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जन्म कुंडली · उत्तर भारतीय शैली

जन्म कुंडली ऑनलाइन बनाएँ

आपकी जन्म तिथि, समय और जन्म स्थान से आपकी जन्म कुंडली: उत्तर भारतीय चार्ट में लग्न और नौ ग्रह अपने-अपने भाव में, हर ग्रह की राशि, अंश और नक्षत्र, और एक नज़र में आपकी चल रही दशा, मांगलिक जाँच और साढ़ेसाती। गणना आपके ब्राउज़र में होती है; कुछ भी सेव नहीं होता।

मुफ़्त · लाहिड़ी अयनांश · आपके ब्राउज़र में चलता है

अपनी कुंडली बनाएँ

आपकी जन्म कुंडली कैसे बनती है

  1. जन्म का सही क्षण निकालें। जन्म तिथि, समय और जन्म स्थान के टाइम ज़ोन से जन्म का क्षण विश्व समय (UTC) में बदला जाता है।
  2. ग्रहों की स्थिति निकालें। सूर्य, चंद्रमा और बाकी ग्रह astronomy-engine लाइब्रेरी से आते हैं; राहु माध्य चंद्र पात (mean node) है और केतु ठीक उसके सामने। फिर सबको लाहिड़ी अयनांश से निरयण राशिचक्र में बदला जाता है।
  3. लग्न निकालें, यानी जन्म स्थान पर उस समय पूर्व में उदय हो रही राशि, स्थानीय नाक्षत्र समय से। इसका पूरा तरीका लग्न कैलकुलेटर पर है।
  4. भाव बनाएँ। लग्न की राशि पहला भाव है और उसके बाद की हर राशि अगला भाव, जैसे उत्तर भारतीय कुंडली में होता है।

उदाहरण से समझें

जन्म: 11/02/2000, 17:10 IST, दिल्ली (28°40′ उत्तर, 77°13′ पूर्व)।

गणनातरीकापरिणाम
सायन (पश्चिमी) लग्नदिल्ली का स्थानीय नाक्षत्र समय, फिर पूर्वी क्षितिज पर उदित अंश130.60°
लाहिड़ी अयनांशइस तारीख पर23.86°
लग्न130.60° − 23.86° = 106.73°कर्क 16° 43′
चंद्रमा9.15° निरयणमेष, अश्विनी चरण 3
4रा56789शु10सू के11बु12मं1चं गु श23
ग्रहराशिअंशभाव
सूर्यमकर28° 11′7
चंद्रमामेष9° 09′10
मंगलमीन5° 42′9
बुधकुंभ15° 39′8
गुरु (बृहस्पति)मेष5° 35′10
शुक्रधनु27° 51′6
शनिमेष17° 16′10
राहुकर्क9° 00′1
केतुमकर9° 00′7

ऊपर वाले कैलकुलेटर के ही इंजन से निकाला गया।

इस जन्म में लग्न कर्क है, इसलिए ऊपर वाले पहले भाव में 4 (कर्क) लिखा है। चंद्रमा मेष राशि में अश्विनी नक्षत्र में है, जो कर्क से गिनने पर दसवाँ भाव है; इसलिए इस व्यक्ति की राशि (चंद्र राशि) मेष है।

नतीजे में क्या मिलता है

  • लग्न और राशि: सबसे ऊपर आपका लग्न और उसका स्वामी ग्रह, और आपकी राशि (चंद्र राशि) अपने नक्षत्र और चरण के साथ।
  • कुंडली का चार्ट: उत्तर भारतीय शैली में, हर भाव में उसकी राशि का अंक और उसमें बैठे ग्रह।
  • ग्रहों की तालिका: हर ग्रह की राशि, अंश, नक्षत्र, चरण और भाव। वक्री ग्रह पर “वक्री” लिखा आता है।
  • एक नज़र में: अभी चल रही महादशा और अंतर्दशा, मांगलिक जाँच का नतीजा, और साढ़ेसाती चल रही है या नहीं। विवाह के लिए दो कुंडलियों का मिलान कुंडली मिलान पर करें।

