हिंदू त्योहार · उत्तरायण, पोंगल, खिचड़ी
मकर संक्रांति 2027: तारीख और संक्रांति का समय
मकर संक्रांति वह दिन है जब सूर्य मकर राशि (निरयण) में प्रवेश करते हैं। यह उन गिने चुने त्योहारों में है जो चंद्रमा से नहीं, सूर्य से तय होते हैं, इसलिए इसकी तारीख 14 या 15 जनवरी के आसपास ही रहती है।
अगली तारीख: शुक्रवार, 15 जनवरी 2027
मकर संक्रांति का समय
| विवरण | 2027 | 2028 |
|---|---|---|
| तारीख | शुक्रवार, 15 जनवरी 2027 | शनिवार, 15 जनवरी 2028 |
| संक्रांति का पल (सूर्य मकर में) | 14 जनवरी, 9:12 pm | 15 जनवरी, 3:24 am |
| पुण्य काल | 6:53 am से 5:52 pm तक | 6:53 am से 5:52 pm तक |
सभी समय IST में हैं। तिथि का समय पूरे भारत के लिए सही है; सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और मुहूर्त नागपुर के लिए हैं, उत्तर और मध्य भारत की (पूर्णिमांत) परंपरा में। दूसरे शहर में ये कुछ मिनट आगे पीछे होंगे।
आम तौर पर कैसे मनाया जाता है
- कई परिवार सुबह जल्दी स्नान करते हैं, अक्सर नदी में, और तिल, गुड़, चावल या गर्म कपड़ों का दान करते हैं।
- तिल गुड़ की मिठाई बाँटी जाती है; महाराष्ट्र में कहते हैं "तिळगुळ घ्या, गोड गोड बोला"।
- गुजरात और कई जगह इस दिन पतंग उड़ाई जाती है।
- उत्तर भारत के बड़े हिस्से में खिचड़ी बनाई और चढ़ाई जाती है।
क्षेत्र के हिसाब से अंतर
यही संक्रांति गुजरात में उत्तरायण, तमिलनाडु में पोंगल (तीन चार दिन का त्योहार), असम में माघ बिहू और उत्तर प्रदेश व बिहार में खिचड़ी के नाम से मनाई जाती है। पंजाब में लोहड़ी इससे एक शाम पहले होती है।
इस साइट के सभी नौ क्षेत्रीय कैलेंडर में जो इसे देते हैं, 2027 की तारीख यही है।
तारीख कैसे निकाली गई है
मकर संक्रांति उस दिन है जिस दिन सूर्य निरयण मकर राशि में प्रवेश करते हैं (लाहिड़ी अयनांश)। अगर प्रवेश सूर्यास्त के बाद हो, तो त्योहार अगले दिन माना जाता है। सूर्य और चंद्रमा की स्थिति हर साल के लिए निकाली जाती है (निरयण, लाहिड़ी अयनांश), इसलिए तारीखें छपी सूची से नहीं ली गईं।
मकर संक्रांति के बारे में सवाल
2027 में मकर संक्रांति कब है?
मकर संक्रांति 2027 शुक्रवार, 15 जनवरी 2027 को है, और 2028 में शनिवार, 15 जनवरी 2028 को। तारीखें नागपुर के लिए उत्तर और मध्य भारत की परंपरा से निकाली गई हैं; ऊपर की तालिका में तिथि और मुहूर्त का समय दिया है।
मकर संक्रांति कभी कभी 15 जनवरी को क्यों होती है?
यह त्योहार सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के पल से चलता है। अगर यह पल सूर्यास्त के बाद आए, तो पुण्य काल और त्योहार अगले दिन माने जाते हैं। इसीलिए कुछ सालों में 15 जनवरी आती है।
पुण्य काल क्या है?
दिन का वह हिस्सा जो संक्रांति के स्नान, दान और पूजा के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। इस पेज पर यह संक्रांति के पल से सूर्यास्त तक है, या अगर सूर्य सूर्यास्त के बाद मकर में आएँ तो अगले दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक। कुछ पंचांग इसके अंदर छोटा महापुण्य काल भी देते हैं।
किसी दूसरे कैलेंडर में अलग तारीख क्यों दिखती है?
तिथि पूरे भारत में एक ही पल में शुरू और खत्म होती है, पर त्योहार का दिन इस पर निर्भर करता है कि दिन के किस समय (सूर्योदय, दोपहर, शाम या आधी रात) तिथि देखी जाती है, और किस शहर के सूर्योदय से। इसलिए अलग शहर या परंपरा का पंचांग एक दिन आगे पीछे हो सकता है। जो पंचांग आपका परिवार मानता है, वही मानें।
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