वास्तु शास्त्र · Vastu Shastra
मकान बनवाते समय वास्तु: प्लॉट से गृह प्रवेश तक, एक-एक कदम
मकान बनवाते समय वास्तु में मकान प्लॉट के दक्षिण-पश्चिम की ओर रखा जाता है और उत्तर व पूर्व में ज़्यादा खुली जगह छोड़ी जाती है। खुदाई आम तौर पर उत्तर-पूर्व से शुरू की जाती है और नींव आम तौर पर दक्षिण-पश्चिम से डाली जाती है। दक्षिण और पश्चिम की दीवारें ऊँची और भारी रखी जाती हैं, और उत्तर व पूर्व को हल्का रखा जाता है, जिनमें ज़्यादा दरवाज़े और खिड़कियाँ होती हैं।
प्लॉट पर मकान की स्थिति: छोटा जवाब
सबसे अच्छा: दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य)। ठीक: दक्षिण, पश्चिम, उत्तर-पश्चिम (वायव्य), दक्षिण-पूर्व (आग्नेय)। बचें: उत्तर-पूर्व (ईशान), उत्तर, पूर्व। मकान दक्षिण-पश्चिम की ओर बनाएँ और उत्तर व पूर्व में ज़्यादा खुली जगह छोड़ें।
खाली प्लॉट से मकान बनवाना ही वह मौका है जब वास्तु की हर बात बिना किसी समझौते के मानी जा सकती है। नीचे वे चरण क्रम से दिए हैं जिनसे ज़्यादातर सलाहकार गुज़रते हैं, और हर चरण पर आम तौर पर जाँची जाने वाली बातें भी। कुछ बातों पर परंपराएँ अलग राय रखती हैं, और उन्हें साफ़ बताया गया है।
बनवाने से पहले: प्लॉट और नक्शा
शुरुआत प्लॉट से करें: उसकी दिशा, आकार, ढलान और आसपास का माहौल। चौकोर या आयताकार प्लॉट, जिसकी ढलान उत्तर या पूर्व की ओर हो, आम तौर पर पहली पसंद होता है। ये जाँचें प्लॉट वास्तु की गाइड में दी गई हैं, और प्लॉट वास्तु कैलकुलेटर इन पर स्कोर देता है।
फिर आर्किटेक्ट के ढाँचा तय करने से पहले ही नक्शे में हर कमरे को उसकी पारंपरिक दिशा में रखें, क्योंकि कागज़ पर कमरा खिसकाना दीवारें खड़ी होने के बाद की तुलना में कहीं आसान है। नीचे की तालिका में कमरा दर कमरा वह नक्शा है जो ज़्यादातर वास्तु पुस्तकें देती हैं।
| मकान का हिस्सा | आम तौर पर कहाँ रखा जाता है | आम तौर पर कहाँ से बचा जाता है |
|---|---|---|
| मुख्य द्वार | उत्तर, उत्तर-पूर्व या पूर्व | दक्षिण-पश्चिम, दक्षिण-पूर्व |
| रसोई | दक्षिण-पूर्व | उत्तर-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम, उत्तर |
| मुख्य शयनकक्ष | दक्षिण-पश्चिम | उत्तर-पूर्व, दक्षिण-पूर्व |
| पूजा घर | उत्तर-पूर्व | दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम, दक्षिण-पूर्व, उत्तर-पश्चिम |
| शौचालय | उत्तर-पश्चिम या पश्चिम | उत्तर-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम |
| सीढ़ियाँ | दक्षिण, पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम | उत्तर-पूर्व, उत्तर, पूर्व |
| भूमिगत टंकी या बोरवेल | उत्तर-पूर्व, उत्तर या पूर्व | दक्षिण-पश्चिम, दक्षिण-पूर्व, दक्षिण |
| छत की टंकी | दक्षिण-पश्चिम, पश्चिम या दक्षिण | उत्तर-पूर्व, उत्तर, पूर्व, दक्षिण-पूर्व |
काम की शुरुआत: भूमि पूजन, खुदाई और नींव
परंपरा से काम चुने हुए मुहूर्त पर भूमि पूजन से शुरू होता है। खुदाई आम तौर पर उत्तर-पूर्व कोने से शुरू की जाती है, जो हल्का और पवित्र क्षेत्र है, और मिट्टी पहले वहीं से निकाली जाती है।
