नवग्रह · सूर्यः
सूर्य ग्रह: बीज मंत्र, रत्न, उपाय और आज की स्थिति
सूर्य नौ ग्रहों में राजा माने जाते हैं। कुंडली में सूर्य बताता है कि व्यक्ति कैसे चमकता है: उसकी अपनी पहचान, पिता और अधिकार वाले लोगों से उसका रिश्ता, और वह ज़िम्मेदारी कैसे निभाता है।
आज सूर्य कहाँ है
27/10/2026, सुबह 6:00 बजे (IST)
- राशि
- तुला, 9°22′
- नक्षत्र
- स्वाती, चरण 1
- गति
- मार्गी (कभी वक्री नहीं)
- अगला राशि परिवर्तन
- वृश्चिक राशि में, 16/11/2026
सभी नौ ग्रह एक साथ आज ग्रहों की स्थिति पर हैं; इस साल के राशि परिवर्तन ग्रह गोचर पर और वक्री अवधि वक्री ग्रह पेज पर।
सूर्य एक नज़र में
| नाम | संस्कृत: सूर्यः · हिंदी: सूर्य · अन्य नाम: रवि, आदित्य, भानु, दिवाकर |
|---|---|
| कारक | आत्मा और स्वयं; पिता; अधिकार, सरकार और बड़े अधिकारी; आत्मविश्वास और आत्मसम्मान; ऊर्जा और नेतृत्व की इच्छा |
| स्वराशि | सिंह |
| उच्च राशि | मेष |
| नीच राशि | तुला |
| मित्र ग्रह | चंद्र, मंगल और गुरु |
| सम ग्रह | बुध |
| शत्रु ग्रह | शुक्र और शनि |
| नक्षत्र (स्वामी) | कृत्तिका, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा |
| वार | रविवार |
| अंक | 1 |
| रंग | सुनहरा, नारंगी |
| रत्न | माणिक्य (माणिक) (Ruby) |
| विंशोत्तरी महादशा | 6 वर्ष (दशा क्रम में 3वाँ) |
| लाल किताब | पक्का घर 1; पिता, सरकार, आत्मसम्मान और परिवार की आँखें |
सूर्य किन बातों का कारक है
- आत्मा और स्वयं
- पिता
- अधिकार, सरकार और बड़े अधिकारी
- आत्मविश्वास और आत्मसम्मान
- ऊर्जा और नेतृत्व की इच्छा
सूर्य की महादशा (6 वर्ष): स्वयं, अधिकार और मान-सम्मान। सरकारी काम, बड़े अधिकारी और पिता से जुड़े विषय सामने आते हैं। अपनी चल रही दशा दशा कैलकुलेटर से जानें।
सूर्य मंत्र
सूर्य बीज मंत्र
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
रोमन लिपि में: Om hrāṃ hrīṃ hrauṃ saḥ sūryāya namaḥ
अर्थ: ॐ, सूर्य के बीज अक्षर, सूर्य देव को नमस्कार।
नवग्रह स्तोत्र से सूर्य का श्लोक
जपाकुसुमसंकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम्।
तमोऽरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम्॥
रोमन लिपि में: japākusuma-saṅkāśaṃ kāśyapeyaṃ mahādyutim /
tamo’riṃ sarva-pāpaghnaṃ praṇato’smi divākaram
अर्थ: जपा (गुड़हल) के फूल जैसे लाल, कश्यप ऋषि के पुत्र, महान तेज वाले, अंधकार के शत्रु और सब पापों को दूर करने वाले दिवाकर (सूर्य) को मैं प्रणाम करता हूँ।
नवग्रह स्तोत्र महर्षि वेदव्यास का माना जाता है, जिसमें हर ग्रह के लिए एक श्लोक है।
जाप संख्या (आम तौर पर सुझाई गई): 7,000। पूरे जाप (अनुष्ठान) के लिए आम तौर पर सुझाई गई कुल संख्या, जो कई दिनों में माला पर 108-108 के चक्र में पूरी की जाती है। रोज़ के जाप के लिए आम तौर पर एक माला (108 बार) सुझाई जाती है। कुछ ग्रंथों में अलग संख्या दी गई है; अपने पंडित या ज्योतिषी की बताई संख्या मानें।
मंत्र का सही उच्चारण किसी जानकार गुरु या पंडित से सीखना परंपरा में अच्छा माना जाता है। मंत्र आस्था और ध्यान का अभ्यास है, किसी नतीजे की गारंटी नहीं।
सूर्य के सरल उपाय (आम तौर पर सुझाए जाने वाले)
ये उपाय परंपरा में आम तौर पर सुझाए जाते हैं। कौन सा ग्रह आपकी कुंडली में ध्यान माँगता है, यह पूरी कुंडली देखकर ही तय होता है।
- तांबे के लोटे से उगते सूर्य को जल (अर्घ्य) चढ़ाएँ।
- रविवार को बीज मंत्र का 108 बार जाप करें।
- पिता और बड़ों का सम्मान करें और उनका आशीर्वाद लें।
- रविवार को गेहूँ और गुड़ का दान करें।
रत्न: सूर्य का रत्न माणिक्य (माणिक) (Ruby) है; आम तौर पर सुझाए जाने वाले उपरत्न लाल गार्नेट और लाल स्पिनेल हैं। कोई भी रत्न तभी पहनें जब नमिता जी आपकी कुंडली देख लें। रत्न अपने ग्रह को बल देता है, और अगर वही ग्रह आपकी कुंडली में कमज़ोर हो या परेशानी देता हो, तो मूलांक से मेल खाने पर भी वह रत्न आपके लिए ठीक नहीं रहता। घर या काम की जगह पर रखने के लिए क्रिस्टल ज़्यादा सौम्य विकल्प हैं। अपने मूलांक का रत्न रत्न कैलकुलेटर से देखें।
लाल किताब: सूर्य के लाल किताब उपाय लाल किताब के उपाय पेज पर हैं।
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सूर्य ग्रह से जुड़े सवाल
सूर्य का बीज मंत्र क्या है?
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः (Om hrāṃ hrīṃ hrauṃ saḥ sūryāya namaḥ)। ॐ, सूर्य के बीज अक्षर, सूर्य देव को नमस्कार।
सूर्य मंत्र का जाप कितनी बार करें?
रोज़ एक माला (108 बार) आम तौर पर सुझाई जाती है, अक्सर रविवार से शुरू करके। पूरे अनुष्ठान के लिए आम तौर पर 7,000 की संख्या बताई जाती है, जो कई दिनों में पूरी होती है। आपके लिए क्या ठीक है, यह आपकी कुंडली पर निर्भर है।
सूर्य का रत्न कौन सा है?
माणिक्य (माणिक) (Ruby); उपरत्न लाल गार्नेट और लाल स्पिनेल। रत्न अपने ग्रह को बल देता है, इसलिए कुंडली दिखाकर ही पहनें। अपने मूलांक का रत्न रत्न कैलकुलेटर से देखें।
सूर्य की महादशा कितने साल की होती है?
विंशोत्तरी दशा में 6 वर्ष। स्वयं, अधिकार और मान-सम्मान। सरकारी काम, बड़े अधिकारी और पिता से जुड़े विषय सामने आते हैं।
क्या सूर्य अशुभ ग्रह है?
कोई ग्रह सिर्फ़ शुभ या अशुभ नहीं होता। सूर्य दूसरी बातों के साथ आत्मा और स्वयं, तथा पिता का कारक है; आपके लिए यह कैसा काम करता है, यह आपकी कुंडली में इसकी राशि, भाव और बल और चल रही दशा पर निर्भर है।