तेलुगु कैलेंडर · चंद्र-सौर
तेलुगु कैलेंडर: इस महीने के दिन, त्योहार और महीने
तेलुगु कैलेंडर चंद्र-सौर और अमांत है: हर महीना अमावस्या के अगले दिन शुरू होकर अगली अमावस्या पर पूरा होता है। नया वर्ष उगादि से शुरू होता है, और हर वर्ष को 60 संवत्सरों के चक्र से एक नाम मिलता है।
आज: आश्विन, प्रतिपदा · शक संवत 1948 · संवत्सर Parabhava
तेलुगु कैलेंडर, अक्टूबर 2026
- महीने: भाद्रपद (భాద్రపదము) · आश्विन (ఆశ్వయుజము)
- शक संवत: 1948
- संवत्सर: Parabhava
शु = शुक्ल पक्ष, कृ = कृष्ण पक्ष। तिथि सूर्योदय के समय की है, और अगर अगले सूर्योदय से पहले बदलती है तो उसका समय दिया है। ☆ नक्षत्र, ☾ चंद्र राशि, ☼ सूर्योदय और सूर्यास्त, Hyderabad के लिए, IST में।
अक्टूबर 2026 के ख़ास दिन
| तारीख | महीना | क्या है |
|---|---|---|
| 6 अक्टूबर, मंगल | भाद्रपद | कृष्ण पक्ष एकादशी |
| 10 अक्टूबर, शनि | भाद्रपद | अमावस्या |
| 11 अक्टूबर, रवि | आश्विन | शारदीय नवरात्रि आरंभ |
| 17 अक्टूबर, शनि | आश्विन | तुला संक्रांति, 7:56 pm |
| 19 अक्टूबर, सोम | आश्विन | दुर्गा अष्टमी |
| 20 अक्टूबर, मंगल | आश्विन | दशहरा (विजयादशमी) |
| 22 अक्टूबर, गुरु | आश्विन | शुक्ल पक्ष एकादशी |
| 26 अक्टूबर, सोम | आश्विन | पूर्णिमा |
तेलुगु त्योहार 2026
2026 के मुख्य त्योहार, Hyderabad की गणना से। तारीख पर क्लिक करके उस महीने का पूरा कैलेंडर देखें।
| तारीख | त्योहार |
|---|---|
| 14 जनवरी, बुध | मकर संक्रांति |
| 23 जनवरी, शुक्र | वसंत पंचमी |
| 15 फ़रवरी, रवि | महाशिवरात्रि |
| 3 मार्च, मंगल | होलिका दहन |
| 4 मार्च, बुध | होली |
| 19 मार्च, गुरु | उगादि |
| 26 मार्च, गुरु | राम नवमी |
| 19 अप्रैल, रवि | अक्षय तृतीया |
| 29 जुलाई, बुध | गुरु पूर्णिमा |
| 17 अगस्त, सोम | नाग पंचमी |
| 4 सितंबर, शुक्र | कृष्ण जन्माष्टमी |
| 14 सितंबर, सोम | गणेश चतुर्थी |
| 11 अक्टूबर, रवि | शारदीय नवरात्रि आरंभ |
| 19 अक्टूबर, सोम | दुर्गा अष्टमी |
| 20 अक्टूबर, मंगल | दशहरा (विजयादशमी) |
| 6 नवंबर, शुक्र | धनतेरस |
| 8 नवंबर, रवि | दीपावली (लक्ष्मी पूजा) |
| 24 नवंबर, मंगल | कार्तिक पूर्णिमा |
हर बड़े त्योहार की तिथि, मुहूर्त और दिन: हिंदू त्योहार 2026 और 2027।
2026 के महीने
तेलुगु कैलेंडर कैसे चलता है
महीनों के नाम चैत्र से फाल्गुन तक हैं। किस महीने का कौन-सा नाम होगा, यह इससे तय होता है कि महीना शुरू करने वाली अमावस्या के समय सूर्य किस राशि में है। अगर पूरे चंद्र मास में सूर्य एक ही राशि में बना रहे, तो वह महीना अधिक मास कहलाता है। हर दिन सूर्योदय के समय की तिथि से पहचाना जाता है।
उगादि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को आता है, मार्च या अप्रैल में। इसी दिन शक वर्ष बदलता है और नए संवत्सर का नाम शुरू होता है।
| # | महीना | Telugu |
|---|---|---|
| 1 | चैत्र | చైత్రము |
| 2 | वैशाख | వైశాఖము |
| 3 | ज्येष्ठ | జ్యేష్ఠము |
| 4 | आषाढ़ | ఆషాఢము |
| 5 | श्रावण | శ్రావణము |
| 6 | भाद्रपद | భాద్రపదము |
| 7 | आश्विन | ఆశ్వయుజము |
| 8 | कार्तिक | కార్తీకము |
| 9 | मार्गशीर्ष | మార్గశిరము |
| 10 | पौष | పుష్యము |
| 11 | माघ | మాఘము |
| 12 | फाल्गुन | ఫాల్గుణము |
दूसरे क्षेत्रीय कैलेंडर
- हिंदू कैलेंडर
- तमिल कैलेंडर
- कन्नड़ कैलेंडर
- मलयालम कैलेंडर
- मराठी कैलेंडर
- गुजराती कैलेंडर
- बंगाली कैलेंडर
- ओड़िया कैलेंडर
रोज़ का पूरा पंचांग (योग, करण, राहु काल) आज का पंचांग में देखें, और अमावस्या, पूर्णिमा और ग्रहण की पूरी सूची भी।
तेलुगु कैलेंडर के बारे में सवाल
2026 में तेलुगु नव वर्ष कब है?
19 मार्च 2026 को (उगादि)। उगादि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को आता है, मार्च या अप्रैल में। इसी दिन शक वर्ष बदलता है और नए संवत्सर का नाम शुरू होता है।
तेलुगु कैलेंडर के महीने कौन से हैं?
चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ, फाल्गुन।
क्या तेलुगु कैलेंडर सौर है या चंद्र?
चंद्र-सौर: महीने चंद्रमा से चलते हैं और उनके नाम सूर्य की राशि से तय होते हैं। महीनों के नाम चैत्र से फाल्गुन तक हैं। किस महीने का कौन-सा नाम होगा, यह इससे तय होता है कि महीना शुरू करने वाली अमावस्या के समय सूर्य किस राशि में है। अगर पूरे चंद्र मास में सूर्य एक ही राशि में बना रहे, तो वह महीना अधिक मास कहलाता है। हर दिन सूर्योदय के समय की तिथि से पहचाना जाता है।
ये समय किस शहर के हैं?
सूर्योदय, सूर्यास्त और दिन की तिथि Hyderabad के लिए निकाली गई है, समय IST में हैं। दूसरे शहरों में सूर्योदय कुछ मिनट आगे-पीछे होता है, और कभी-कभी सूर्योदय पर चल रही तिथि भी बदल सकती है।
कोई त्योहार मेरे स्थानीय पंचांग से एक दिन अलग क्यों दिख सकता है?
हर त्योहार उस दिन मनाया जाता है जब उसकी तिथि दिन के एक तय समय पर चल रही हो (जैसे सूर्योदय, दोपहर या प्रदोष)। परंपराओं के नियम थोड़े अलग होते हैं, इसलिए अपने परिवार की परंपरा या पुरोहित से पुष्टि कर लें।