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एकादशी 2026

एकादशी कब है: 2026 और 2027 की सभी एकादशी, नाम और पारण का समय

एकादशी चंद्र मास के हर पक्ष की 11वीं तिथि है, इसलिए यह महीने में दो बार आती है: एक बार बढ़ते चंद्रमा (शुक्ल पक्ष) में और एक बार घटते चंद्रमा (कृष्ण पक्ष) में। यह दिन व्रत और भगवान विष्णु की पूजा का माना जाता है, और आम साल की 24 एकादशियों में से हर एक का अपना नाम है (अधिक मास वाले साल में 26)। यहाँ 2026 और 2027 की हर एकादशी है, व्रत के दिन और व्रत खोलने के समय के साथ।

अगली एकादशी: रमा एकादशी, गुरुवार, 5 नवंबर 2026। पारण: शुक्रवार, 6 नवंबर, 6:18 am से 10:32 am तक।

एकादशी 2026 की तारीखें

एकादशीव्रत का दिनतिथि शुरू (IST)तिथि समाप्त (IST)पारण (नागपुर)
षटतिला एकादशी
पौष कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में माघ
बुधवार, 14 जनवरी 202613 जनवरी, 3:19 pm14 जनवरी, 5:54 pmगुरुवार, 15 जनवरी, 6:53 am से 5:52 pm तक
जया एकादशी
माघ शुक्ल पक्ष
गुरुवार, 29 जनवरी 202628 जनवरी, 4:37 pm29 जनवरी, 1:56 pmशुक्रवार, 30 जनवरी, 6:51 am से 11:10 am तक
विजया एकादशी
माघ कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में फाल्गुन
शुक्रवार, 13 फ़रवरी 202612 फ़रवरी, 12:23 pm13 फ़रवरी, 2:27 pmशनिवार, 14 फ़रवरी, 6:44 am से 4:03 pm तक
आमलकी एकादशी
फाल्गुन शुक्ल पक्ष
शुक्रवार, 27 फ़रवरी 202627 फ़रवरी, 12:34 am27 फ़रवरी, 10:34 pmशनिवार, 28 फ़रवरी, 6:35 am से 6:17 pm तक
पापमोचनी एकादशी
फाल्गुन कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में चैत्र
रविवार, 15 मार्च 202614 मार्च, 8:12 am15 मार्च, 9:17 amसोमवार, 16 मार्च, 6:21 am से 9:42 am तक
कामदा एकादशी
चैत्र शुक्ल पक्ष
रविवार, 29 मार्च 202628 मार्च, 8:47 am29 मार्च, 7:47 amसोमवार, 30 मार्च, 6:08 am से 7:11 am तक
वरूथिनी एकादशी
चैत्र कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में वैशाख
सोमवार, 13 अप्रैल 202613 अप्रैल, 1:18 am14 अप्रैल, 1:10 amमंगलवार, 14 अप्रैल, 6:55 am से 6:32 pm तक
मोहिनी एकादशी
वैशाख शुक्ल पक्ष
सोमवार, 27 अप्रैल 202626 अप्रैल, 6:08 pm27 अप्रैल, 6:17 pmमंगलवार, 28 अप्रैल, 5:45 am से 6:37 pm तक
अपरा एकादशी
वैशाख कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में ज्येष्ठ
बुधवार, 13 मई 202612 मई, 2:53 pm13 मई, 1:31 pmगुरुवार, 14 मई, 5:36 am से 11:21 am तक
पद्मिनी एकादशी
अधिक ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष
बुधवार, 27 मई 202626 मई, 5:12 am27 मई, 6:23 amगुरुवार, 28 मई, 5:32 am से 7:58 am तक
परमा एकादशी
अधिक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में अधिक ज्येष्ठ
