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नीलम (ब्लू सफ़ायर): किसे पहनना चाहिए और कैसे
नीलम, यानी ब्लू सफ़ायर, नवरत्न में शनि का रत्न है और तेज़ असर वाले रत्नों में सबसे जाना-माना है। इस पेज पर जानें कि यह क्या है, परंपरा में इसे किन लग्नों के लिए देखा जाता है, इसे सावधानी से क्यों परखा जाता है, इसे आम तौर पर कैसे पहना जाता है, इसके उपरत्न कौन से हैं, असली नीलम को ट्रीटेड या मिलते-जुलते पत्थर से कैसे अलग करें, और इसकी देखभाल कैसे करें।
नीलम: मुख्य बातें
| अंग्रेज़ी नाम | ब्लू सफ़ायर |
|---|---|
| ग्रह | शनि |
| अंक (मूलांक) | 8 |
| रंग | हल्का से गहरा नीला |
| यह क्या है | कोरंडम (एल्युमिनियम ऑक्साइड), वही खनिज जिससे माणिक और पुखराज बनते हैं |
| कठोरता (मोह्स) | 9 |
| उपरत्न | एमेथिस्ट, आयोलाइट (नीली) |
| क्रिस्टल | एमेथिस्ट, ब्लैक टूमलाइन, लैपिस लाज़ुली |
| तेज़ असर वाला रत्न | हाँ: कुंडली की ध्यान से जाँच के बाद ही पहना जाता है |
पहले अपनी कुंडली दिखाएँ
कोई भी रत्न तभी पहनें जब नमिता जी आपकी कुंडली देख लें। रत्न अपने ग्रह को बल देता है, और अगर वही ग्रह आपकी कुंडली में कमज़ोर हो या परेशानी देता हो, तो मूलांक से मेल खाने पर भी वह रत्न आपके लिए ठीक नहीं रहता। घर या काम की जगह पर रखने के लिए क्रिस्टल ज़्यादा सौम्य विकल्प हैं।
परंपरा में नीलम को तेज़ असर वाला रत्न माना जाता है। इसे खास सावधानी से परखा जाता है और कुंडली ध्यान से देखने के बाद ही पहना जाता है।
नीलम क्या है
नीलम वह कोरंडम है जिसे लोहे और टाइटेनियम की थोड़ी मात्रा नीला रंग देती है। इसका रंग हल्के आसमानी नीले से गहरे स्याही जैसे नीले तक होता है। परंपरा में नीलम का असर जल्दी और तेज़ माना जाता है, इसीलिए पहनने से पहले सबसे ज़्यादा इसी को परखा जाता है।
परंपरा में नीलम किन बातों से जुड़ा है
परंपरा में इसे अनुशासन, धैर्य और लंबे समय में मिलने वाले नतीजों से जोड़ा जाता है।
- अनुशासन, धैर्य और मेहनत
- धीरे-धीरे पक्का बनने वाला करियर
- लंबे समय के नतीजे और ज़िम्मेदारी
- सेवा, और अपने अधीन काम करने वालों से व्यवहार
ये परंपरा की मान्यताएँ हैं, वादे नहीं। रत्न दवा या आर्थिक सलाह नहीं है, और किसी नतीजे की गारंटी नहीं दी जाती।
परंपरा में नीलम किसके लिए सुझाया जाता है
नीलम सबसे ज़्यादा तब देखा जाता है जब शनि लग्नेश हो (मकर या कुंभ लग्न) या किसी त्रिकोण भाव का स्वामी हो, जैसे वृषभ, मिथुन, कन्या और तुला लग्न के लिए।
