नवग्रह · शुक्रः
शुक्र ग्रह: बीज मंत्र, रत्न, उपाय और आज की स्थिति
शुक्र असुरों के गुरु और प्रेम, सुख-सुविधा और कला के ग्रह हैं। विवाह के लिए शुक्र को सप्तम भाव के साथ पढ़ा जाता है, और इसकी 20 साल की दशा नौ ग्रहों में सबसे लंबी है।
आज शुक्र कहाँ है
27/10/2026, सुबह 6:00 बजे (IST)
- राशि
- तुला, 4°45′
- नक्षत्र
- चित्रा, चरण 4
- गति
- वक्री
- अगला राशि परिवर्तन
- कन्या राशि में, 06/11/2026
सभी नौ ग्रह एक साथ आज ग्रहों की स्थिति पर हैं; इस साल के राशि परिवर्तन ग्रह गोचर पर और वक्री अवधि वक्री ग्रह पेज पर।
शुक्र एक नज़र में
| नाम | संस्कृत: शुक्रः · हिंदी: शुक्र · अन्य नाम: भार्गव, शुक्राचार्य |
|---|---|
| कारक | विवाह और जीवनसाथी; प्रेम और रिश्ते; सुख-सुविधा, घर और वाहन; कला, संगीत और सुंदरता; आनंद और सुरुचि |
| स्वराशि | वृषभ और तुला |
| उच्च राशि | मीन |
| नीच राशि | कन्या |
| मित्र ग्रह | बुध और शनि |
| सम ग्रह | मंगल और गुरु |
| शत्रु ग्रह | सूर्य और चंद्र |
| नक्षत्र (स्वामी) | भरणी, पूर्वा फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा |
| वार | शुक्रवार |
| अंक | 6 |
| रंग | सफ़ेद, हल्का गुलाबी |
| रत्न | हीरा या सफ़ेद पुखराज (Diamond or White Sapphire) |
| विंशोत्तरी महादशा | 20 वर्ष (दशा क्रम में 2वाँ) |
| लाल किताब | पक्का घर 7; जीवनसाथी, घर का सुख, सुंदरता और गाय |
शुक्र किन बातों का कारक है
- विवाह और जीवनसाथी
- प्रेम और रिश्ते
- सुख-सुविधा, घर और वाहन
- कला, संगीत और सुंदरता
- आनंद और सुरुचि
शुक्र की महादशा (20 वर्ष): रिश्ते, सुख-सुविधा, कला और आनंद। अक्सर विवाह, घर और वाहन से जुड़ा दौर माना जाता है, और इन पर खर्च भी होता है। अपनी चल रही दशा दशा कैलकुलेटर से जानें।
शुक्र मंत्र
शुक्र बीज मंत्र
ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः
रोमन लिपि में: Om drāṃ drīṃ drauṃ saḥ śukrāya namaḥ
अर्थ: ॐ, शुक्र के बीज अक्षर, शुक्र देव को नमस्कार।
नवग्रह स्तोत्र से शुक्र का श्लोक
हिमकुन्दमृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम्।
सर्वशास्त्रप्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम्॥
रोमन लिपि में: hima-kunda-mṛṇālābhaṃ daityānāṃ paramaṃ gurum /
sarva-śāstra-pravaktāraṃ bhārgavaṃ praṇamāmyaham
अर्थ: बर्फ़, कुंद (चमेली) के फूल और कमल नाल जैसे उजले, दैत्यों के परम गुरु और सब शास्त्रों के ज्ञाता भार्गव (शुक्र) को मैं प्रणाम करता हूँ।
नवग्रह स्तोत्र महर्षि वेदव्यास का माना जाता है, जिसमें हर ग्रह के लिए एक श्लोक है।
