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विंशोत्तरी दशा · 120 साल का चक्र

महादशा और अंतर्दशा कैलकुलेटर (विंशोत्तरी दशा)

विंशोत्तरी दशा जीवन को ग्रहों के दौर में बाँटती है, जो जन्म के समय चंद्रमा के नक्षत्र से शुरू होते हैं। अपनी जन्म तिथि और समय भरें, और देखें कि अभी कौन-सी महादशा और अंतर्दशा चल रही है, जन्म के समय कितनी दशा बची थी, और हर दौर की तारीखें। गणना आपके ब्राउज़र में होती है; कुछ भी सेव नहीं होता।

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अपनी महादशा और अंतर्दशा जानें

दशा कैसे निकाली जाती है

विंशोत्तरी का अर्थ है “120 का”: यह चक्र नौ ग्रहों के दौर से बना है, जिनका जोड़ 120 साल है।

  1. जन्म के समय चंद्रमा का नक्षत्र निकालें। कैलकुलेटर आपकी जन्म तिथि और समय के लिए चंद्रमा की निरयण स्थिति (लाहिड़ी अयनांश) निकालता है।
  2. नक्षत्र का स्वामी लें। 27 नक्षत्रों के स्वामी बारी-बारी से केतु, शुक्र, सूर्य, चंद्र, मंगल, राहु, गुरु, शनि और बुध हैं, तीन बार। आपके जन्म नक्षत्र का स्वामी ही आपकी पहली महादशा का स्वामी होता है।
  3. बची हुई दशा निकालें। चंद्रमा ने नक्षत्र का जितना हिस्सा पार कर लिया था, पहली महादशा का उतना ही हिस्सा बीता हुआ माना जाता है। बाकी हिस्सा वह दशा है जिसके साथ आपका जन्म हुआ।
  4. क्रम से आगे बढ़ें। उसके बाद महादशाएँ एक तय क्रम में आती हैं: केतु 7 साल, शुक्र 20, सूर्य 6, चंद्र 10, मंगल 7, राहु 18, गुरु 16, शनि 19, बुध 17।
  5. हर महादशा को बाँटें, नौ अंतर्दशाओं में, जो उसी ग्रह से शुरू होती हैं। हर अंतर्दशा की अवधि = महादशा के साल × अंतर्दशा वाले ग्रह के साल ÷ 120। प्रत्यंतर दशाएँ हर अंतर्दशा को इसी तरह बाँटती हैं।

उदाहरण से समझें

जन्म: 15/08/1990, 10:30 IST। दशा 09/10/2026 की।

गणनातरीकापरिणाम
चंद्रमानिरयण भोगांश (लाहिड़ी)48.93°
नक्षत्र48.93° ÷ 13°20′ → नक्षत्र 4रोहिणी
पहली दशा का स्वामीरोहिणी का स्वामीचंद्र (10 साल)
पार किया हिस्साचंद्रमा ने रोहिणी का कितना हिस्सा पार किया67.0%
बची हुई दशा10 साल का 33.0%3 साल 3 महीने 19 दिन
09/10/2026 को चल रही दशामहादशा, अंतर्दशा, प्रत्यंतर दशागुरु, केतु, बुध
महादशासेतक
चंद्र (बची हुई 3 साल 3 महीने 19 दिन)15/08/199003/12/1993
मंगल (7 साल)03/12/199303/12/2000
राहु (18 साल)03/12/200004/12/2018
गुरु (16 साल)04/12/201804/12/2034
शनि (19 साल)04/12/203403/12/2053
बुध (17 साल)03/12/205304/12/2070
केतु (7 साल)04/12/207003/12/2077
शुक्र (20 साल)03/12/207703/12/2097
सूर्य (6 साल)03/12/209705/12/2103
गुरु महादशा में अंतर्दशासेतक
गुरु में गुरु (2 साल 1 महीना 18 दिन)04/12/201821/01/2021
गुरु में शनि (2 साल 6 महीने 11 दिन)21/01/202104/08/2023
गुरु में बुध (2 साल 3 महीने 6 दिन)04/08/202309/11/2025
गुरु में केतु (11 महीने 6 दिन)09/11/202516/10/2026
गुरु में शुक्र (2 साल 7 महीने 30 दिन)16/10/202616/06/2029
गुरु में सूर्य (9 महीने 18 दिन)16/06/202904/04/2030
गुरु में चंद्र (1 साल 4 महीने 0 दिन)04/04/203004/08/2031
गुरु में मंगल (11 महीने 6 दिन)04/08/203110/07/2032
गुरु में राहु (2 साल 4 महीने 24 दिन)10/07/203204/12/2034