ज्योतिष में रत्न कुंडली देखकर चुना जाता है, सिर्फ़ सूर्य राशि या चंद्र राशि से नहीं। आम तौर पर शुरुआत लग्न से होती है: सबसे पहले लग्नेश का रत्न देखा जाता है, फिर 5वें और 9वें भाव (त्रिकोण) के स्वामियों के रत्न। जो ग्रह सिर्फ़ 6वें, 8वें या 12वें भाव के स्वामी हों, उन्हें आम तौर पर बल नहीं दिया जाता। नीचे की तालिका यही नियम 12 लग्नों के लिए शनि पर लगाती है। यह सिर्फ़ शुरुआत है: रत्न सुझाने से पहले शनि की राशि, भाव, बल और चल रही दशा देखी जाती है।
| आपका लग्न | शनि किन भावों का स्वामी | परंपरा की राय |
|---|---|---|
| मेष | 10वाँ, 11वाँ | कुंडली पर निर्भर |
| वृषभ | 9वाँ, 10वाँ | आम तौर पर देखा जाता है |
| मिथुन | 8वाँ, 9वाँ | आम तौर पर देखा जाता है |
| कर्क | 7वाँ, 8वाँ | आम तौर पर नहीं पहना जाता |
| सिंह | 6वाँ, 7वाँ | आम तौर पर नहीं पहना जाता |
| कन्या | 5वाँ, 6वाँ | आम तौर पर देखा जाता है |
| तुला | 4वाँ, 5वाँ | आम तौर पर देखा जाता है |
| वृश्चिक | 3वाँ, 4वाँ | कुंडली पर निर्भर |
| धनु | 2वाँ, 3वाँ | कुंडली पर निर्भर |
| मकर | 1वाँ, 2वाँ | आम तौर पर देखा जाता है |
| कुंभ | 1वाँ, 12वाँ | आम तौर पर देखा जाता है |
| मीन | 11वाँ, 12वाँ | आम तौर पर नहीं पहना जाता |
लग्न कैलकुलेटर से अपना लग्न जानें
किन्हें सावधान रहना चाहिए
जब शनि आपके लग्न के लिए सिर्फ़ कठिन भावों का स्वामी हो, जैसा अक्सर कर्क, सिंह और मीन लग्न के लिए कहा जाता है, तो नीलम आम तौर पर नहीं पहना जाता, और साढ़ेसाती या शनि की दशा में इसे और सावधानी से देखा जाता है।
नीलम के साथ आम तौर पर ये रत्न नहीं पहने जाते: माणिक्य, मोती और मूंगा। इस साइट की ग्रह मैत्री तालिका में इनके ग्रहों को आपस में मित्र नहीं माना जाता।
नीलम आम तौर पर कैसे पहना जाता है
| धातु | चाँदी, प्लैटिनम या पंचधातु (कुछ परंपराओं में सोना) |
|---|---|
| उँगली | मध्यमा (बीच की उँगली) |
| दिन | शनिवार |
| समय | सुबह, सूर्योदय के बाद (कुछ परंपराओं में शाम को) |
| वज़न | 3 से 5 रत्ती |
ये आम तौर पर बताए जाने वाले तरीके हैं, और परंपरा व ज्योतिषी के हिसाब से अलग हो सकते हैं। अपनी कुंडली के साथ मिली सलाह मानें। रत्नों के बाज़ार की रत्ती (पक्की रत्ती) लगभग 0.91 कैरेट होती है; सुनारों की पुरानी रत्ती छोटी, लगभग 0.61 कैरेट होती है, इसलिए पूछ लें कि कौन सी रत्ती की बात है।
उपरत्न और क्रिस्टल
शनि के लिए आम तौर पर ये उपरत्न इस्तेमाल होते हैं: एमेथिस्ट और आयोलाइट (नीली)। इन्हें नीलम से सौम्य माना जाता है, और जब मुख्य रत्न की सलाह न हो तब अक्सर इन्हें सुझाया जाता है। शनि के लिए अक्सर चुने जाने वाले क्रिस्टल: एमेथिस्ट, ब्लैक टूमलाइन और लैपिस लाज़ुली।
शनि के लिए एमेथिस्ट एक आम क्रिस्टल है, जिसे अक्सर काम की मेज़ पर रखा जाता है।
प्राकृतिक, ट्रीटेड या नकली?
