नवग्रह · बृहस्पतिः
गुरु ग्रह: बीज मंत्र, रत्न, उपाय और आज की स्थिति
गुरु (बृहस्पति) देवताओं के गुरु और परंपरा में सबसे शुभ ग्रह माने जाते हैं। गुरु कुंडली में जहाँ बैठते हैं और जिन भावों पर दृष्टि डालते हैं, जीवन का वह हिस्सा मार्गदर्शन और समझदारी से बढ़ता है।
आज गुरु कहाँ है
27/10/2026, सुबह 6:00 बजे (IST)
- राशि
- कर्क, 29°27′
- नक्षत्र
- आश्लेषा, चरण 4
- गति
- मार्गी
- अगला राशि परिवर्तन
- सिंह राशि में, 31/10/2026
सभी नौ ग्रह एक साथ आज ग्रहों की स्थिति पर हैं; इस साल के राशि परिवर्तन ग्रह गोचर पर और वक्री अवधि वक्री ग्रह पेज पर।
गुरु एक नज़र में
| नाम | संस्कृत: बृहस्पतिः · हिंदी: गुरु · अन्य नाम: बृहस्पति, देवगुरु |
|---|---|
| कारक | ज्ञान और उच्च शिक्षा; गुरु और मार्गदर्शक; संतान; आस्था, धर्म और अच्छी सलाह; बढ़त और धन; स्त्री की कुंडली में पति भी |
| स्वराशि | धनु और मीन |
| उच्च राशि | कर्क |
| नीच राशि | मकर |
| मित्र ग्रह | सूर्य, चंद्र और मंगल |
| सम ग्रह | शनि |
| शत्रु ग्रह | बुध और शुक्र |
| नक्षत्र (स्वामी) | पुनर्वसु, विशाखा, पूर्वा भाद्रपद |
| वार | गुरुवार |
| अंक | 3 |
| रंग | पीला |
| रत्न | पुखराज (Yellow Sapphire) |
| विंशोत्तरी महादशा | 16 वर्ष (दशा क्रम में 7वाँ) |
| लाल किताब | पक्का घर 2, 5, 9, 11, 12; गुरु और शिक्षक, दादा, विद्या और आस्था |
गुरु किन बातों का कारक है
- ज्ञान और उच्च शिक्षा
- गुरु और मार्गदर्शक
- संतान
- आस्था, धर्म और अच्छी सलाह
- बढ़त और धन; स्त्री की कुंडली में पति भी
गुरु की महादशा (16 वर्ष): ज्ञान, मार्गदर्शन, संतान और आस्था। परंपरा में इसे बढ़त और अच्छी सलाह का दौर माना जाता है। अपनी चल रही दशा दशा कैलकुलेटर से जानें।
गुरु मंत्र
गुरु बीज मंत्र
ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः
रोमन लिपि में: Om grāṃ grīṃ grauṃ saḥ gurave namaḥ
अर्थ: ॐ, गुरु के बीज अक्षर, देवगुरु बृहस्पति को नमस्कार।
नवग्रह स्तोत्र से गुरु का श्लोक
देवानां च ऋषीणां च गुरुं काञ्चनसन्निभम्।
बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम्॥
रोमन लिपि में: devānāṃ ca ṛṣīṇāṃ ca guruṃ kāñcana-sannibham /
buddhi-bhūtaṃ trilokeśaṃ taṃ namāmi bṛhaspatim
अर्थ: देवताओं और ऋषियों के गुरु, सोने जैसी आभा वाले, बुद्धि के स्वरूप, तीनों लोकों के स्वामी बृहस्पति को मैं नमस्कार करता हूँ।
नवग्रह स्तोत्र महर्षि वेदव्यास का माना जाता है, जिसमें हर ग्रह के लिए एक श्लोक है।
