नवरत्न · केतु · कैट्स आई
लहसुनिया (कैट्स आई): किसे पहनना चाहिए और कैसे
लहसुनिया, यानी कैट्स आई, नवरत्न में केतु का रत्न है और तेज़ असर वाले रत्नों में गिना जाता है। इस पेज पर जानें कि यह क्या है, परंपरा में इसे कब देखा जाता है, इसे आम तौर पर कैसे पहना जाता है, इसका उपरत्न क्या है, असली क्राइसोबेरिल लहसुनिया को सस्ते मिलते-जुलते पत्थरों से कैसे अलग करें, और इसकी देखभाल कैसे करें।
लहसुनिया: मुख्य बातें
| अंग्रेज़ी नाम | कैट्स आई |
|---|---|
| ग्रह | केतु |
| अंक (मूलांक) | 7 |
| रंग | शहद जैसा पीला, हरा या धूसर, गोल सतह पर रोशनी की एक चमकीली लकीर के साथ |
| यह क्या है | क्राइसोबेरिल, जिसमें कैट्स आई जैसी चमक (चैटोयेंसी) होती है |
| कठोरता (मोह्स) | 8.5 |
| उपरत्न | टाइगर आई |
| क्रिस्टल | टाइगर आई, लैब्राडोराइट, एमेथिस्ट |
| तेज़ असर वाला रत्न | हाँ: कुंडली की ध्यान से जाँच के बाद ही पहना जाता है |
पहले अपनी कुंडली दिखाएँ
कोई भी रत्न तभी पहनें जब नमिता जी आपकी कुंडली देख लें। रत्न अपने ग्रह को बल देता है, और अगर वही ग्रह आपकी कुंडली में कमज़ोर हो या परेशानी देता हो, तो मूलांक से मेल खाने पर भी वह रत्न आपके लिए ठीक नहीं रहता। घर या काम की जगह पर रखने के लिए क्रिस्टल ज़्यादा सौम्य विकल्प हैं।
परंपरा में लहसुनिया को तेज़ असर वाला रत्न माना जाता है। इसे खास सावधानी से परखा जाता है और कुंडली ध्यान से देखने के बाद ही पहना जाता है।
लहसुनिया क्या है
असली लहसुनिया क्राइसोबेरिल है, जिसे चिकने गुंबद जैसे आकार में काटा जाता है ताकि भीतर की बारीक सुई जैसी रेखाएँ रोशनी को एक चमकीली लकीर में बदल दें। एक रोशनी के नीचे पत्थर घुमाने पर यह लकीर बिल्ली की आँख की तरह सरकती है। दूसरे पत्थरों में भी ऐसी चमक हो सकती है, इसीलिए रिपोर्ट में लिखा नाम मायने रखता है।
परंपरा में लहसुनिया किन बातों से जुड़ा है
परंपरा में इसे अंतर्ज्ञान, एकाग्रता और भीतर की खोज से जोड़ा जाता है।
- अंतर्ज्ञान, एकाग्रता और भीतर की खोज
- शोध और गहराई वाला काम
- मोह कम करना और छोड़ना सीखना
- आध्यात्मिक साधना
ये परंपरा की मान्यताएँ हैं, वादे नहीं। रत्न दवा या आर्थिक सलाह नहीं है, और किसी नतीजे की गारंटी नहीं दी जाती।
परंपरा में लहसुनिया किसके लिए सुझाया जाता है
शास्त्रीय पद्धति में केतु किसी राशि का स्वामी नहीं है, इसलिए लहसुनिया लग्नेश देखकर नहीं चुना जाता। इसे आम तौर पर तब देखा जाता है जब केतु 3रे, 6ठे, 9वें या 12वें जैसे सहायक भाव में हो, जब केतु जिस राशि में बैठा है उसका स्वामी कुंडली के लिए अच्छा हो, या जब केतु की दशा चल रही हो और कुंडली उसका साथ देती हो।
केतु छाया ग्रह है और शास्त्रीय पद्धति में किसी राशि का स्वामी नहीं है, इसलिए इसके रत्न के लिए लग्न तालिका नहीं है।
लग्न कैलकुलेटर से अपना लग्न जानें
किन्हें सावधान रहना चाहिए
जब केतु कठिन भाव में हो या सूर्य या चंद्रमा के साथ हो, तो लहसुनिया आम तौर पर नहीं पहना जाता, और इसे सुझाने से पहले हमेशा पूरी कुंडली देखी जाती है।
लहसुनिया के साथ आम तौर पर ये रत्न नहीं पहने जाते: माणिक्य, मोती और मूंगा। इस साइट की ग्रह मैत्री तालिका में इनके ग्रहों को आपस में मित्र नहीं माना जाता।
लहसुनिया आम तौर पर कैसे पहना जाता है
| धातु | चाँदी या पंचधातु (कुछ परंपराओं में सोना) |
|---|---|
| उँगली | मध्यमा (बीच की उँगली; कुछ परंपराओं में कनिष्ठा या अनामिका) |
| दिन | मंगलवार (कुछ परंपराओं में गुरुवार या शनिवार) |
| समय | सुबह या शाम, जैसी सलाह हो |
| वज़न | 3 से 6 रत्ती |
ये आम तौर पर बताए जाने वाले तरीके हैं, और परंपरा व ज्योतिषी के हिसाब से अलग हो सकते हैं। अपनी कुंडली के साथ मिली सलाह मानें। रत्नों के बाज़ार की रत्ती (पक्की रत्ती) लगभग 0.91 कैरेट होती है; सुनारों की पुरानी रत्ती छोटी, लगभग 0.61 कैरेट होती है, इसलिए पूछ लें कि कौन सी रत्ती की बात है।
उपरत्न और क्रिस्टल
केतु के लिए आम तौर पर ये उपरत्न इस्तेमाल होते हैं: टाइगर आई। इन्हें लहसुनिया से सौम्य माना जाता है, और जब मुख्य रत्न की सलाह न हो तब अक्सर इन्हें सुझाया जाता है। केतु के लिए अक्सर चुने जाने वाले क्रिस्टल: टाइगर आई, लैब्राडोराइट और एमेथिस्ट।
टाइगर आई और एमेथिस्ट अक्सर ध्यान या पूजा के कोने में रखे जाते हैं।
प्राकृतिक, ट्रीटेड या नकली?