गुरुवार, 11 जून 202611 जून, 12:59 am11 जून, 10:37 pmशुक्रवार, 12 जून, 5:31 am से 6:55 pm तक
निर्जला एकादशी
ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष
गुरुवार, 25 जून 202624 जून, 6:13 pm25 जून, 8:10 pmशुक्रवार, 26 जून, 5:34 am से 6:58 pm तक
योगिनी एकादशी
ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में आषाढ़
शुक्रवार, 10 जुलाई 2026
कई वैष्णव पंचांग इसे एक दिन बाद, शनिवार, 11 जुलाई को मानते हैं।
10 जुलाई, 8:17 am11 जुलाई, 5:24 amशनिवार, 11 जुलाई, 10:34 am से 6:59 pm तक
देवशयनी एकादशी
आषाढ़ शुक्ल पक्ष
शनिवार, 25 जुलाई 202624 जुलाई, 9:14 am25 जुलाई, 11:35 amरविवार, 26 जुलाई, 5:44 am से 1:59 pm तक
कामिका एकादशी
आषाढ़ कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में श्रावण
रविवार, 9 अगस्त 20268 अगस्त, 2:00 pm9 अगस्त, 11:06 amसोमवार, 10 अगस्त, 5:50 am से 8:02 am तक
श्रावण पुत्रदा एकादशी
श्रावण शुक्ल पक्ष
रविवार, 23 अगस्त 202623 अगस्त, 2:01 am24 अगस्त, 4:20 amसोमवार, 24 अगस्त, 10:50 am से 6:36 pm तक
अजा एकादशी
श्रावण कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में भाद्रपद
सोमवार, 7 सितंबर 20266 सितंबर, 7:30 pm7 सितंबर, 5:05 pmमंगलवार, 8 सितंबर, 5:58 am से 2:44 pm तक
परिवर्तिनी एकादशी
भाद्रपद शुक्ल पक्ष
मंगलवार, 22 सितंबर 202621 सितंबर, 8:02 pm22 सितंबर, 9:44 pmबुधवार, 23 सितंबर, 6:02 am से 6:09 pm तक
इंदिरा एकादशी
भाद्रपद कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में आश्विन
मंगलवार, 6 अक्टूबर 20266 अक्टूबर, 2:08 am7 अक्टूबर, 12:35 amबुधवार, 7 अक्टूबर, 6:15 am से 5:56 pm तक
पापांकुशा एकादशी
आश्विन शुक्ल पक्ष
गुरुवार, 22 अक्टूबर 202621 अक्टूबर, 2:13 pm22 अक्टूबर, 2:49 pmशुक्रवार, 23 अक्टूबर, 6:12 am से 2:37 pm तक
रमा एकादशी
आश्विन कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में कार्तिक
गुरुवार, 5 नवंबर 20264 नवंबर, 11:04 am5 नवंबर, 10:37 amशुक्रवार, 6 नवंबर, 6:18 am से 10:32 am तक
देवउठनी एकादशी
कार्तिक शुक्ल पक्ष
शुक्रवार, 20 नवंबर 2026
कई वैष्णव पंचांग इसे एक दिन बाद, शनिवार, 21 नवंबर को मानते हैं।
20 नवंबर, 7:17 am21 नवंबर, 6:32 amशनिवार, 21 नवंबर, 12:08 pm से 5:31 pm तक
उत्पन्ना एकादशी
कार्तिक कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में मार्गशीर्ष
शुक्रवार, 4 दिसंबर 20263 दिसंबर, 11:04 pm4 दिसंबर, 11:46 pmशनिवार, 5 दिसंबर, 6:36 am से 5:31 pm तक
मोक्षदा एकादशी
मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष
रविवार, 20 दिसंबर 202619 दिसंबर, 10:10 pm20 दिसंबर, 8:15 pmसोमवार, 21 दिसंबर, 6:46 am से 5:37 pm तक