- कई नीलम गर्म करके निखारे जाते हैं। कुछ पर डिफ़्यूज़न ट्रीटमेंट होता है या काँच भरा जाता है, जो बहुत कम टिकाऊ है। रिपोर्ट में हर ट्रीटमेंट का नाम होना चाहिए।
- आयोलाइट (नीली), तंज़ानाइट, कायनाइट, नीला स्पिनेल और नीला काँच नीलम बताकर बेचे जाते हैं। आयोलाइट आम उपरत्न है और अपने नाम से बिके तो ठीक है।
- लैब में बना नीलम आम है और एकदम साफ़ दिख सकता है।
घर पर की जाने वाली जाँचें (पानी, आग, खरोंच, रगड़ना) भरोसे लायक नहीं हैं, और कुछ से पत्थर खराब भी हो जाता है। किसी स्वतंत्र रत्न जाँच लैब की रिपोर्ट के साथ ही खरीदें, जिसमें पत्थर का नाम हो, लिखा हो कि वह प्राकृतिक है या लैब में बना, और हर ट्रीटमेंट का ज़िक्र हो। रिपोर्ट रत्न के साथ सँभालकर रखें।
नीलम की देखभाल
- गुनगुने पानी में हल्के साबुन की एक बूँद और नरम ब्रश से साफ़ करें। अगर रिपोर्ट में काँच भरे होने की बात हो, तो गर्मी और अल्ट्रासोनिक क्लीनर से बचाएँ।
- इसे अलग रखें: नीलम नरम पत्थरों पर खरोंच डाल देता है।
- हर कुछ महीने में सेटिंग देख लें।
- भारी काम, बागवानी, केमिकल से सफ़ाई और तैराकी के समय अँगूठी उतार दें।
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नीलम से जुड़े सवाल
नीलम किसे पहनना चाहिए?
नीलम शनि का रत्न है। लग्न के आम नियम से इसे वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर और कुंभ लग्न के लिए देखा जाता है, जहाँ शनि 1ले, 5वें या 9वें भाव का स्वामी है, और कर्क, सिंह और मीन लग्न के लिए आम तौर पर नहीं पहना जाता, जहाँ वह सिर्फ़ 6वें, 8वें या 12वें भाव का स्वामी है। आख़िरी फ़ैसला आपकी कुंडली में शनि के बल और स्थिति से होता है।
नीलम किस उँगली में और किस धातु में पहनते हैं?
नीलम आम तौर पर चाँदी, प्लैटिनम या पंचधातु (कुछ परंपराओं में सोना) में जड़वाकर मध्यमा (बीच की उँगली) में, शनिवार को सुबह, सूर्योदय के बाद (कुछ परंपराओं में शाम को) पहना जाता है। ये आम तौर पर बताए जाने वाले तरीके हैं और परंपरा के हिसाब से अलग हो सकते हैं; अपनी कुंडली के साथ मिली सलाह मानें।
नीलम की जगह क्या पहन सकते हैं?
नीलम का आम उपरत्न एमेथिस्ट और आयोलाइट (नीली) है। शनि के लिए अक्सर चुने जाने वाले क्रिस्टल एमेथिस्ट, ब्लैक टूमलाइन और लैपिस लाज़ुली हैं। क्रिस्टल किसी इरादे की याद के रूप में घर या काम की जगह पर रखे जाते हैं, और जब रत्न की सलाह न हो तब ये सौम्य विकल्प हैं।
कैसे पता करें कि नीलम असली है?
पक्के तौर पर सिर्फ़ रत्न जाँच लैब बता सकती है। नीलम किसी स्वतंत्र लैब की रिपोर्ट के साथ खरीदें, जिसमें पत्थर का नाम हो, लिखा हो कि वह प्राकृतिक है या लैब में बना, और हर ट्रीटमेंट का ज़िक्र हो। घर की जाँचें भरोसे लायक नहीं हैं और कुछ से पत्थर खराब हो सकता है।
नीलम को पहले कुछ दिन क्यों परखा जाता है?
परंपरा में नीलम को तेज़ असर वाला रत्न माना जाता है। आम चलन है कि पहनने से पहले कुछ दिन इसे पास रखें, तकिये के नीचे या हाथ में बाँधकर, और कुछ ठीक न लगे तो रोक दें। यह एक परंपरा है, कोई जाँच नहीं, और यह भी कुंडली देखने के बाद ही किया जाता है।
क्या साढ़ेसाती में नीलम पहन सकते हैं?
जब शनि कुंडली के लिए अच्छा ग्रह हो, तो कुछ ज्योतिषी इसे सुझाते हैं, और कुछ साढ़ेसाती में इससे बचते हैं। यह आपके लग्न के लिए शनि की भूमिका और चल रही दशा पर निर्भर है, इसलिए पहनने से पहले पूछ लें। साढ़ेसाती कैलकुलेटर आपके चरण दिखाता है।