नवग्रह · शनैश्चरः
शनि ग्रह: बीज मंत्र, रत्न, उपाय और आज की स्थिति
शनि सात दिखने वाले ग्रहों में सबसे धीमे हैं: एक राशि पार करने में लगभग ढाई साल लगते हैं। परंपरा में शनि को ग्रहों का न्यायाधीश कहा जाता है, जो लगातार और ईमानदार मेहनत का फल देते हैं। चंद्र राशि पर शनि का गोचर ही साढ़ेसाती है।
आज शनि कहाँ है
27/10/2026, सुबह 6:00 बजे (IST)
- राशि
- मीन, 15°22′
- नक्षत्र
- उत्तरा भाद्रपद, चरण 4
- गति
- वक्री
- अगला राशि परिवर्तन
- मेष राशि में, 03/06/2027
सभी नौ ग्रह एक साथ आज ग्रहों की स्थिति पर हैं; इस साल के राशि परिवर्तन ग्रह गोचर पर और वक्री अवधि वक्री ग्रह पेज पर।
शनि एक नज़र में
| नाम | संस्कृत: शनैश्चरः · हिंदी: शनि · अन्य नाम: शनैश्चर, मंद, शनिदेव |
|---|---|
| कारक | काम और कर्तव्य; अनुशासन, धैर्य और कड़ी मेहनत; कर्मचारी, सेवक और बुज़ुर्ग; न्याय और कर्मों का फल; लंबी आयु और धीरे पर टिकाऊ फल |
| स्वराशि | मकर और कुंभ |
| उच्च राशि | तुला |
| नीच राशि | मेष |
| मित्र ग्रह | बुध और शुक्र |
| सम ग्रह | गुरु |
| शत्रु ग्रह | सूर्य, चंद्र और मंगल |
| नक्षत्र (स्वामी) | पुष्य, अनुराधा, उत्तरा भाद्रपद |
| वार | शनिवार |
| अंक | 8 |
| रंग | गहरा नीला, काला |
| रत्न | नीलम (Blue Sapphire) |
| विंशोत्तरी महादशा | 19 वर्ष (दशा क्रम में 8वाँ) |
| लाल किताब | पक्का घर 8, 10; कर्मचारी, चाचा और ताऊ, मशीनें, लोहा और बुढ़ापा |
शनि किन बातों का कारक है
- काम और कर्तव्य
- अनुशासन, धैर्य और कड़ी मेहनत
- कर्मचारी, सेवक और बुज़ुर्ग
- न्याय और कर्मों का फल
- लंबी आयु और धीरे पर टिकाऊ फल
शनि की महादशा (19 वर्ष): काम, अनुशासन और ज़िम्मेदारी। फल लगातार मेहनत से मिलते हैं; देरी धैर्य सिखाती है। अपनी चल रही दशा दशा कैलकुलेटर से जानें।
शनि मंत्र
शनि बीज मंत्र
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः
रोमन लिपि में: Om prāṃ prīṃ prauṃ saḥ śanaiścarāya namaḥ
अर्थ: ॐ, शनि के बीज अक्षर, धीरे चलने वाले शनैश्चर (शनिदेव) को नमस्कार।
नवग्रह स्तोत्र से शनि का श्लोक
नीलाञ्जनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्।
छायामार्तण्डसंभूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥
रोमन लिपि में: nīlāñjana-samābhāsaṃ ravi-putraṃ yamāgrajam /
chāyā-mārtaṇḍa-sambhūtaṃ taṃ namāmi śanaiścaram
अर्थ: नीले काजल जैसी आभा वाले, सूर्य के पुत्र और यमराज के बड़े भाई, छाया और मार्तंड (सूर्य) से उत्पन्न शनैश्चर को मैं नमस्कार करता हूँ।
नवग्रह स्तोत्र महर्षि वेदव्यास का माना जाता है, जिसमें हर ग्रह के लिए एक श्लोक है।