उत्तर भारतीय कुंडली कैसे पढ़ें

ऊपर बीच का खाना पहला भाव (लग्न) है, और भाव वहाँ से घड़ी की उलटी दिशा में चलते हैं। हर भाव में लिखा अंक उसकी राशि है: 1 मेष, 2 वृषभ, 3 मिथुन, 4 कर्क, 5 सिंह, 6 कन्या, 7 तुला, 8 वृश्चिक, 9 धनु, 10 मकर, 11 कुंभ, 12 मीन। अक्षर ग्रह हैं: सू सूर्य, चं चंद्र, मं मंगल, बु बुध, गु गुरु, शु शुक्र, श शनि, रा राहु और के केतु।

12 भाव जीवन के अलग-अलग क्षेत्र बताते हैं: पहला भाव आप स्वयं, दूसरा परिवार और धन, चौथा घर, पाँचवाँ संतान और पढ़ाई, सातवाँ विवाह, दसवाँ करियर, ग्यारहवाँ लाभ और बारहवाँ खर्च। किसी ग्रह का असर उसकी राशि, उसके भाव और उन भावों पर निर्भर करता है जिनका वह स्वामी है, और दशा बताती है कि किस ग्रह के फल कब सामने आते हैं। हर भाव का अपना पेज कुंडली के 12 भाव में है, जहाँ एक फ़ॉर्म आपकी कुंडली में वह भाव दिखाता है। ग्रहों के मेल को योग कहते हैं: देखें कि आपकी कुंडली में कौन-से योग हैं, और पितृ दोष के योग कौन-से हैं।

जन्म कुंडली: आम सवाल

कुंडली में क्या दिखता है?

आपके जन्म के क्षण सूर्य, चंद्रमा, बाकी ग्रह, राहु और केतु कहाँ थे, और कुंडली के 12 भावों में से हर ग्रह किस भाव में पड़ता है। पहला भाव लग्न है, यानी वह राशि जो आपके जन्म के समय पूर्व दिशा में उदय हो रही थी।

उत्तर भारतीय कुंडली कैसे पढ़ें?

ऊपर बीच का खाना पहला भाव है; बाकी भाव वहाँ से घड़ी की उलटी दिशा में चलते हैं। हर खाने में लिखा अंक उसकी राशि है (1 मेष, 2 वृषभ, और इसी तरह आगे), और अक्षर ग्रह हैं: सू सूर्य, चं चंद्र, मं मंगल, बु बुध, गु गुरु, शु शुक्र, श शनि, रा राहु, के केतु। (व) का मतलब है कि ग्रह वक्री है।

जन्म का समय और स्थान क्यों ज़रूरी है?

लग्न, और उसी से हर भाव, इन्हीं दोनों पर टिका है। लग्न लगभग हर 2 घंटे में बदल जाता है और चंद्रमा एक दिन में लगभग 13° आगे बढ़ता है, इसलिए समय में छोटी-सी गलती से भी कोई ग्रह दूसरे भाव में जा सकता है या नक्षत्र बदल सकता है।

यह कुंडली किस पद्धति से बनती है?

भारतीय निरयण राशिचक्र और लाहिड़ी अयनांश से, उत्तर भारतीय कुंडली की तरह हर राशि को एक पूरा भाव मानकर, और राहु-केतु के लिए माध्य राहु (mean node) लेकर। ज़्यादातर भारतीय पंचांग यही तरीके अपनाते हैं।

क्या मेरी कुंडली पढ़ी जा सकती है?

हाँ। चार्ट बताता है कि कौन-सा ग्रह कहाँ है; आपके सवाल के लिए इसका क्या अर्थ है, यह पूरी कुंडली, दशा और गोचर को साथ पढ़कर ही पता चलता है। अपना जन्म विवरण और सवाल WhatsApp पर नमिता जी को भेजें।

क्या मेरा जन्म विवरण कहीं सेव होता है?

नहीं। गणना आपके ब्राउज़र में ही होती है, और आप जो भी भरते हैं वह न इस वेबसाइट पर भेजा जाता है, न सेव होता है।

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