विवाह · सप्तम भाव · दशा
जन्म तिथि से विवाह भविष्यवाणी
शादी कब होगी, यह सवाल ज्योतिष में कुंडली के सप्तम भाव से शुरू होता है। अपनी जन्म तिथि, जन्म का समय और जन्म स्थान भरें। कैलकुलेटर बताएगा कि सप्तम भाव में कौन-सी राशि है, उसका स्वामी कहाँ बैठा है, शुक्र और गुरु की क्या स्थिति है, मांगलिक जाँच क्या कहती है, और 18 से 45 वर्ष की आयु में विंशोत्तरी दशा की कौन-सी अवधियाँ परंपरा से विवाह के लिए सहायक मानी जाती हैं। यह संकेत और अवधियाँ दिखाता है, कोई पक्की तारीख नहीं। गणना आपके ब्राउज़र में होती है, कुछ भी सेव नहीं होता।
मेरी कुंडली में विवाह के संकेत देखें
संकेत के लिए, भविष्यवाणी के लिए नहीं। विवाह की तारीख गणना से नहीं निकाली जा सकती। यह पेज दिखाता है कि कुंडली किन बातों में साथ देती है और कहाँ ध्यान माँगती है। नमिता जी कोई भी राय देने से पहले पूरी कुंडली देखती हैं।
विवाह के संकेत कैसे निकाले जाते हैं
- कुंडली बनती है। आपके जन्म के समय का लग्न और नौ ग्रह निरयण पद्धति (लाहिड़ी अयनांश) से निकाले जाते हैं, और हर राशि एक पूरा भाव मानी जाती है, ठीक जन्म कुंडली की तरह।
- सप्तम भाव देखा जाता है। यह लग्न के ठीक सामने वाली राशि है। इसका स्वामी, इसमें बैठे ग्रह और इस पर पड़ने वाली दृष्टि लिखी जाती है। हर ग्रह अपने से सातवें भाव को देखता है; इसके अलावा मंगल चौथे और आठवें को, गुरु पाँचवें और नौवें को, और शनि तीसरे और दसवें को भी देखता है।
- विवाह के कारक जाँचे जाते हैं। शुक्र और गुरु परंपरा से विवाह के कारक ग्रह हैं। दोनों की राशि, भाव और बल (स्वराशि, उच्च या नीच) लिखा जाता है।
- मांगलिक नतीजा जुड़ता है, जो मांगलिक दोष कैलकुलेटर के नियमों से निकलता है।
- सहायक अवधियाँ चुनी जाती हैं। विंशोत्तरी दशा की हर अंतर्दशा, जो 18 से 45 वर्ष की आयु में पड़ती है, जाँची जाती है। पहली शर्त यह है कि अंतर्दशा का स्वामी विवाह से जुड़ा ग्रह हो: सप्तमेश, द्वितीयेश, शुक्र, गुरु या सप्तम भाव में बैठा कोई ग्रह। यह शर्त पूरी हो तो एक अंक। महादशा का स्वामी भी ऐसा ही ग्रह हो तो दूसरा अंक, और उस अंतर्दशा के कम से कम 60 दिन गुरु गोचर में सप्तम भाव में रहे या उस पर दृष्टि डाले तो तीसरा अंक। तीन अंक वाली अवधि मज़बूत, दो वाली सहायक।
एक उदाहरण
जन्म: 11/02/2000, 17:10 IST, दिल्ली, वही जन्म जो कुंडली के उदाहरण में है। लग्न कर्क है, इसलिए सप्तम भाव मकर है और उसका स्वामी शनि।
| कदम | इस कुंडली में |
|---|---|
| सप्तम भाव | मकर, स्वामी शनि |
| सप्तमेश की स्थिति | शनि मेष में, दसवें भाव (नीच) |
| सप्तम भाव में | सूर्य, केतु |
| सप्तम भाव पर दृष्टि | शनि |
| शुक्र | धनु, छठे भाव |
| विवाह के कारक ग्रह | शनि, सूर्य, शुक्र, गुरु, केतु |
| संकेत | 1 सहायक, 4 ध्यान माँगने वाले |
- सप्तमेश शनि दसवें भाव में (मेष) है। परंपरा में यह भाव विवाह और साझेदारी के लिए अच्छा माना जाता है।
- सप्तमेश शनि मेष में नीच है, इसलिए इस बात में ज़्यादा धैर्य और समझदारी चाहिए।
- सप्तम भाव में सूर्य और केतु: परंपरा इसे कुछ खटपट या धीमी शुरुआत से जोड़ती है, पर असर बाकी कुंडली पर निर्भर करता है।
- सप्तम भाव पर शनि का असर है। परंपरा इसे सोच-समझकर, अक्सर कुछ देर से होने वाले विवाह और गंभीर स्वभाव के जीवनसाथी से जोड़ती है।
- शुक्र छठे भाव में है, यानी छठे, आठवें या बारहवें भाव में। प्रेम और रिश्तों के मामलों में थोड़ा ध्यान रखने की बात है।
- आम नियम से मांगलिक है। विवाह के लिए दोनों की कुंडली साथ रखकर देखी जाती है।
आयु 18 से 45 के बीच की वे विंशोत्तरी अंतर्दशाएँ जिनमें अंतर्दशा का स्वामी विवाह का कारक है और दूसरा सहारा भी मौजूद है: 15, जिनमें से 5 मज़बूत। पहली मज़बूत अवधि शुक्र–केतु, 20/02/2021 से 23/04/2022 तक।