जाप संख्या (आम तौर पर सुझाई गई): 23,000। पूरे जाप (अनुष्ठान) के लिए आम तौर पर सुझाई गई कुल संख्या, जो कई दिनों में माला पर 108-108 के चक्र में पूरी की जाती है। रोज़ के जाप के लिए आम तौर पर एक माला (108 बार) सुझाई जाती है। कुछ ग्रंथों में अलग संख्या दी गई है; अपने पंडित या ज्योतिषी की बताई संख्या मानें।
मंत्र का सही उच्चारण किसी जानकार गुरु या पंडित से सीखना परंपरा में अच्छा माना जाता है। मंत्र आस्था और ध्यान का अभ्यास है, किसी नतीजे की गारंटी नहीं।
शनि के सरल उपाय (आम तौर पर सुझाए जाने वाले)
ये उपाय परंपरा में आम तौर पर सुझाए जाते हैं। कौन सा ग्रह आपकी कुंडली में ध्यान माँगता है, यह पूरी कुंडली देखकर ही तय होता है।
- शनिवार को बीज मंत्र का 108 बार जाप करें।
- शनिवार को सरसों का तेल, काले तिल या काली उड़द का दान करें।
- कई परिवारों की तरह शनिवार शाम पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।
- कर्मचारियों, सेवकों और बुज़ुर्गों का सम्मान करें, और ज़रूरतमंदों की मदद करें।
रत्न: शनि का रत्न नीलम (Blue Sapphire) है; आम तौर पर सुझाए जाने वाले उपरत्न एमेथिस्ट और आयोलाइट (नीली) हैं। कोई भी रत्न तभी पहनें जब नमिता जी आपकी कुंडली देख लें। रत्न अपने ग्रह को बल देता है, और अगर वही ग्रह आपकी कुंडली में कमज़ोर हो या परेशानी देता हो, तो मूलांक से मेल खाने पर भी वह रत्न आपके लिए ठीक नहीं रहता। घर या काम की जगह पर रखने के लिए क्रिस्टल ज़्यादा सौम्य विकल्प हैं। अपने मूलांक का रत्न रत्न कैलकुलेटर से देखें।
लाल किताब: शनि के लाल किताब उपाय लाल किताब के उपाय पेज पर हैं।
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शनि ग्रह से जुड़े सवाल
शनि का बीज मंत्र क्या है?
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः (Om prāṃ prīṃ prauṃ saḥ śanaiścarāya namaḥ)। ॐ, शनि के बीज अक्षर, धीरे चलने वाले शनैश्चर (शनिदेव) को नमस्कार।
शनि मंत्र का जाप कितनी बार करें?
रोज़ एक माला (108 बार) आम तौर पर सुझाई जाती है, अक्सर शनिवार से शुरू करके। पूरे अनुष्ठान के लिए आम तौर पर 23,000 की संख्या बताई जाती है, जो कई दिनों में पूरी होती है। आपके लिए क्या ठीक है, यह आपकी कुंडली पर निर्भर है।
शनि का रत्न कौन सा है?
नीलम (Blue Sapphire); उपरत्न एमेथिस्ट और आयोलाइट (नीली)। रत्न अपने ग्रह को बल देता है, इसलिए कुंडली दिखाकर ही पहनें। अपने मूलांक का रत्न रत्न कैलकुलेटर से देखें।
शनि की महादशा कितने साल की होती है?
विंशोत्तरी दशा में 19 वर्ष। काम, अनुशासन और ज़िम्मेदारी। फल लगातार मेहनत से मिलते हैं; देरी धैर्य सिखाती है।
क्या शनि अशुभ ग्रह है?
कोई ग्रह सिर्फ़ शुभ या अशुभ नहीं होता। शनि दूसरी बातों के साथ काम और कर्तव्य, तथा अनुशासन, धैर्य और कड़ी मेहनत का कारक है; आपके लिए यह कैसा काम करता है, यह आपकी कुंडली में इसकी राशि, भाव और बल और चल रही दशा पर निर्भर है।