदोष (सोमवार) और शनि प्रदोष (शनिवार) को बहुत से परिवार खास ध्यान से रखते हैं।

व्रत हर किसी के लिए ठीक नहीं होता। अगर आप गर्भवती हैं, बुज़ुर्ग हैं, आपको डायबिटीज़, ब्लड प्रेशर या कोई और बीमारी है, या आप रोज़ दवा लेते हैं, तो व्रत से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें। फल और दूध वाला हल्का व्रत, या बस पूजा करना भी इस दिन को मानने का एक आम तरीका है।

तारीखें कैसे निकाली गई हैं

प्रदोष त्रयोदशी तिथि है: शुक्ल पक्ष में चंद्रमा सूर्य से 144° से 156° आगे, या कृष्ण पक्ष में 324° से 336°। इसके शुरू और खत्म होने का समय सूर्य और चंद्रमा की स्थिति से निकलता है।

प्रदोष काल नागपुर में रात का पहला पाँचवाँ हिस्सा माना गया है: सूर्यास्त से लगभग ढाई घंटे (रात के पंद्रह मुहूर्तों में से तीन)। व्रत उस शाम होता है जिसके प्रदोष काल में त्रयोदशी हो; अगर त्रयोदशी दो शामों को छुए, तो उस शाम जिसमें वह ज़्यादा देर रहे। तालिका में प्रदोष काल का वह हिस्सा दिया है जिसमें त्रयोदशी चल रही हो।

नाम उस शाम के वार से आता है।

आपके परिवार या मंदिर का पंचांग कोई और नियम या कोई और शहर मान सकता है; जिस पर आपका भरोसा है, उसी को मानें।

दूसरे व्रतों की तारीखें

इनसे जुड़े टूल

प्रदोष व्रत के बारे में सवाल

प्रदोष व्रत कब है?

इस पेज में सबसे ऊपर अगला प्रदोष व्रत दिया गया है, और तालिकाओं में इस साल और अगले साल का हर प्रदोष है: वार का नाम, प्रदोष काल और त्रयोदशी का समय। अभी चल रहा या अगला प्रदोष अलग रंग में दिखता है।

आज प्रदोष काल कब है?

प्रदोष काल सूर्यास्त से शुरू होकर लगभग ढाई घंटे चलता है, सर्दियों में थोड़ा ज़्यादा और गर्मियों में थोड़ा कम। प्रदोष के दिन तालिका में नागपुर का समय दिया है; बाकी दिनों में भी सूर्यास्त के बाद का यह समय प्रदोष काल कहलाता है, पर उस दिन प्रदोष व्रत नहीं होता।

महीने में दो प्रदोष व्रत क्यों होते हैं?

त्रयोदशी हर चंद्र मास में एक बार शुक्ल पक्ष में और एक बार कृष्ण पक्ष में आती है, इसलिए प्रदोष लगभग हर 15 दिन में आता है।

सोम, भौम और शनि प्रदोष क्या हैं?

सोमवार, मंगलवार या शनिवार को पड़ने वाले प्रदोष के नाम। हर वार का अपना नाम है: रवि, सोम, भौम, बुध, गुरु, शुक्र और शनि प्रदोष।

किसी दूसरे कैलेंडर में अलग दिन क्यों दिखता है?

तिथि घड़ी के दिन से कम ही मेल खाती है, और नियम सूर्यास्त पर निर्भर है। जब त्रयोदशी दो शामों के प्रदोष काल को छुए, तो किसी दूसरे शहर का या कोई और नियम मानने वाला कैलेंडर दूसरी शाम दे सकता है। यह पेज नागपुर के लिए आम नियम मानता है।