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नवरत्न · गुरु · यलो सफ़ायर

पुखराज (यलो सफ़ायर): किसे पहनना चाहिए और कैसे

पुखराज, यानी यलो सफ़ायर, नवरत्न में गुरु (बृहस्पति) का रत्न है और सबसे ज़्यादा पूछे जाने वाले रत्नों में से एक है। इस पेज पर जानें कि यह क्या है, परंपरा में इसे किन लग्नों के लिए देखा जाता है, इसे आम तौर पर कैसे पहना जाता है, इसके उपरत्न कौन से हैं, असली पुखराज को ट्रीटेड या मिलते-जुलते पत्थर से कैसे अलग करें, और इसकी देखभाल कैसे करें।

पुखराज: मुख्य बातें

अंग्रेज़ी नामयलो सफ़ायर
ग्रहगुरु
अंक (मूलांक)3
रंगहल्का नींबू जैसा पीला से गहरा सुनहरा पीला
यह क्या हैकोरंडम (एल्युमिनियम ऑक्साइड), वही खनिज जिससे माणिक और नीलम बनते हैं
कठोरता (मोह्स)9
उपरत्नपीला टोपाज़, सिट्रीन
क्रिस्टलसिट्रीन, यलो कैल्साइट, गोल्डन टोपाज़
तेज़ असर वाला रत्ननहीं, फिर भी कुंडली देखकर ही चुना जाता है

पहले अपनी कुंडली दिखाएँ

कोई भी रत्न तभी पहनें जब नमिता जी आपकी कुंडली देख लें। रत्न अपने ग्रह को बल देता है, और अगर वही ग्रह आपकी कुंडली में कमज़ोर हो या परेशानी देता हो, तो मूलांक से मेल खाने पर भी वह रत्न आपके लिए ठीक नहीं रहता। घर या काम की जगह पर रखने के लिए क्रिस्टल ज़्यादा सौम्य विकल्प हैं।

पुखराज क्या है

पुखराज वह कोरंडम है जिसे लोहे की थोड़ी मात्रा पीला रंग देती है। आम तौर पर साफ़, एक जैसा पीला रंग पसंद किया जाता है, जिसमें भूरी या हरी झलक न हो। गुरु को सबसे शुभ ग्रह माना जाता है, इसलिए पुखराज को अक्सर सुरक्षित रत्न समझा जाता है, पर इसे भी कुंडली देखकर ही चुना जाता है।

परंपरा में पुखराज किन बातों से जुड़ा है

परंपरा में इसे ज्ञान, पढ़ाने, अच्छी सलाह और तरक्की से जोड़ा जाता है।

  • ज्ञान, पढ़ाई और पढ़ाना
  • अच्छी सलाह, बड़े-बुज़ुर्ग और गुरु
  • विवाह, खास तौर पर परंपरा में स्त्री की कुंडली में
  • संतान, धीमी पर पक्की तरक्की और भाग्य

ये परंपरा की मान्यताएँ हैं, वादे नहीं। रत्न दवा या आर्थिक सलाह नहीं है, और किसी नतीजे की गारंटी नहीं दी जाती।

परंपरा में पुखराज किसके लिए सुझाया जाता है

पुखराज सबसे ज़्यादा तब देखा जाता है जब गुरु लग्नेश हो (धनु या मीन लग्न) या किसी त्रिकोण भाव का स्वामी हो, जैसे मेष, कर्क, सिंह और वृश्चिक लग्न के लिए।

ज्योतिष में रत्न कुंडली देखकर चुना जाता है, सिर्फ़ सूर्य राशि या चंद्र राशि से नहीं। आम तौर पर शुरुआत लग्न से होती है: सबसे पहले लग्नेश का रत्न देखा जाता है, फिर 5वें और 9वें भाव (त्रिकोण) के स्वामियों के रत्न। जो ग्रह सिर्फ़ 6वें, 8वें या 12वें भाव के स्वामी हों, उन्हें आम तौर पर बल नहीं दिया जाता। नीचे की तालिका यही नियम 12 लग्नों के लिए गुरु पर लगाती है। यह सिर्फ़ शुरुआत है: रत्न सुझाने से पहले गुरु की राशि, भाव, बल और चल रही दशा देखी जाती है।