जाप संख्या (आम तौर पर सुझाई गई): 19,000। पूरे जाप (अनुष्ठान) के लिए आम तौर पर सुझाई गई कुल संख्या, जो कई दिनों में माला पर 108-108 के चक्र में पूरी की जाती है। रोज़ के जाप के लिए आम तौर पर एक माला (108 बार) सुझाई जाती है। कुछ ग्रंथों में अलग संख्या दी गई है; अपने पंडित या ज्योतिषी की बताई संख्या मानें।
मंत्र का सही उच्चारण किसी जानकार गुरु या पंडित से सीखना परंपरा में अच्छा माना जाता है। मंत्र आस्था और ध्यान का अभ्यास है, किसी नतीजे की गारंटी नहीं।
गुरु के सरल उपाय (आम तौर पर सुझाए जाने वाले)
ये उपाय परंपरा में आम तौर पर सुझाए जाते हैं। कौन सा ग्रह आपकी कुंडली में ध्यान माँगता है, यह पूरी कुंडली देखकर ही तय होता है।
- गुरुवार को बीज मंत्र का 108 बार जाप करें।
- गुरुजनों, बड़ों और विद्वानों का सम्मान करें।
- गुरुवार को चने की दाल, हल्दी या पीले कपड़े का दान करें।
- कई परिवारों की तरह गुरुवार को केले के पौधे या पीपल में जल दें।
रत्न: गुरु का रत्न पुखराज (Yellow Sapphire) है; आम तौर पर सुझाए जाने वाले उपरत्न पीला टोपाज़ और सिट्रीन हैं। कोई भी रत्न तभी पहनें जब नमिता जी आपकी कुंडली देख लें। रत्न अपने ग्रह को बल देता है, और अगर वही ग्रह आपकी कुंडली में कमज़ोर हो या परेशानी देता हो, तो मूलांक से मेल खाने पर भी वह रत्न आपके लिए ठीक नहीं रहता। घर या काम की जगह पर रखने के लिए क्रिस्टल ज़्यादा सौम्य विकल्प हैं। अपने मूलांक का रत्न रत्न कैलकुलेटर से देखें।
लाल किताब: गुरु के लाल किताब उपाय लाल किताब के उपाय पेज पर हैं।
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गुरु ग्रह से जुड़े सवाल
गुरु का बीज मंत्र क्या है?
ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः (Om grāṃ grīṃ grauṃ saḥ gurave namaḥ)। ॐ, गुरु के बीज अक्षर, देवगुरु बृहस्पति को नमस्कार।
गुरु मंत्र का जाप कितनी बार करें?
रोज़ एक माला (108 बार) आम तौर पर सुझाई जाती है, अक्सर गुरुवार से शुरू करके। पूरे अनुष्ठान के लिए आम तौर पर 19,000 की संख्या बताई जाती है, जो कई दिनों में पूरी होती है। आपके लिए क्या ठीक है, यह आपकी कुंडली पर निर्भर है।
गुरु का रत्न कौन सा है?
पुखराज (Yellow Sapphire); उपरत्न पीला टोपाज़ और सिट्रीन। रत्न अपने ग्रह को बल देता है, इसलिए कुंडली दिखाकर ही पहनें। अपने मूलांक का रत्न रत्न कैलकुलेटर से देखें।
गुरु की महादशा कितने साल की होती है?
विंशोत्तरी दशा में 16 वर्ष। ज्ञान, मार्गदर्शन, संतान और आस्था। परंपरा में इसे बढ़त और अच्छी सलाह का दौर माना जाता है।
क्या गुरु अशुभ ग्रह है?
कोई ग्रह सिर्फ़ शुभ या अशुभ नहीं होता। गुरु दूसरी बातों के साथ ज्ञान और उच्च शिक्षा, तथा गुरु और मार्गदर्शक का कारक है; आपके लिए यह कैसा काम करता है, यह आपकी कुंडली में इसकी राशि, भाव और बल और चल रही दशा पर निर्भर है।