नवग्रह · राहुः
राहु ग्रह: बीज मंत्र, रत्न, उपाय और आज की स्थिति
राहु आकाश में कोई पिंड नहीं, एक बिंदु है: जहाँ चंद्रमा का मार्ग उत्तर की ओर जाते हुए सूर्य के मार्ग को काटता है। इसे छाया ग्रह कहते हैं, यह राशियों में उल्टा चलता है (ट्रू नोड कभी-कभी थोड़े समय के लिए सीधा चलता है) और हमेशा केतु के ठीक सामने रहता है। स्वर्भानु की पुरानी कथा में ग्रहण राहु से जुड़ा है।
आज राहु कहाँ है
27/10/2026, सुबह 6:00 बजे (IST)
- राशि
- कुंभ, 2°05′
- नक्षत्र
- धनिष्ठा, चरण 3
- गति
- सदा वक्री
- अगला राशि परिवर्तन
- मकर राशि में, 05/12/2026
सभी नौ ग्रह एक साथ आज ग्रहों की स्थिति पर हैं; इस साल के राशि परिवर्तन ग्रह गोचर पर और वक्री अवधि वक्री ग्रह पेज पर।
राहु एक नज़र में
| नाम | संस्कृत: राहुः · हिंदी: राहु · अन्य नाम: स्वर्भानु, चंद्रमा का उत्तरी पात |
|---|---|
| कारक | महत्वाकांक्षा और गहरी इच्छाएँ; विदेश और विदेश यात्रा; नई, अलग चीज़ें और तकनीक; अचानक घटनाएँ और तेज़ बदलाव; लाल किताब में ससुराल |
| स्वराशि | ग्रंथों में मतभेद है, इसलिए यहाँ नहीं दी गई |
| उच्च राशि | ग्रंथों में मतभेद है, इसलिए यहाँ नहीं दी गई |
| नीच राशि | ग्रंथों में मतभेद है, इसलिए यहाँ नहीं दी गई |
| मित्र और शत्रु | नैसर्गिक मैत्री की पारंपरिक तालिका सात ग्रहों की है; राहु और केतु उसमें नहीं हैं |
| नक्षत्र (स्वामी) | आर्द्रा, स्वाती, शतभिषा |
| वार | इसका अपना कोई वार नहीं; अंक ज्योतिष में अंक 4 (राहु) का दिन शनिवार है |
| अंक | 4 |
| रंग | नीला, स्लेटी |
| रत्न | गोमेद (Hessonite) |
| विंशोत्तरी महादशा | 18 वर्ष (दशा क्रम में 6वाँ) |
| लाल किताब | पक्का घर 12; ससुराल, अचानक होने वाली घटनाएँ, बिजली और अनजानी बातें |
राहु किन बातों का कारक है
- महत्वाकांक्षा और गहरी इच्छाएँ
- विदेश और विदेश यात्रा
- नई, अलग चीज़ें और तकनीक
- अचानक घटनाएँ और तेज़ बदलाव
- लाल किताब में ससुराल
राहु की महादशा (18 वर्ष): महत्वाकांक्षा, कुछ अलग करने की चाह और विदेश। बड़ी इच्छाओं और तेज़ बदलाव का दौर, जिसमें सोच-समझकर फ़ैसले लेने होते हैं। अपनी चल रही दशा दशा कैलकुलेटर से जानें।
राहु मंत्र
राहु बीज मंत्र
ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः
रोमन लिपि में: Om bhrāṃ bhrīṃ bhrauṃ saḥ rāhave namaḥ
अर्थ: ॐ, राहु के बीज अक्षर, राहु देव को नमस्कार।
नवग्रह स्तोत्र से राहु का श्लोक
अर्धकायं महावीर्यं चन्द्रादित्यविमर्दनम्।
सिंहिकागर्भसंभूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम्॥
रोमन लिपि में: ardha-kāyaṃ mahā-vīryaṃ candrāditya-vimardanam /
siṃhikā-garbha-sambhūtaṃ taṃ rāhuṃ praṇamāmyaham
अर्थ: आधे शरीर वाले, महा पराक्रमी, चंद्र और सूर्य को ग्रसने वाले, सिंहिका के गर्भ से उत्पन्न राहु को मैं प्रणाम करता हूँ।