आपका लग्नगुरु किन भावों का स्वामीपरंपरा की राय
मेष9वाँ, 12वाँआम तौर पर देखा जाता है
वृषभ8वाँ, 11वाँआम तौर पर नहीं पहना जाता
मिथुन7वाँ, 10वाँकुंडली पर निर्भर
कर्क6वाँ, 9वाँआम तौर पर देखा जाता है
सिंह5वाँ, 8वाँआम तौर पर देखा जाता है
कन्या4वाँ, 7वाँकुंडली पर निर्भर
तुला3वाँ, 6वाँआम तौर पर नहीं पहना जाता
वृश्चिक2वाँ, 5वाँआम तौर पर देखा जाता है
धनु1वाँ, 4वाँआम तौर पर देखा जाता है
मकर3वाँ, 12वाँआम तौर पर नहीं पहना जाता
कुंभ2वाँ, 11वाँकुंडली पर निर्भर
मीन1वाँ, 10वाँआम तौर पर देखा जाता है

लग्न कैलकुलेटर से अपना लग्न जानें

किन्हें सावधान रहना चाहिए

जब गुरु आपके लग्न के लिए सिर्फ़ कठिन भावों का स्वामी हो, जैसा अक्सर वृषभ, तुला और मकर लग्न के लिए कहा जाता है, तो पुखराज आम तौर पर नहीं पहना जाता। शुभ ग्रह होने से गुरु हर कुंडली के लिए अच्छा नहीं हो जाता।

पुखराज के साथ आम तौर पर ये रत्न नहीं पहने जाते: पन्ना और हीरा। इस साइट की ग्रह मैत्री तालिका में इनके ग्रहों को आपस में मित्र नहीं माना जाता।

पुखराज आम तौर पर कैसे पहना जाता है

धातुसोना
उँगलीतर्जनी (पहली उँगली)
दिनगुरुवार
समयशुक्ल पक्ष में, सुबह
वज़न3 से 6 रत्ती

ये आम तौर पर बताए जाने वाले तरीके हैं, और परंपरा व ज्योतिषी के हिसाब से अलग हो सकते हैं। अपनी कुंडली के साथ मिली सलाह मानें। रत्नों के बाज़ार की रत्ती (पक्की रत्ती) लगभग 0.91 कैरेट होती है; सुनारों की पुरानी रत्ती छोटी, लगभग 0.61 कैरेट होती है, इसलिए पूछ लें कि कौन सी रत्ती की बात है।

उपरत्न और क्रिस्टल

गुरु के लिए आम तौर पर ये उपरत्न इस्तेमाल होते हैं: पीला टोपाज़ और सिट्रीन। इन्हें पुखराज से सौम्य माना जाता है, और जब मुख्य रत्न की सलाह न हो तब अक्सर इन्हें सुझाया जाता है। गुरु के लिए अक्सर चुने जाने वाले क्रिस्टल: सिट्रीन, यलो कैल्साइट और गोल्डन टोपाज़।

सिट्रीन अक्सर पढ़ाई या काम की मेज़ पर रखा जाता है, सीखते रहने और धीरे-धीरे आगे बढ़ने की याद के रूप में।

प्राकृतिक, ट्रीटेड या नकली?

