तमिल कैलेंडर · सौर
तमिल कैलेंडर: इस महीने के दिन, त्योहार और महीने
तमिल कैलेंडर सौर कैलेंडर है: सूर्य जब अगली निरयण राशि में जाता है, तब नया महीना शुरू होता है। वर्ष अप्रैल के बीच चित्तिरै माह से शुरू होता है, और हर वर्ष का अपना नाम होता है, जो 60 वर्षों के चक्र से आता है।
आज: 10 ऐप्पसी, प्रतिपदा · संवत्सर Parabhava
तमिल कैलेंडर, अक्टूबर 2026
- महीने: पुरट्टासी (புரட்டாசி) · ऐप्पसी (ஐப்பசி)
- संवत्सर: Parabhava
शु = शुक्ल पक्ष, कृ = कृष्ण पक्ष। तिथि सूर्योदय के समय की है, और अगर अगले सूर्योदय से पहले बदलती है तो उसका समय दिया है। ☆ नक्षत्र, ☾ चंद्र राशि, ☼ सूर्योदय और सूर्यास्त, Chennai के लिए, IST में।
अक्टूबर 2026 के ख़ास दिन
| तारीख | महीना | क्या है |
|---|---|---|
| 6 अक्टूबर, मंगल | पुरट्टासी 20 | कृष्ण पक्ष एकादशी |
| 10 अक्टूबर, शनि | पुरट्टासी 24 | अमावस्या |
| 11 अक्टूबर, रवि | पुरट्टासी 25 | शारदीय नवरात्रि आरंभ |
| 17 अक्टूबर, शनि | पुरट्टासी 31 | तुला संक्रांति, 7:56 pm |
| 19 अक्टूबर, सोम | ऐप्पसी 2 | दुर्गा अष्टमी |
| 20 अक्टूबर, मंगल | ऐप्पसी 3 | दशहरा (विजयादशमी) |
| 22 अक्टूबर, गुरु | ऐप्पसी 5 | शुक्ल पक्ष एकादशी |
| 26 अक्टूबर, सोम | ऐप्पसी 9 | पूर्णिमा |
तमिल त्योहार 2026
2026 के मुख्य त्योहार, Chennai की गणना से। तारीख पर क्लिक करके उस महीने का पूरा कैलेंडर देखें।
| तारीख | त्योहार |
|---|---|
| 14 जनवरी, बुध | मकर संक्रांति |
| 14 जनवरी, बुध | पोंगल |
| 1 फ़रवरी, रवि | थाईपूसम |
| 15 फ़रवरी, रवि | महाशिवरात्रि |
| 26 मार्च, गुरु | राम नवमी |
| 14 अप्रैल, मंगल | पुथांडु (तमिल नव वर्ष) |
| 19 अप्रैल, रवि | अक्षय तृतीया |
| 29 जुलाई, बुध | गुरु पूर्णिमा |
| 4 सितंबर, शुक्र | कृष्ण जन्माष्टमी |
| 14 सितंबर, सोम | गणेश चतुर्थी |
| 11 अक्टूबर, रवि | शारदीय नवरात्रि आरंभ |
| 19 अक्टूबर, सोम | दुर्गा अष्टमी |
| 20 अक्टूबर, मंगल | दशहरा (विजयादशमी) |
| 8 नवंबर, रवि | दीपावली (लक्ष्मी पूजा) |
| 24 नवंबर, मंगल | कार्तिक पूर्णिमा |
| 24 नवंबर, मंगल | कार्तिगई दीपम |
हर बड़े त्योहार की तिथि, मुहूर्त और दिन: हिंदू त्योहार 2026 और 2027।
2026 के महीने
तमिल कैलेंडर कैसे चलता है
जिस दिन संक्रांति हो, अगर सूर्य सूर्यास्त से पहले राशि बदल ले तो उसी दिन से महीना शुरू होता है; सूर्यास्त के बाद बदले तो अगले दिन से। इसी वजह से तमिल महीने 29 से 32 दिन तक के होते हैं। दीपावली और विनायक चतुर्थी जैसे त्योहार चंद्रमा की तिथि से तय होते हैं, जबकि तै पोंगल (थाई पोंगल) और पुथांडु सूर्य से।
तमिल नववर्ष पुथांडु चित्तिरै माह का पहला दिन है, जब अप्रैल के बीच सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है।
| # | महीना | Tamil | सूर्य की राशि |
|---|---|---|---|
| 1 | चित्तिरै | சித்திரை | मेष |
| 2 | वैकासी | வைகாசி | वृषभ |
| 3 | आनी | ஆனி | मिथुन |
| 4 | आडी | ஆடி | कर्क |
| 5 | आवणी | ஆவணி | सिंह |
| 6 | पुरट्टासी | புரட்டாசி | कन्या |
| 7 | ऐप्पसी | ஐப்பசி | तुला |
| 8 | कार्तिगै | கார்த்திகை | वृश्चिक |
| 9 | मार्गळि | மார்கழி | धनु |
| 10 | तै | தை | मकर |
| 11 | मासी | மாசி | कुंभ |
| 12 | पंगुनी | பங்குனி | मीन |
दूसरे क्षेत्रीय कैलेंडर
- हिंदू कैलेंडर
- तेलुगु कैलेंडर
- कन्नड़ कैलेंडर
- मलयालम कैलेंडर
- मराठी कैलेंडर
- गुजराती कैलेंडर
- बंगाली कैलेंडर
- ओड़िया कैलेंडर
रोज़ का पूरा पंचांग (योग, करण, राहु काल) आज का पंचांग में देखें, और अमावस्या, पूर्णिमा और ग्रहण की पूरी सूची भी।
तमिल कैलेंडर के बारे में सवाल
2026 में तमिल नव वर्ष कब है?
14 अप्रैल 2026 को (पुथांडु (तमिल नव वर्ष))। तमिल नववर्ष पुथांडु चित्तिरै माह का पहला दिन है, जब अप्रैल के बीच सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है।
तमिल कैलेंडर के महीने कौन से हैं?
चित्तिरै, वैकासी, आनी, आडी, आवणी, पुरट्टासी, ऐप्पसी, कार्तिगै, मार्गळि, तै, मासी, पंगुनी।
क्या तमिल कैलेंडर सौर है या चंद्र?
सौर: हर महीना तब शुरू होता है जब सूर्य अगली राशि में जाता है। जिस दिन संक्रांति हो, अगर सूर्य सूर्यास्त से पहले राशि बदल ले तो उसी दिन से महीना शुरू होता है; सूर्यास्त के बाद बदले तो अगले दिन से। इसी वजह से तमिल महीने 29 से 32 दिन तक के होते हैं। दीपावली और विनायक चतुर्थी जैसे त्योहार चंद्रमा की तिथि से तय होते हैं, जबकि तै पोंगल (थाई पोंगल) और पुथांडु सूर्य से।
ये समय किस शहर के हैं?
सूर्योदय, सूर्यास्त और दिन की तिथि Chennai के लिए निकाली गई है, समय IST में हैं। दूसरे शहरों में सूर्योदय कुछ मिनट आगे-पीछे होता है, और कभी-कभी सूर्योदय पर चल रही तिथि भी बदल सकती है।
कोई त्योहार मेरे स्थानीय पंचांग से एक दिन अलग क्यों दिख सकता है?
हर त्योहार उस दिन मनाया जाता है जब उसकी तिथि दिन के एक तय समय पर चल रही हो (जैसे सूर्योदय, दोपहर या प्रदोष)। परंपराओं के नियम थोड़े अलग होते हैं, इसलिए अपने परिवार की परंपरा या पुरोहित से पुष्टि कर लें।