जाप संख्या (आम तौर पर सुझाई गई): 16,000। पूरे जाप (अनुष्ठान) के लिए आम तौर पर सुझाई गई कुल संख्या, जो कई दिनों में माला पर 108-108 के चक्र में पूरी की जाती है। रोज़ के जाप के लिए आम तौर पर एक माला (108 बार) सुझाई जाती है। कुछ ग्रंथों में अलग संख्या दी गई है; अपने पंडित या ज्योतिषी की बताई संख्या मानें।
मंत्र का सही उच्चारण किसी जानकार गुरु या पंडित से सीखना परंपरा में अच्छा माना जाता है। मंत्र आस्था और ध्यान का अभ्यास है, किसी नतीजे की गारंटी नहीं।
शुक्र के सरल उपाय (आम तौर पर सुझाए जाने वाले)
ये उपाय परंपरा में आम तौर पर सुझाए जाते हैं। कौन सा ग्रह आपकी कुंडली में ध्यान माँगता है, यह पूरी कुंडली देखकर ही तय होता है।
- शुक्रवार को बीज मंत्र का 108 बार जाप करें।
- जीवनसाथी का सम्मान करें और घर का माहौल अच्छा रखें।
- शुक्रवार को सफ़ेद चावल, दही, चीनी या सफ़ेद कपड़ों का दान करें।
- खुद को, अपने कपड़ों को और घर को साफ़ और ताज़ा रखें।
रत्न: शुक्र का रत्न हीरा या सफ़ेद पुखराज (Diamond or White Sapphire) है; आम तौर पर सुझाए जाने वाले उपरत्न ओपल और सफ़ेद ज़िरकॉन हैं। कोई भी रत्न तभी पहनें जब नमिता जी आपकी कुंडली देख लें। रत्न अपने ग्रह को बल देता है, और अगर वही ग्रह आपकी कुंडली में कमज़ोर हो या परेशानी देता हो, तो मूलांक से मेल खाने पर भी वह रत्न आपके लिए ठीक नहीं रहता। घर या काम की जगह पर रखने के लिए क्रिस्टल ज़्यादा सौम्य विकल्प हैं। अपने मूलांक का रत्न रत्न कैलकुलेटर से देखें।
लाल किताब: शुक्र के लाल किताब उपाय लाल किताब के उपाय पेज पर हैं।
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शुक्र ग्रह से जुड़े सवाल
शुक्र का बीज मंत्र क्या है?
ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः (Om drāṃ drīṃ drauṃ saḥ śukrāya namaḥ)। ॐ, शुक्र के बीज अक्षर, शुक्र देव को नमस्कार।
शुक्र मंत्र का जाप कितनी बार करें?
रोज़ एक माला (108 बार) आम तौर पर सुझाई जाती है, अक्सर शुक्रवार से शुरू करके। पूरे अनुष्ठान के लिए आम तौर पर 16,000 की संख्या बताई जाती है, जो कई दिनों में पूरी होती है। आपके लिए क्या ठीक है, यह आपकी कुंडली पर निर्भर है।
शुक्र का रत्न कौन सा है?
हीरा या सफ़ेद पुखराज (Diamond or White Sapphire); उपरत्न ओपल और सफ़ेद ज़िरकॉन। रत्न अपने ग्रह को बल देता है, इसलिए कुंडली दिखाकर ही पहनें। अपने मूलांक का रत्न रत्न कैलकुलेटर से देखें।
शुक्र की महादशा कितने साल की होती है?
विंशोत्तरी दशा में 20 वर्ष। रिश्ते, सुख-सुविधा, कला और आनंद। अक्सर विवाह, घर और वाहन से जुड़ा दौर माना जाता है, और इन पर खर्च भी होता है।
क्या शुक्र अशुभ ग्रह है?
कोई ग्रह सिर्फ़ शुभ या अशुभ नहीं होता। शुक्र दूसरी बातों के साथ विवाह और जीवनसाथी, तथा प्रेम और रिश्ते का कारक है; आपके लिए यह कैसा काम करता है, यह आपकी कुंडली में इसकी राशि, भाव और बल और चल रही दशा पर निर्भर है।