- क्वार्ट्ज़ कैट्स आई और टाइगर आई सस्ते पत्थर हैं जिनमें ऐसी ही लकीर दिखती है। टाइगर आई इसका उपरत्न है और अपने नाम से बिके तो ठीक है।
- फ़ाइबर-ऑप्टिक धागों से बने काँच में बहुत तीखी लकीर और किनारे पर मधुमक्खी के छत्ते जैसा पैटर्न दिखता है।
- कुछ लहसुनिया का रंग गहरा करने के लिए उन्हें रेडिएशन से ट्रीट किया जाता है। रिपोर्ट में क्राइसोबेरिल और हर ट्रीटमेंट लिखा होना चाहिए।
घर पर की जाने वाली जाँचें (पानी, आग, खरोंच, रगड़ना) भरोसे लायक नहीं हैं, और कुछ से पत्थर खराब भी हो जाता है। किसी स्वतंत्र रत्न जाँच लैब की रिपोर्ट के साथ ही खरीदें, जिसमें पत्थर का नाम हो, लिखा हो कि वह प्राकृतिक है या लैब में बना, और हर ट्रीटमेंट का ज़िक्र हो। रिपोर्ट रत्न के साथ सँभालकर रखें।
लहसुनिया की देखभाल
- गुनगुने पानी में हल्के साबुन की एक बूँद और नरम ब्रश से साफ़ करें।
- इसे अलग रखें ताकि चिकनी गोल सतह पर खरोंच न आए।
- हर कुछ महीने में सेटिंग देख लें।
- भारी काम, बागवानी, केमिकल से सफ़ाई और तैराकी के समय अँगूठी उतार दें।
और जानें
- रत्न कैलकुलेटर: आपके मूलांक और भाग्यांक के रत्न
- जन्म कुंडली कैलकुलेटर: आपका लग्न और ग्रह
- मुझे कौन सा रत्न पहनना चाहिए? दोनों तरीके
- मूलांक 7: अर्थ और स्वभाव
- केतु के लिए लाल किताब के उपाय
- क्रिस्टल गाइड: पाइराइट, एमेथिस्ट, रोज़ क्वार्ट्ज़ और दूसरे
- नमिता जी के साथ क्रिस्टल और रत्न
- सभी नवरत्न
दूसरे नवरत्न
लहसुनिया से जुड़े सवाल
लहसुनिया किसे पहनना चाहिए?
शास्त्रीय पद्धति में केतु किसी राशि का स्वामी नहीं है, इसलिए लहसुनिया लग्नेश देखकर नहीं चुना जाता। इसे आम तौर पर तब देखा जाता है जब केतु 3रे, 6ठे, 9वें या 12वें जैसे सहायक भाव में हो, जब केतु जिस राशि में बैठा है उसका स्वामी कुंडली के लिए अच्छा हो, या जब केतु की दशा चल रही हो और कुंडली उसका साथ देती हो। जब केतु कठिन भाव में हो या सूर्य या चंद्रमा के साथ हो, तो लहसुनिया आम तौर पर नहीं पहना जाता, और इसे सुझाने से पहले हमेशा पूरी कुंडली देखी जाती है।
लहसुनिया किस उँगली में और किस धातु में पहनते हैं?
लहसुनिया आम तौर पर चाँदी या पंचधातु (कुछ परंपराओं में सोना) में जड़वाकर मध्यमा (बीच की उँगली; कुछ परंपराओं में कनिष्ठा या अनामिका) में, मंगलवार (कुछ परंपराओं में गुरुवार या शनिवार) को सुबह या शाम, जैसी सलाह हो पहना जाता है। ये आम तौर पर बताए जाने वाले तरीके हैं और परंपरा के हिसाब से अलग हो सकते हैं; अपनी कुंडली के साथ मिली सलाह मानें।
लहसुनिया की जगह क्या पहन सकते हैं?
लहसुनिया का आम उपरत्न टाइगर आई है। केतु के लिए अक्सर चुने जाने वाले क्रिस्टल टाइगर आई, लैब्राडोराइट और एमेथिस्ट हैं। क्रिस्टल किसी इरादे की याद के रूप में घर या काम की जगह पर रखे जाते हैं, और जब रत्न की सलाह न हो तब ये सौम्य विकल्प हैं।
कैसे पता करें कि लहसुनिया असली है?
पक्के तौर पर सिर्फ़ रत्न जाँच लैब बता सकती है। लहसुनिया किसी स्वतंत्र लैब की रिपोर्ट के साथ खरीदें, जिसमें पत्थर का नाम हो, लिखा हो कि वह प्राकृतिक है या लैब में बना, और हर ट्रीटमेंट का ज़िक्र हो। घर की जाँचें भरोसे लायक नहीं हैं और कुछ से पत्थर खराब हो सकता है।
क्या टाइगर आई और लहसुनिया एक ही हैं?
नहीं। टाइगर आई धारियों वाली चमक वाला क्वार्ट्ज़ पत्थर है। यह केतु का आम उपरत्न और क्रिस्टल है, पर नवरत्न का लहसुनिया क्राइसोबेरिल कैट्स आई है।