एकादशी 2027 की तारीखें

एकादशीव्रत का दिनतिथि शुरू (IST)तिथि समाप्त (IST)पारण (नागपुर)
सफला एकादशी
मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में पौष
रविवार, 3 जनवरी 20272 जनवरी, 2:25 pm3 जनवरी, 4:09 pmसोमवार, 4 जनवरी, 6:51 am से 5:45 pm तक
पौष पुत्रदा एकादशी
पौष शुक्ल पक्ष
सोमवार, 18 जनवरी 2027
कई वैष्णव पंचांग इसे एक दिन बाद, मंगलवार, 19 जनवरी को मानते हैं।
18 जनवरी, 10:28 am19 जनवरी, 7:50 amमंगलवार, 19 जनवरी, 1:03 pm से 5:55 pm तक
षटतिला एकादशी
पौष कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में माघ
मंगलवार, 2 फ़रवरी 20271 फ़रवरी, 8:42 am2 फ़रवरी, 11:11 amबुधवार, 3 फ़रवरी, 6:50 am से 1:51 pm तक
जया एकादशी
माघ शुक्ल पक्ष
बुधवार, 17 फ़रवरी 202716 फ़रवरी, 8:20 pm17 फ़रवरी, 5:33 pmगुरुवार, 18 फ़रवरी, 6:42 am से 2:29 pm तक
विजया एकादशी
माघ कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में फाल्गुन
गुरुवार, 4 मार्च 20273 मार्च, 4:45 am4 मार्च, 7:25 amशुक्रवार, 5 मार्च, 6:31 am से 9:55 am तक
आमलकी एकादशी
फाल्गुन शुक्ल पक्ष
गुरुवार, 18 मार्च 202718 मार्च, 4:22 am19 मार्च, 1:52 amशुक्रवार, 19 मार्च, 7:13 am से 6:24 pm तक
पापमोचनी एकादशी
फाल्गुन कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में चैत्र
शुक्रवार, 2 अप्रैल 20272 अप्रैल, 12:46 am3 अप्रैल, 2:53 amशनिवार, 3 अप्रैल, 9:16 am से 6:28 pm तक
कामदा एकादशी
चैत्र शुक्ल पक्ष
शनिवार, 17 अप्रैल 202716 अप्रैल, 11:23 am17 अप्रैल, 9:29 amरविवार, 18 अप्रैल, 5:52 am से 7:43 am तक
वरूथिनी एकादशी
चैत्र कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में वैशाख
रविवार, 2 मई 20271 मई, 6:55 pm2 मई, 7:53 pmसोमवार, 3 मई, 5:42 am से 6:39 pm तक
मोहिनी एकादशी
वैशाख शुक्ल पक्ष
रविवार, 16 मई 202715 मई, 6:18 pm16 मई, 5:14 pmसोमवार, 17 मई, 5:35 am से 4:29 pm तक
अपरा एकादशी
वैशाख कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में ज्येष्ठ
मंगलवार, 1 जून 202731 मई, 10:03 am1 जून, 9:41 amबुधवार, 2 जून, 5:31 am से 8:30 am तक
निर्जला एकादशी
ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष
सोमवार, 14 जून 202714 जून, 2:13 am15 जून, 2:09 amमंगलवार, 15 जून, 8:14 am से 6:56 pm तक
योगिनी एकादशी
ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में आषाढ़
बुधवार, 30 जून 202729 जून, 10:05 pm30 जून, 8:32 pmगुरुवार, 1 जुलाई, 5:35 am से 6:16 pm तक
देवशयनी एकादशी
आषाढ़ शुक्ल पक्ष
बुधवार, 14 जुलाई 202713 जुलाई, 12:10 pm14 जुलाई, 1:11 pmगुरुवार, 15 जुलाई, 5:40 am से 2:41 pm तक
कामिका एकादशी
आषाढ़ कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में श्रावण
गुरुवार, 29 जुलाई 2027
कई वैष्णव पंचांग इसे एक दिन बाद, शुक्रवार, 30 जुलाई को मानते हैं।
29 जुलाई, 7:35 am30 जुलाई, 5:14 amशुक्रवार, 30 जुलाई, 10:30 am से 6:53 pm तक
श्रावण पुत्रदा एकादशी
श्रावण शुक्ल पक्ष
गुरुवार, 12 अगस्त 202712 अगस्त, 1:00 am13 अगस्त, 3:00 amशुक्रवार, 13 अगस्त, 9:35 am से 6:45 pm तक
अजा एकादशी
श्रावण कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में भाद्रपद
शनिवार, 28 अगस्त 202727 अगस्त, 3:26 pm28 अगस्त, 12:43 pmरविवार, 29 अगस्त, 5:56 am से 9:36 am तक
परिवर्तिनी एकादशी
भाद्रपद शुक्ल पक्ष
शनिवार, 11 सितंबर 202710 सितंबर, 5:01 pm11 सितंबर, 7:37 pmरविवार, 12 सितंबर, 5:59 am से 6:19 pm तक
इंदिरा एकादशी
भाद्रपद कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में आश्विन
रविवार, 26 सितंबर 202725 सितंबर, 10:32 pm26 सितंबर, 7:50 pmसोमवार, 27 सितंबर, 6:03 am से 4:56 pm तक
पापांकुशा एकादशी
आश्विन शुक्ल पक्ष
सोमवार, 11 अक्टूबर 202710 अक्टूबर, 11:42 am11 अक्टूबर, 2:09 pmमंगलवार, 12 अक्टूबर, 6:07 am से 4:15 pm तक
रमा एकादशी
आश्विन कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में कार्तिक
सोमवार, 25 अक्टूबर 202725 अक्टूबर, 5:41 am26 अक्टूबर, 3:23 amमंगलवार, 26 अक्टूबर, 8:48 am से 5:41 pm तक
देवउठनी एकादशी
कार्तिक शुक्ल पक्ष
बुधवार, 10 नवंबर 20279 नवंबर, 7:35 am10 नवंबर, 9:12 amगुरुवार, 11 नवंबर, 6:21 am से 10:08 am तक
उत्पन्ना एकादशी
कार्तिक कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में मार्गशीर्ष
बुधवार, 24 नवंबर 202723 नवंबर, 1:46 pm24 नवंबर, 12:12 pmगुरुवार, 25 नवंबर, 6:30 am से 10:52 am तक
मोक्षदा एकादशी
मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष
गुरुवार, 9 दिसंबर 20279 दिसंबर, 3:00 am10 दिसंबर, 3:21 amशुक्रवार, 10 दिसंबर, 9:14 am से 5:32 pm तक
सफला एकादशी
मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष (अमांत); उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में पौष
गुरुवार, 23 दिसंबर 202722 दिसंबर, 11:42 pm23 दिसंबर, 11:13 pmशुक्रवार, 24 दिसंबर, 6:47 am से 5:38 pm तक