ऊपर वाले कैलकुलेटर के ही इंजन से निकाला गया।

इस जन्म में चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में था, जिसका स्वामी चंद्र है, इसलिए पहली महादशा चंद्र की थी। चंद्रमा रोहिणी का 67.0% हिस्सा पार कर चुका था, इसलिए चंद्र के 10 साल में से 3 साल 3 महीने 19 दिन बचे थे। उसके बाद मंगल, राहु और गुरु की महादशा आई, और 09/10/2026 को गुरु की महादशा में केतु की अंतर्दशा और बुध की प्रत्यंतर दशा चल रही है।

नौ महादशाएँ

महादशा साल किन नक्षत्रों से शुरू होती है
केतु 7 अश्विनी, मघा, मूल
शुक्र 20 भरणी, पूर्वा फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा
सूर्य 6 कृत्तिका, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा
चंद्र 10 रोहिणी, हस्त, श्रवण
मंगल 7 मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा
राहु 18 आर्द्रा, स्वाती, शतभिषा
गुरु 16 पुनर्वसु, विशाखा, पूर्वा भाद्रपद
शनि 19 पुष्य, अनुराधा, उत्तरा भाद्रपद
बुध 17 आश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती

हर दशा स्वामी का अपना पेज नवग्रह खंड में है, जिसमें उसका बीज मंत्र, रत्न और आम तौर पर सुझाए जाने वाले उपाय हैं।

अपनी दशा को कैसे समझें

दशा बताती है कि आप किस ग्रह के दौर में हैं; जन्म कुंडली बताती है कि वह ग्रह क्या देने का वादा करता है। उदाहरण के लिए, गुरु की महादशा में गुरु के विषय, यानी ज्ञान, मार्गदर्शन और बढ़त, सामने आते हैं, पर वे कैसे फलते हैं, यह इस पर निर्भर है कि आपकी कुंडली में गुरु किस भाव का स्वामी है और किस भाव में बैठा है, और उस समय गोचर कैसा है। एक महादशा से दूसरी में जाना अक्सर जीवन के नए अध्याय जैसा लगता है।

अपना जन्म नक्षत्र अलग से जानने के लिए नक्षत्र कैलकुलेटर देखें। अभी ग्रह कहाँ हैं, यह आज की ग्रह स्थिति पर देखें, और शनि के गोचर के लिए साढ़ेसाती कैलकुलेटर।

महादशा और अंतर्दशा: आम सवाल

विंशोत्तरी दशा क्या है?

भारतीय ज्योतिष में इस्तेमाल होने वाला ग्रहों के दौर का 120 साल का चक्र। केतु 7 साल, शुक्र 20, सूर्य 6, चंद्र 10, मंगल 7, राहु 18, गुरु 16, शनि 19 और बुध 17 साल, हमेशा इसी क्रम में। चक्र में आपकी शुरुआत कहाँ से होगी, यह जन्म के समय चंद्रमा के नक्षत्र से तय होता है।

महादशा, अंतर्दशा और प्रत्यंतर दशा क्या हैं?

महादशा मुख्य दौर है। हर महादशा नौ अंतर्दशाओं में बँटती है, जो उसी ग्रह से शुरू होती हैं, और हर अंतर्दशा नौ प्रत्यंतर दशाओं में। इन्हें ऐसे कहा जाता है: गुरु में केतु, यानी गुरु की महादशा में केतु की अंतर्दशा।

क्या जन्म का समय ज़रूरी है?

सटीक तारीखों के लिए हाँ। चंद्रमा लगभग एक दिन में पूरा नक्षत्र पार कर लेता है, इसलिए जन्म के समय बची दशा, और उसके बाद की हर तारीख, समय के साथ बदलती है। समय न हो, तो कैलकुलेटर दोपहर 12:00 लेता है और बताता है कि उस दिन नतीजा कितना बदल सकता है।

दूसरी वेबसाइटों की तारीखें थोड़ी अलग क्यों होती हैं?

तीन चीज़ें तारीखें बदलती हैं: जन्म का समय, अयनांश (यह कैलकुलेटर लाहिड़ी लेता है) और दशा के एक साल की लंबाई। यह कैलकुलेटर 365.25 दिन का साल लेता है; कुछ ज्योतिषी 360 दिन का साल लेते हैं, जिससे बाद के दौर कुछ पहले आ जाते हैं।

मेरी महादशा अच्छी है या बुरी?

दशा केवल यह बताती है कि आप किस ग्रह के दौर में हैं। यह दौर क्या लाएगा, यह इस पर निर्भर है कि वह ग्रह आपकी जन्म कुंडली में कहाँ है, कितना बलवान है और गोचर कैसा है; इसलिए एक ही महादशा दो लोगों के लिए बहुत अलग हो सकती है। कुंडली पढ़ने में यही देखा जाता है।

क्या मेरी जन्म तिथि कहीं सेव होती है?

नहीं। गणना आपके ब्राउज़र में ही होती है, और आप जो भी भरते हैं वह न इस वेबसाइट पर भेजा जाता है, न सेव होता है।

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