ऊपर वाले कैलकुलेटर के ही इंजन से, बिल्ड के समय निकाला गया।
नतीजे को कैसे पढ़ें
- सहायक और ध्यान माँगने वाली बातें सिर्फ़ गिनी जाती हैं, उन्हें तौला नहीं जाता। कुछ बातें ध्यान माँगें, तो इसका मतलब यह नहीं कि कुंडली में विवाह नहीं है; और बहुत सी सहायक बातें भी किसी वादे के बराबर नहीं हैं।
- अवधियाँ वह जगह हैं जहाँ सबसे पहले नज़र जाती है। फिर भी शादी कई ऐसी बातों से तय होती है जो कुंडली में नहीं दिखतीं: अपनी पसंद, परिवार और ज़िंदगी का रोज़ का समय।
- बीत चुकी मज़बूत अवधि कोई छूटा हुआ मौका नहीं है। वह सिर्फ़ उन अवधियों में से एक है जिन्हें ये नियम चुनते हैं।
- रिश्ता तय करते समय दोनों की कुंडली मायने रखती है। कुंडली मिलान से शुरू करें, नवांश कुंडली को जन्म कुंडली के साथ देखें, और दो नामों पर एक हल्की-फुल्की नज़र के लिए लव कैलकुलेटर आज़माएँ।
आगे क्या देखें
- मांगलिक दोष कैलकुलेटर: मंगल की स्थिति और उसके आम परिहार।
- विंशोत्तरी दशा कैलकुलेटर: आपकी पूरी महादशा और अंतर्दशा की सूची।
- जन्म तिथि से कुंडली मिलान: दो कुंडलियों का 36 गुणों वाला मिलान।
- नाम से कुंडली मिलान: जब जन्म तिथि या समय पता न हो, तो सिर्फ़ नामों से।
विवाह भविष्यवाणी: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या यह बता सकता है कि मेरी शादी कब होगी?
कोई भी कैलकुलेटर शादी की तारीख का वादा नहीं कर सकता। यह 18 से 45 वर्ष के बीच की वे दशा अवधियाँ दिखाता है जिनमें विवाह से जुड़े ग्रह सक्रिय रहते हैं, और उन पर अलग निशान लगाता है जिनमें गुरु भी सप्तम भाव को सहारा देता है। ज्योतिषी सबसे पहले इन्हीं अवधियों को देखते हैं। पर विवाह इनके बाहर भी हो सकता है, और इनमें से कोई भी अवधि विवाह को पक्का नहीं करती।
सप्तम भाव से क्या देखा जाता है?
लग्न से गिनकर सातवाँ घर, यानी सप्तम भाव, विवाह, जीवनसाथी और साझेदारी का भाव माना जाता है। कैलकुलेटर इसकी राशि और स्वामी (सप्तमेश) देखता है, कौन-से ग्रह इसमें बैठे हैं या इस पर दृष्टि डालते हैं, और विवाह के दो पारंपरिक कारक ग्रह, शुक्र और गुरु, कहाँ हैं।
विवाह की अवधियाँ किस आधार पर चुनी जाती हैं?
विंशोत्तरी दशा के आधार पर। कोई अंतर्दशा सूची में तब आती है जब उसका स्वामी सप्तमेश, द्वितीयेश, शुक्र, गुरु या सप्तम भाव में बैठा कोई ग्रह हो, और साथ में दो में से एक बात भी हो: महादशा का स्वामी भी इन्हीं में से हो, या उस दौरान गुरु गोचर में सप्तम भाव में हो या उस पर दृष्टि डाले। हर अवधि के आगे लिखा रहता है कि कौन-सा नियम लागू हुआ।
क्या मांगलिक कुंडली शादी के लिए खराब है?
अपने आप में नहीं। मांगलिक दोष कई जाँचों में से एक है, इसके कई आम परिहार (काट) हैं, और जब दोनों साथी मांगलिक हों तो आम तौर पर इसे बराबर का मिलान माना जाता है। कैलकुलेटर नतीजा बताता है और पूरी मांगलिक जाँच का लिंक भी देता है।
क्या सप्तम भाव पर शनि होने का मतलब देर से शादी है?
परंपरा में सप्तम भाव में बैठे या उस पर दृष्टि डालते शनि को सोच-समझकर, अक्सर कुछ देर से होने वाले विवाह और गंभीर स्वभाव के जीवनसाथी से जोड़ा जाता है। पर यह कुंडली की कई बातों में से सिर्फ़ एक है। कैलकुलेटर इसे टिप्पणी की तरह लिखता है, फ़ैसले की तरह नहीं।
जन्म का समय क्यों ज़रूरी है?
सप्तम भाव लग्न से गिना जाता है, और लग्न लगभग हर दो घंटे में बदल जाता है। समय के बिना पता ही नहीं चलता कि सप्तम भाव में कौन-सी राशि है, इसलिए यह कैलकुलेटर समय माँगता है। समय अंदाज़े से भरा हो तो नतीजे को भी अंदाज़ा ही मानें।
क्या मेरा जन्म विवरण कहीं सेव होता है?
नहीं। गणना आपके ब्राउज़र में ही होती है। आप जो भरते हैं, वह न इस वेबसाइट पर भेजा जाता है, न कहीं जमा होता है।
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