तिथि का समय IST में है और पूरे भारत के लिए सही है। व्रत का दिन और पारण नागपुर के सूर्योदय और सूर्यास्त से निकाले गए हैं। गणना सूर्य और चंद्रमा की स्थिति से की गई है (निरयण, लाहिड़ी अयनांश); महीने अमांत हैं, और कृष्ण पक्ष की एकादशी के साथ वह महीना भी लिखा है जो उत्तर भारत के (पूर्णिमांत) कैलेंडर में आता है।

एकादशी का व्रत आम तौर पर कैसे रखा जाता है

  • बहुत से लोग एकादशी के सूर्योदय से अगले दिन सुबह पारण के समय तक व्रत रखते हैं। कुछ लोग निराहार रहते हैं, तो बहुत से लोग पानी, फल और दूध (फलाहार) लेते हैं।
  • एकादशी पर चावल, दूसरे अनाज और दालें आम तौर पर नहीं खाई जातीं, उन घरों में भी जहाँ व्रत नहीं रखा जाता।
  • घर पर या मंदिर में भगवान विष्णु की पूजा, उस महीने की एकादशी कथा का पाठ और विष्णु सहस्रनाम का जाप।
  • कुछ एकादशियों पर, जैसे देवशयनी (आषाढ़ी) और देवउठनी, परिवार रात में भजन करते हैं या विट्ठल और विष्णु मंदिर जाते हैं।
  • व्रत द्वादशी के दिन पारण के समय में खोला जाता है, आम तौर पर सादे भोजन से, और अन्न या कुछ और दान किया जाता है।

व्रत हर किसी के लिए ठीक नहीं होता। अगर आप गर्भवती हैं, बुज़ुर्ग हैं, आपको डायबिटीज़, ब्लड प्रेशर या कोई और बीमारी है, या आप रोज़ दवा लेते हैं, तो व्रत से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें। हल्का फलाहार व्रत, या सिर्फ़ अनाज छोड़ना भी इस दिन को मानने का एक आम तरीका है।

