वैदिक ज्योतिष · नवग्रह
नवग्रह: नौ ग्रह, उनके मंत्र और आज की स्थिति
हर ग्रह का बीज मंत्र, नवग्रह स्तोत्र का श्लोक, वार, रंग, रत्न, महादशा के वर्ष, आज की राशि और आम तौर पर सुझाए जाने वाले उपाय।
नौ ग्रह एक नज़र में
| ग्रह | वार | रंग | रत्न | महादशा | आज की राशि |
|---|---|---|---|---|---|
| सूर्य | रविवार | सुनहरा, नारंगी | माणिक्य (माणिक) | 6 वर्ष | तुला |
| चंद्र | सोमवार | सफ़ेद, क्रीम | मोती | 10 वर्ष | मेष |
| मंगल | मंगलवार | लाल | मूंगा | 7 वर्ष | कर्क |
| बुध | बुधवार | हरा | पन्ना | 17 वर्ष | तुला (वक्री) |
| गुरु | गुरुवार | पीला | पुखराज | 16 वर्ष | कर्क |
| शुक्र | शुक्रवार | सफ़ेद, हल्का गुलाबी | हीरा या सफ़ेद पुखराज | 20 वर्ष | तुला (वक्री) |
| शनि | शनिवार | गहरा नीला, काला | नीलम | 19 वर्ष | मीन (वक्री) |
| राहु | अपना वार नहीं | नीला, स्लेटी | गोमेद | 18 वर्ष | कुंभ |
| केतु | अपना वार नहीं | हल्का हरा, सफ़ेद | लहसुनिया | 7 वर्ष | सिंह |
रंग साइट की ग्रह तालिका से हैं, जो अंक ज्योतिष कैलकुलेटर में भी काम आती है। आज की राशि सुबह 6 बजे (IST) की है; अंश, नक्षत्र और अगला राशि परिवर्तन आज ग्रहों की स्थिति पर देखें।
नवग्रह का अर्थ
नवग्रह का अर्थ है नौ ग्रह। वैदिक ज्योतिष में कुंडली इन्हीं नौ की स्थिति से बनती है: हर ग्रह किसी राशि, भाव और नक्षत्र में बैठता है, और उसी से पढ़ा जाता है कि जीवन का कौन सा हिस्सा किस ग्रह से जुड़ा है।
सूर्य और चंद्र प्रकाश देने वाले हैं, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि पाँच दिखने वाले ग्रह हैं, और राहु-केतु छाया ग्रह। हर ग्रह किसी वार, रंग, रत्न और अंक से जोड़ा जाता है, और विंशोत्तरी दशा में हर ग्रह का अपना समय आता है।
नवग्रह मंत्र (नौ ग्रहों की प्रार्थना)
ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च।
गुरुश्च शुक्रः शनिराहुकेतवः सर्वे ग्रहाः शान्तिकरा भवन्तु॥
रोमन लिपि में: brahmā murāris tripurāntakārī bhānuḥ śaśī bhūmisuto budhaś ca /
guruś ca śukraḥ śani-rāhu-ketavaḥ sarve grahāḥ śānti-karā bhavantu
अर्थ: ब्रह्मा, विष्णु (मुरारि) और शिव (त्रिपुरासुर का अंत करने वाले), तथा सूर्य, चंद्र, मंगल (भूमि पुत्र), बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु, सभी ग्रह शांति देने वाले हों।
नौ ग्रहों के बीज मंत्र
हर ग्रह के पेज पर उसका बीज मंत्र, नवग्रह स्तोत्र का श्लोक, अर्थ, जाप संख्या और सरल उपाय हैं।
- सूर्यॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमःOm hrāṃ hrīṃ hrauṃ saḥ sūryāya namaḥ
- चंद्रॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमःOm śrāṃ śrīṃ śrauṃ saḥ candrāya namaḥ
- मंगलॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमःOm krāṃ krīṃ krauṃ saḥ bhaumāya namaḥ
- बुधॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमःOm brāṃ brīṃ brauṃ saḥ budhāya namaḥ
- गुरुॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमःOm grāṃ grīṃ grauṃ saḥ gurave namaḥ
- शुक्रॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमःOm drāṃ drīṃ drauṃ saḥ śukrāya namaḥ
- शनिॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमःOm prāṃ prīṃ prauṃ saḥ śanaiścarāya namaḥ
- राहुॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमःOm bhrāṃ bhrīṃ bhrauṃ saḥ rāhave namaḥ
- केतुॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमःOm srāṃ srīṃ srauṃ saḥ ketave namaḥ
नवग्रह कहाँ काम आते हैं
राशिफल ग्रहों के गोचर से पढ़ा जाता है, दशा ग्रहों का समय बताती है, और जन्म कुंडली में नौ ग्रहों की जन्म के समय की स्थिति होती है। ग्रहों के लाल किताब उपाय लाल किताब के उपाय पेज पर हैं, और अपने मूलांक का रत्न रत्न कैलकुलेटर से देखें।
मंत्र प्रचलित प्रकाशित रूप में हैं; जाप संख्या और उपाय वही हैं जो परंपरा में आम तौर पर सुझाए जाते हैं, किसी नतीजे का वादा नहीं।
नवग्रह से जुड़े सवाल
नवग्रह कौन से हैं?
सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु। पहले सात आकाश में दिखने वाले पिंड हैं; राहु और केतु वे दो बिंदु हैं जहाँ चंद्रमा का मार्ग सूर्य के मार्ग को काटता है। "ग्रह" का अर्थ है "पकड़ने वाला", यानी जो जीवन पर अपना असर डालता है।
नवग्रह मंत्र कौन सा है?
नौ ग्रहों की एक साथ प्रार्थना का सबसे प्रचलित श्लोक है: ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च। गुरुश्च शुक्रः शनिराहुकेतवः सर्वे ग्रहाः शान्तिकरा भवन्तु॥ अर्थ: ब्रह्मा, विष्णु (मुरारि) और शिव (त्रिपुरासुर का अंत करने वाले), तथा सूर्य, चंद्र, मंगल (भूमि पुत्र), बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु, सभी ग्रह शांति देने वाले हों। हर ग्रह का अपना बीज मंत्र उसके पेज पर है।
राहु और केतु को छाया ग्रह क्यों कहते हैं?
क्योंकि इनका कोई पिंड नहीं है। ये चंद्रमा की कक्षा के दो पात (नोड) हैं, हमेशा एक-दूसरे के ठीक सामने और हमेशा उल्टी चाल में। सूर्य या चंद्र ग्रहण इन्हीं बिंदुओं के पास होता है।
मुझे किस ग्रह का मंत्र जपना चाहिए?
यह आपकी कुंडली से तय होता है: अक्सर चल रही महादशा का ग्रह, या वह ग्रह जो कुंडली में कमज़ोर या परेशान हो। अपनी दशा दशा कैलकुलेटर से और नौ ग्रहों की स्थिति जन्म कुंडली से देखें।
विंशोत्तरी दशा में ग्रहों का क्रम क्या है?
केतु 7, शुक्र 20, सूर्य 6, चंद्र 10, मंगल 7, राहु 18, गुरु 16, शनि 19 और बुध 17 वर्ष, कुल 120 वर्ष। जन्म के समय चंद्रमा का नक्षत्र तय करता है कि दशा किस ग्रह से शुरू होगी।