नवग्रह स्तोत्र महर्षि वेदव्यास का माना जाता है, जिसमें हर ग्रह के लिए एक श्लोक है।
जाप संख्या (आम तौर पर सुझाई गई): 18,000। पूरे जाप (अनुष्ठान) के लिए आम तौर पर सुझाई गई कुल संख्या, जो कई दिनों में माला पर 108-108 के चक्र में पूरी की जाती है। रोज़ के जाप के लिए आम तौर पर एक माला (108 बार) सुझाई जाती है। कुछ ग्रंथों में अलग संख्या दी गई है; अपने पंडित या ज्योतिषी की बताई संख्या मानें।
मंत्र का सही उच्चारण किसी जानकार गुरु या पंडित से सीखना परंपरा में अच्छा माना जाता है। मंत्र आस्था और ध्यान का अभ्यास है, किसी नतीजे की गारंटी नहीं।
राहु के सरल उपाय (आम तौर पर सुझाए जाने वाले)
ये उपाय परंपरा में आम तौर पर सुझाए जाते हैं। कौन सा ग्रह आपकी कुंडली में ध्यान माँगता है, यह पूरी कुंडली देखकर ही तय होता है।
- बीज मंत्र का 108 बार जाप करें, आम तौर पर शनिवार को।
- कंबल या काले तिल का दान करें।
- ससुराल वालों से अच्छे संबंध रखें।
- नशे, शॉर्टकट और बेईमानी के सौदों से दूर रहें।
रत्न: राहु का रत्न गोमेद (Hessonite) है; आम तौर पर सुझाए जाने वाले उपरत्न ऑरेंज ज़िरकॉन हैं। कोई भी रत्न तभी पहनें जब नमिता जी आपकी कुंडली देख लें। रत्न अपने ग्रह को बल देता है, और अगर वही ग्रह आपकी कुंडली में कमज़ोर हो या परेशानी देता हो, तो मूलांक से मेल खाने पर भी वह रत्न आपके लिए ठीक नहीं रहता। घर या काम की जगह पर रखने के लिए क्रिस्टल ज़्यादा सौम्य विकल्प हैं। अपने मूलांक का रत्न रत्न कैलकुलेटर से देखें।
लाल किताब: राहु के लाल किताब उपाय लाल किताब के उपाय पेज पर हैं।
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राहु ग्रह से जुड़े सवाल
राहु का बीज मंत्र क्या है?
ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः (Om bhrāṃ bhrīṃ bhrauṃ saḥ rāhave namaḥ)। ॐ, राहु के बीज अक्षर, राहु देव को नमस्कार।
राहु मंत्र का जाप कितनी बार करें?
रोज़ एक माला (108 बार) आम तौर पर सुझाई जाती है। पूरे अनुष्ठान के लिए आम तौर पर 18,000 की संख्या बताई जाती है, जो कई दिनों में पूरी होती है। आपके लिए क्या ठीक है, यह आपकी कुंडली पर निर्भर है।
राहु का रत्न कौन सा है?
गोमेद (Hessonite); उपरत्न ऑरेंज ज़िरकॉन। रत्न अपने ग्रह को बल देता है, इसलिए कुंडली दिखाकर ही पहनें। अपने मूलांक का रत्न रत्न कैलकुलेटर से देखें।
राहु की महादशा कितने साल की होती है?
विंशोत्तरी दशा में 18 वर्ष। महत्वाकांक्षा, कुछ अलग करने की चाह और विदेश। बड़ी इच्छाओं और तेज़ बदलाव का दौर, जिसमें सोच-समझकर फ़ैसले लेने होते हैं।
क्या राहु अशुभ ग्रह है?
कोई ग्रह सिर्फ़ शुभ या अशुभ नहीं होता। राहु दूसरी बातों के साथ महत्वाकांक्षा और गहरी इच्छाएँ, तथा विदेश और विदेश यात्रा का कारक है; आपके लिए यह कैसा काम करता है, यह आपकी कुंडली में इसकी राशि, भाव और बल और चल रही दशा पर निर्भर है।