तारीख और पारण कैसे निकाले गए हैं

एकादशी वह तिथि है जिसमें चंद्रमा सूर्य से 120° से 132° आगे होता है (शुक्ल पक्ष), या 300° से 312° (कृष्ण पक्ष)। इसके शुरू और खत्म होने का समय सूर्य और चंद्रमा की स्थिति से निकलता है। व्रत का दिन गृहस्थों (स्मार्त) के आम नियम से, नागपुर के सूर्योदय पर तय किया गया है:

  • एकादशी एक दिन के सूर्योदय पर हो: व्रत उसी दिन। दो दिन के सूर्योदय पर हो: व्रत दूसरे दिन।
  • अगर द्वादशी अगले सूर्योदय से पहले ही खत्म हो जाए और पारण के लिए द्वादशी की सुबह न बचे, तो व्रत एक दिन पहले।
  • एकादशी किसी भी सूर्योदय पर न हो (क्षय तिथि): व्रत उस दिन जिस दिन तिथि शुरू होती है।

पारण अगले दिन होता है: सूर्योदय के बाद, हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) बीतने पर और द्वादशी खत्म होने से पहले। अगर द्वादशी सूर्यास्त के बाद तक चले, तो तालिका में समय सूर्यास्त तक ही दिया है। आपके परिवार या मंदिर का पंचांग कोई और नियम मान सकता है, खास कर वैष्णव और इस्कॉन परंपरा में; जिस पर आपका भरोसा है, उसी को मानें।

आज की तिथि, पूरा पंचांग, और अमावस्या व पूर्णिमा की तारीखें भी देखें।

एकादशी के बारे में सवाल

एकादशी कब है?

इस पेज में सबसे ऊपर अगली एकादशी दी गई है, और तालिकाओं में इस साल और अगले साल की हर एकादशी है: व्रत का दिन, तिथि का समय और पारण का समय। अभी चल रही या अगली एकादशी अलग रंग में दिखती है।

किसी दूसरे कैलेंडर में अलग दिन क्यों दिखता है?

एकादशी तिथि घड़ी के दिन से कम ही मेल खाती है। इस पेज पर गृहस्थों (स्मार्त) का दिन नागपुर के सूर्योदय से दिया गया है। जब तिथि सूर्योदय के बाद शुरू होकर अगले सूर्योदय से पहले खत्म हो जाए, या द्वादशी अगले सूर्योदय से पहले खत्म हो, तो कई वैष्णव और इस्कॉन कैलेंडर व्रत एक दिन बाद रखते हैं। तालिका में ऐसे दिन लिखे गए हैं।

पारण क्या है और व्रत कब खोलें?

पारण का मतलब है अगले दिन, द्वादशी को, एकादशी का व्रत खोलना। यह सूर्योदय के बाद, हरि वासर बीतने पर और द्वादशी खत्म होने से पहले किया जाता है। तालिका का समय नागपुर के सूर्योदय से निकाला गया है; ज़्यादातर लोग इस समय के सुबह वाले हिस्से में व्रत खोलते हैं।

हरि वासर क्या है?

द्वादशी तिथि का पहला चौथाई भाग। इस समय में आम तौर पर व्रत नहीं खोला जाता, इसलिए जब हरि वासर सूर्योदय के बाद तक चले, तो पारण दिन में थोड़ा देर से शुरू होता है।

क्या यह समय पूरे भारत के लिए सही है?

तिथि हर जगह एक ही पल में शुरू और खत्म होती है, इसलिए तिथि का IST समय पूरे भारत के लिए सही है। व्रत का दिन और पारण सूर्योदय पर निर्भर करते हैं, इसलिए नागपुर से दूर के शहर में पारण थोड़ा पहले या बाद में शुरू हो सकता है, और कभी कभार व्रत का दिन भी बदल सकता है।

क्या बिना पानी का व्रत ज़रूरी है?

नहीं। परिवार एकादशी कई तरह से मानते हैं: निराहार, सिर्फ़ पानी के साथ, फलाहार, या बस अनाज छोड़कर। कोई बीमारी हो, गर्भावस्था हो या उम्र ज़्यादा हो, तो व्रत से पहले डॉक्टर से ज़रूर पूछें।