हिंदू त्योहार · शारदीय नवरात्रि, दुर्गा पूजा
नवरात्रि 2027: तारीखें, नौ दिन और दुर्गा अष्टमी
शारदीय नवरात्रि आश्विन में देवी की नौ रातें हैं, शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक, जिसके बाद दसवें दिन दशहरा (विजयादशमी) आता है। यह सबसे ज़्यादा मनाई जाने वाली नवरात्रि है।
अगली तारीख: गुरुवार, 30 सितंबर 2027
शारदीय नवरात्रि आरंभ का समय
| विवरण | 2027 | 2028 |
|---|---|---|
| तारीख | गुरुवार, 30 सितंबर 2027 | मंगलवार, 19 सितंबर 2028 |
| शुक्ल प्रतिपदा तिथि शुरू | 30 सितंबर, 8:06 am | 18 सितंबर, 11:54 pm |
| शुक्ल प्रतिपदा तिथि समाप्त | 1 अक्टूबर, 5:35 am | 19 सितंबर, 8:01 pm |
| नागपुर में सूर्योदय | 6:04 am | 6:01 am |
दुर्गा अष्टमी का समय
| विवरण | 2027 | 2028 |
|---|---|---|
| तारीख | गुरुवार, 7 अक्टूबर 2027 | मंगलवार, 26 सितंबर 2028 |
| शुक्ल अष्टमी तिथि शुरू | 7 अक्टूबर, 4:14 am | 25 सितंबर, 6:33 am |
| शुक्ल अष्टमी तिथि समाप्त | 8 अक्टूबर, 6:28 am | 26 सितंबर, 6:59 am |
| नागपुर में सूर्योदय | 6:06 am | 6:03 am |
दशहरा (विजयादशमी) का समय
| विवरण | 2027 | 2028 |
|---|---|---|
| तारीख | शनिवार, 9 अक्टूबर 2027 | बुधवार, 27 सितंबर 2028 |
| शुक्ल दशमी तिथि शुरू | 9 अक्टूबर, 9:02 am | 27 सितंबर, 8:10 am |
| शुक्ल दशमी तिथि समाप्त | 10 अक्टूबर, 11:41 am | 28 सितंबर, 9:56 am |
| अपराह्न (दोपहर बाद) का समय | 1:11 pm से 3:33 pm तक | 1:16 pm से 3:40 pm तक |
नवरात्रि 2027: दिन और तिथि
| दिन | तिथि (सूर्योदय से) | देवी |
|---|---|---|
| दिन 1: गुरुवार, 30 सितंबर 2027 | अमावस्या → शुक्ल प्रतिपदा → शुक्ल द्वितीया | - |
| दिन 2: शुक्रवार, 1 अक्टूबर 2027 | शुक्ल द्वितीया → शुक्ल तृतीया | ब्रह्मचारिणी |
| दिन 3: शनिवार, 2 अक्टूबर 2027 | शुक्ल तृतीया → शुक्ल चतुर्थी | चंद्रघंटा |
| दिन 4: रविवार, 3 अक्टूबर 2027 | शुक्ल चतुर्थी → शुक्ल पंचमी | कूष्मांडा |
| दिन 5: सोमवार, 4 अक्टूबर 2027 | शुक्ल पंचमी → शुक्ल षष्ठी | स्कंदमाता |
| दिन 6: मंगलवार, 5 अक्टूबर 2027 | शुक्ल षष्ठी → शुक्ल सप्तमी | कात्यायनी |
| दिन 7: बुधवार, 6 अक्टूबर 2027 | शुक्ल सप्तमी → शुक्ल अष्टमी | कालरात्रि |
| दिन 8: गुरुवार, 7 अक्टूबर 2027 | शुक्ल अष्टमी | महागौरी |
| दिन 9: शुक्रवार, 8 अक्टूबर 2027 | शुक्ल अष्टमी → शुक्ल नवमी | महागौरी |
| दिन 10: शनिवार, 9 अक्टूबर 2027 | शुक्ल नवमी → शुक्ल दशमी | सिद्धिदात्री |
नवरात्रि के नौ रंग, दिन के हिसाब से
सभी समय IST में हैं। तिथि का समय पूरे भारत के लिए सही है; सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और मुहूर्त नागपुर के लिए हैं, उत्तर और मध्य भारत की (पूर्णिमांत) परंपरा में। दूसरे शहर में ये कुछ मिनट आगे पीछे होंगे।
आम तौर पर कैसे मनाया जाता है
- पहली सुबह कई परिवार कलश स्थापना (घटस्थापना) करते हैं और जौ बोते हैं।
- नौ दिनों में हर दिन दुर्गा के एक रूप की पूजा होती है, और कई लोग सभी या कुछ दिन व्रत रखते हैं।
- अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन आम है।
- गुजरात और कई शहरों में शाम को गरबा और डांडिया होता है।
क्षेत्र के हिसाब से अंतर
पश्चिम बंगाल, असम और ओडिशा में आखिरी दिन दुर्गा पूजा हैं, षष्ठी से विजयादशमी तक। गुजरात में ये गरबा की रातें हैं। कर्नाटक में दसवाँ दिन मैसूर दशहरा है, और दक्षिण में ये दिन गोलू या बोम्मई कोलू के रूप में भी मनते हैं।
इस साइट के क्षेत्रीय कैलेंडर में 2027 की अलग तारीख:
- बंगाली (Kolkata): शुक्रवार, 1 अक्टूबर 2027
तारीख कैसे निकाली गई है
नियम: वह दिन जिसके सूर्योदय पर तिथि हो। अगर दो दिन ऐसे हों तो जिस दिन तिथि उस समय ज़्यादा देर हो, वह दिन; किसी दिन न हो तो जिस दिन तिथि शुरू हो। सूर्य और चंद्रमा की स्थिति हर साल के लिए निकाली जाती है (निरयण, लाहिड़ी अयनांश), इसलिए तारीखें छपी सूची से नहीं ली गईं।
नवरात्रि के बारे में सवाल
2027 में नवरात्रि कब है?
नवरात्रि 2027 गुरुवार, 30 सितंबर 2027 को है, और 2028 में मंगलवार, 19 सितंबर 2028 को। तारीखें नागपुर के लिए उत्तर और मध्य भारत की परंपरा से निकाली गई हैं; ऊपर की तालिका में तिथि और मुहूर्त का समय दिया है।
घटस्थापना कब है?
पहले दिन की सुबह, प्रतिपदा रहते हुए। कई पंचांग सुबह का मुहूर्त और दूसरे विकल्प के रूप में अभिजीत मुहूर्त देते हैं। दिनों की तालिका में हर दिन के सूर्योदय की तिथि है।
अष्टमी और नवमी कब हैं?
दुर्गा अष्टमी वह दिन है जिसके सूर्योदय पर अष्टमी हो; तालिका में यह भी है कि नवमी कब चलती है। जब अष्टमी और नवमी एक ही दिन हों, तो कई परिवार उसी दिन कन्या पूजन करते हैं।
किसी दूसरे कैलेंडर में अलग तारीख क्यों दिखती है?
तिथि पूरे भारत में एक ही पल में शुरू और खत्म होती है, पर त्योहार का दिन इस पर निर्भर करता है कि दिन के किस समय (सूर्योदय, दोपहर, शाम या आधी रात) तिथि देखी जाती है, और किस शहर के सूर्योदय से। इसलिए अलग शहर या परंपरा का पंचांग एक दिन आगे पीछे हो सकता है। जो पंचांग आपका परिवार मानता है, वही मानें।
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