नींव आम तौर पर दक्षिण-पश्चिम कोने से डाली जाती है, जो पृथ्वी और स्थिरता का क्षेत्र है, और शिलान्यास का पत्थर भी अक्सर वहीं रखा जाता है। कुछ परंपराएँ पहला पत्थर उत्तर-पूर्व में रखती हैं, इसलिए शुरू से अंत तक एक ही सलाहकार की पद्धति मानना ठीक रहता है।
- तारीख मुहूर्त से या मालिक की शुभ तिथि से चुनें।
- खुदाई पहले उत्तर-पूर्व में करें।
- नींव दक्षिण-पश्चिम से शुरू करें।
- काम चलते समय प्लॉट का उत्तर-पूर्व हिस्सा जमा सामान और मलबे से खाली रखें।
दीवारें, फ़र्श, दरवाज़े और खिड़कियाँ
दक्षिण और पश्चिम की दीवारें आम तौर पर उत्तर और पूर्व की दीवारों से मोटी और ऊँची बनाई जाती हैं, इस नियम के अनुसार कि दक्षिण और पश्चिम भारी रहें और उत्तर व पूर्व हल्के। फ़र्श का स्तर भी आम तौर पर दक्षिण और पश्चिम में थोड़ा ऊँचा और उत्तर व पूर्व की ओर नीचा रखा जाता है।
ज़्यादातर दरवाज़े और खिड़कियाँ उत्तर और पूर्व की दीवारों पर होती हैं, ताकि सुबह की रोशनी और हवा अंदर आए। बहुत से सलाहकार घर में दरवाज़ों और खिड़कियों की संख्या सम (जोड़े में) रखना पसंद करते हैं। मुख्य द्वार आम तौर पर घर का सबसे बड़ा दरवाज़ा होता है और अंदर की ओर खुलता है।
छत, टंकियाँ, बीच का भाग और चारदीवारी
छत की ढलान या पानी की निकासी आम तौर पर उत्तर या पूर्व की ओर रखी जाती है। छत की टंकी मकान के दक्षिण-पश्चिम, पश्चिम या दक्षिण हिस्से के ऊपर होती है, और भूमिगत टंकी या बोरवेल प्लॉट के उत्तर-पूर्व, उत्तर या पूर्व में।
मकान का बीच का भाग, यानी ब्रह्मस्थान, जहाँ तक हो सके खुला रखा जाता है, बिना खंभे, बीम या शौचालय के। चारदीवारी आम तौर पर दक्षिण और पश्चिम में उत्तर और पूर्व से ऊँची रहती है, और मुख्य गेट भी उन्हीं दिशाओं में होता है जो मुख्य द्वार के लिए बताई गई हैं।
काम पूरा होना और गृह प्रवेश
परंपरा से गृह प्रवेश से पहले मकान पूरा कर लिया जाता है: दरवाज़े लग जाएँ, छत पूरी हो जाए और पुताई हो जाए। गृह प्रवेश की पूजा चुने हुए मुहूर्त पर होती है, और परिवार आम तौर पर कलश लेकर या दीपक जलाकर मुख्य द्वार से अंदर आता है।
बहुत से परिवार गृह प्रवेश के दिन नई रसोई में पहले कुछ सादा बनाते हैं, जैसे दूध को उफान आने तक उबालना।
अपने प्लॉट का वास्तु ख़ुद जाँचें। ज़मीन खरीदने या मकान बनवाने से पहले प्लॉट को पारंपरिक वास्तु नियमों पर जाँचें।
प्लॉट वास्तु कैलकुलेटरक्या करें
- नक्शा बनने से पहले कम्पास से प्लॉट की दिशाएँ जाँचें।
- ढाँचा तय होने से पहले कागज़ पर हर कमरे को उसकी दिशा में रखें।
- खुदाई उत्तर-पूर्व से शुरू करें और नींव दक्षिण-पश्चिम से डालें।
- दक्षिण और पश्चिम की दीवारें और फ़र्श ऊँचे और भारी रखें।
- सबसे ज़्यादा दरवाज़े और खिड़कियाँ उत्तर और पूर्व में रखें।
- मकान का बीच का भाग खुला रखें।
- मकान पूरा होने के बाद ही, चुनी हुई तारीख पर, रहने जाएँ।
क्या न करें
- मकान को प्लॉट के उत्तर-पूर्व हिस्से में न बनाएँ।
- निर्माण के दौरान उत्तर-पूर्व में रेत, ईंटें या मलबा जमा न करें।
