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ज्योतिष की बुनियाद

ज्योतिष की बुनियाद: राशि, नक्षत्र, ग्रह और भाव

साइट की हर कुंडली के पीछे यही संदर्भ पेज हैं। जब कुंडली या राशिफल में कोई शब्द नया लगे, या जानना हो कि किसी टूल का नतीजा ऐसा क्यों आया, तब इन्हें पढ़ें।

हर पेज क्या करता है

  • 12 राशियाँबारह राशियां (चंद्र राशि), उनके स्वामी, तत्व, नक्षत्र चरण, नामाक्षर और सबसे अच्छे मेल के साथ।
  • 12 सन साइनबारह पश्चिमी ज़ोडिएक साइन, उनकी तारीखें, तत्व, स्वामी और स्वभाव, और वैदिक राशि से अंतर।
  • 27 नक्षत्रसत्ताईस नक्षत्र, उनका विस्तार, चरण, देवता, प्रतीक, स्वभाव और नाम के अक्षर।
  • नवग्रहनौ ग्रह, आज हर ग्रह कहां है, उसका वार, रंग और रत्न, और उसका बीज मंत्र।
  • कुंडली के 12 भावकुंडली के 12 भाव, हर भाव किस बारे में है, ग्रह और भावेश वहां कैसे पढ़े जाते हैं, और अपनी कुंडली की जांच।
  • नाड़ी दोषनाड़ी और भकूट दोष सरल शब्दों में, नक्षत्र से जांच, और वे स्थितियां जिनमें दोष का परिहार होता है।
  • लाल किताबलाल किताब क्या है, इसकी कुंडली आम कुंडली से कैसे अलग है, पक्के घर की तालिका और उपायों के नियम।

कहाँ से शुरू करें

पहले अपनी राशि पढ़ें, क्योंकि भारतीय ज्योतिष में ज़्यादातर बातें चंद्र राशि से शुरू होती हैं। फिर अपना नक्षत्र, जो राशि को आकाश के और छोटे हिस्से तक ले आता है। कुंडली बन जाए तो भाव और नवग्रह के पेज बताते हैं कि उसमें क्या दिख रहा है। पश्चिमी ज्योतिष भी देखते हों तो ज़ोडिएक साइन का पेज पढ़ें, और कुंडली मिलान से पहले नाड़ी दोष।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

राशि और नक्षत्र में क्या अंतर है?

राशिचक्र 30-30 अंश की 12 राशियों में बंटा है, और 13 अंश 20 कला के 27 नक्षत्रों में भी। आपके जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि और नक्षत्र में था, वही आपकी राशि और नक्षत्र हैं।

क्या कैलकुलेटर इस्तेमाल करने के लिए यह सब सीखना ज़रूरी है?

नहीं। हर कैलकुलेटर अपना नतीजा खुद समझाता है। ये पेज तब के लिए हैं जब आप शब्दों को गहराई से समझना चाहें।

क्या लाल किताब और वैदिक ज्योतिष एक ही हैं?

नहीं। इसमें वही ग्रह और 12 भाव की कुंडली है, पर हर भाव की राशि तय है और इसके नियम और उपाय अपने हैं। लाल किताब का पेज दोनों का अंतर बताता है।

राशि के पेजों पर तय तारीखें क्यों नहीं हैं?

आपकी राशि इस पर टिकी है कि जन्म के समय चंद्रमा कहां था, और चंद्रमा लगभग ढाई दिन में राशि बदल लेता है। अख़बारों में दिखने वाली तय तारीखें पश्चिमी सूर्य राशियों की होती हैं।