  • कई पुखराज गर्म करके निखारे जाते हैं, और कुछ फीके पत्थरों को बेरिलियम ट्रीटमेंट से सुनहरा बनाया जाता है। रिपोर्ट में "नो हीट" या ट्रीटमेंट का नाम लिखा होना चाहिए।
  • पीला टोपाज़ (सुनैला) और सिट्रीन अक्सर पुखराज बताकर बेचे जाते हैं। अपने नाम से बिकें तो ये सही उपरत्न हैं।
  • लैब में बना पुखराज और पीला काँच भी पुखराज बताकर खूब बेचे जाते हैं।

घर पर की जाने वाली जाँचें (पानी, आग, खरोंच, रगड़ना) भरोसे लायक नहीं हैं, और कुछ से पत्थर खराब भी हो जाता है। किसी स्वतंत्र रत्न जाँच लैब की रिपोर्ट के साथ ही खरीदें, जिसमें पत्थर का नाम हो, लिखा हो कि वह प्राकृतिक है या लैब में बना, और हर ट्रीटमेंट का ज़िक्र हो। रिपोर्ट रत्न के साथ सँभालकर रखें।

पुखराज की देखभाल

  • गुनगुने पानी में हल्के साबुन की एक बूँद और नरम ब्रश से साफ़ करें, फिर सुखा लें।
  • इसे अलग रखें: पुखराज नरम पत्थरों पर खरोंच डाल देता है।
  • हर कुछ महीने में सेटिंग देख लें ताकि पत्थर ढीला न हो।
  • भारी काम, बागवानी, केमिकल से सफ़ाई और तैराकी के समय अँगूठी उतार दें।

और जानें

दूसरे नवरत्न

पुखराज से जुड़े सवाल

पुखराज किसे पहनना चाहिए?

पुखराज गुरु का रत्न है। लग्न के आम नियम से इसे मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु और मीन लग्न के लिए देखा जाता है, जहाँ गुरु 1ले, 5वें या 9वें भाव का स्वामी है, और वृषभ, तुला और मकर लग्न के लिए आम तौर पर नहीं पहना जाता, जहाँ वह सिर्फ़ 6वें, 8वें या 12वें भाव का स्वामी है। आख़िरी फ़ैसला आपकी कुंडली में गुरु के बल और स्थिति से होता है।

पुखराज किस उँगली में और किस धातु में पहनते हैं?

पुखराज आम तौर पर सोना में जड़वाकर तर्जनी (पहली उँगली) में, गुरुवार को शुक्ल पक्ष में, सुबह पहना जाता है। ये आम तौर पर बताए जाने वाले तरीके हैं और परंपरा के हिसाब से अलग हो सकते हैं; अपनी कुंडली के साथ मिली सलाह मानें।

पुखराज की जगह क्या पहन सकते हैं?

पुखराज का आम उपरत्न पीला टोपाज़ और सिट्रीन है। गुरु के लिए अक्सर चुने जाने वाले क्रिस्टल सिट्रीन, यलो कैल्साइट और गोल्डन टोपाज़ हैं। क्रिस्टल किसी इरादे की याद के रूप में घर या काम की जगह पर रखे जाते हैं, और जब रत्न की सलाह न हो तब ये सौम्य विकल्प हैं।

कैसे पता करें कि पुखराज असली है?

पक्के तौर पर सिर्फ़ रत्न जाँच लैब बता सकती है। पुखराज किसी स्वतंत्र लैब की रिपोर्ट के साथ खरीदें, जिसमें पत्थर का नाम हो, लिखा हो कि वह प्राकृतिक है या लैब में बना, और हर ट्रीटमेंट का ज़िक्र हो। घर की जाँचें भरोसे लायक नहीं हैं और कुछ से पत्थर खराब हो सकता है।

क्या गुरु शुभ ग्रह है, इसलिए पुखराज सबके लिए ठीक है?

नहीं। गुरु स्वभाव से शुभ ग्रह है, पर कुछ लग्नों के लिए वह कठिन भावों का स्वामी होता है, और तब पुखराज आम तौर पर नहीं सुझाया जाता। इस पेज की लग्न तालिका हर लग्न के लिए परंपरा की राय दिखाती है; आख़िरी फ़ैसला पूरी कुंडली से होता है।

क्या पुखराज की जगह पीला टोपाज़ पहन सकते हैं?

पीला टोपाज़ (सुनैला) सिट्रीन के साथ पुखराज का आम उपरत्न है। इसे सौम्य माना जाता है, और इसे टोपाज़ के नाम से ही खरीदना चाहिए, सस्ते पुखराज के नाम से नहीं।