- शौचालय या सीढ़ियाँ उत्तर-पूर्व या बीच के भाग में न बनाएँ।
- उत्तर और पूर्व की दीवारें दक्षिण और पश्चिम से ऊँची न बनाएँ।
- छत की टंकी उत्तर-पूर्व के ऊपर न रखें।
- वास्तु की बातें ढाँचा खड़ा होने तक न टालें, तब बदलाव कहीं महँगा पड़ता है।
बिना तोड़-फोड़ के सुधार
- जहाँ प्लॉट टेढ़ा-मेढ़ा हो, वहाँ बहुत से सलाहकार उसके अंदर चौकोर या आयताकार मकान बनाने और बाकी जगह को बगीचे की तरह इस्तेमाल करने का सुझाव देते हैं।
- अगर किसी कमरे को उसकी दिशा से बाहर रखना ही पड़े, तो कमरे के अंदर चीज़ों की जगह ठीक करना (पलंग, चूल्हा, मेज़) आम तौर पर पहला सुझाया जाने वाला कदम है।
- जहाँ दक्षिण और पश्चिम की ओर खुला या नीचा हो, वहाँ ऊँची चारदीवारी या ऊँचे पेड़ आम तौर पर सुझाए जाते हैं।
ये पारंपरिक प्रथाएँ हैं जिन्हें बहुत से परिवार मानते हैं। वास्तु की अलग-अलग पद्धतियों में ये अलग हो सकती हैं; आपके अपने घर के लिए कौन सी बातें सबसे ज़रूरी हैं, यह कोई सलाहकार बता सकता है।
सवाल और जवाब
वास्तु के अनुसार मकान बनाने का काम किस कोने से शुरू हो?
खुदाई आम तौर पर उत्तर-पूर्व कोने से शुरू की जाती है, और नींव आम तौर पर दक्षिण-पश्चिम से डाली जाती है। कुछ परंपराएँ पहला पत्थर उत्तर-पूर्व में रखती हैं, इसलिए शुरू से अंत तक एक ही सलाहकार की पद्धति मानें।
प्लॉट पर मकान कहाँ हो?
प्लॉट के दक्षिण-पश्चिम की ओर, और उत्तर व पूर्व में ज़्यादा खुली जगह छोड़कर। मुख्य मकान के लिए उत्तर-पूर्व, उत्तर और पूर्व से बचा जाता है।
वास्तु के अनुसार कौन सी दीवारें ऊँची हों?
दक्षिण और पश्चिम की दीवारें, और उन तरफ़ की चारदीवारी भी, आम तौर पर उत्तर और पूर्व से ऊँची और मोटी रखी जाती हैं।
मकान में कितने दरवाज़े और खिड़कियाँ हों?
बहुत से सलाहकार दरवाज़ों और खिड़कियों की सम संख्या पसंद करते हैं, और उनमें से ज़्यादातर उत्तर और पूर्व की दीवारों पर।
नए मकान में कब रहने जाएँ?
परंपरा से मकान पूरा होने के बाद, जब दरवाज़े लग जाएँ और छत पूरी हो जाए, गृह प्रवेश के लिए चुनी गई तारीख पर।
वास्तु की और गाइड
- प्लॉट का वास्तु: प्लॉट की दिशा, आकार, ढलान, सड़कें और मिट्टी: खरीदने या बनवाने से पहले वास्तु में आम तौर पर क्या देखा जाता है।
- घर के लिए वास्तु सुझाव: हर कमरा पारंपरिक रूप से कहाँ होता है, बीच की जगह और कोनों को कैसे रखें, और फ़्लैट में क्या बदलें।
- मुख्य द्वार का वास्तु: मुख्य द्वार के लिए सबसे अच्छी दिशाएँ, दीवार पर उसकी जगह, और उसके रास्ते में क्या न रखें।
- पानी की टंकी का वास्तु: बोरवेल, सम्प, छत की टंकी और सेप्टिक टैंक कहाँ हों, और किन दिशाओं से बचें।
- सीढ़ियों का वास्तु: सीढ़ियों की सबसे अच्छी दिशा, घड़ी की दिशा में चढ़ाई, सीढ़ियों की संख्या और उनके नीचे की जगह।
आपकी अपनी सबसे अच्छी दिशाएँ आपके कुआ नंबर से निकलती हैं। घर के वास्तु कैलकुलेटर से पूरा घर जाँचें, देखें कि आपका मकान नंबर आपके लिए ठीक है या नहीं, और अपना लकी नंबर जानें। और टूल: सभी फ़्री कैलकुलेटर।
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