हिंदू त्योहार · कृष्ण जन्माष्टमी, गोकुलाष्टमी
जन्माष्टमी 2027: तारीख और निशिता पूजा का समय
कृष्ण जन्माष्टमी भाद्रपद (अमांत कैलेंडर में श्रावण) कृष्ण पक्ष की अष्टमी है, जिसे आधी रात को श्री कृष्ण के जन्म के रूप में मनाया जाता है।
अगली तारीख: बुधवार, 25 अगस्त 2027
कृष्ण जन्माष्टमी का समय
| विवरण | 2027 | 2028 |
|---|---|---|
| तारीख | बुधवार, 25 अगस्त 2027 | रविवार, 13 अगस्त 2028 |
| कृष्ण अष्टमी तिथि शुरू | 24 अगस्त, 8:25 pm | 13 अगस्त, 4:43 am |
| कृष्ण अष्टमी तिथि समाप्त | 25 अगस्त, 7:20 pm | 14 अगस्त, 5:37 am |
| निशिता काल (आधी रात की पूजा) | 11:53 pm से 12:38 am (26 अगस्त) तक | 11:56 pm से 12:40 am (14 अगस्त) तक |
सभी समय IST में हैं। तिथि का समय पूरे भारत के लिए सही है; सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और मुहूर्त नागपुर के लिए हैं, उत्तर और मध्य भारत की (पूर्णिमांत) परंपरा में। दूसरे शहर में ये कुछ मिनट आगे पीछे होंगे।
आम तौर पर कैसे मनाया जाता है
- कई लोग दिन भर व्रत रखते हैं और मुख्य पूजा निशिता काल, यानी आधी रात के आसपास करते हैं।
- घरों और मंदिरों में बाल कृष्ण का पालना सजाया जाता है और आधी रात तक भजन होते हैं।
- व्रत आम तौर पर आधी रात की पूजा के बाद या अगली सुबह खोला जाता है।
- महाराष्ट्र में अगला दिन दही हंडी (गोपालकाला) है।
क्षेत्र के हिसाब से अंतर
कुछ सालों में दो तारीखें होती हैं: एक गृहस्थों (स्मार्त) की और एक दिन बाद की, जिसे कई वैष्णव संप्रदाय और इस्कॉन मानते हैं, क्योंकि वे रोहिणी नक्षत्र और सूर्योदय को अलग तरह से देखते हैं। इस पेज पर नागपुर के लिए स्मार्त तारीख है।
इस साइट के सभी नौ क्षेत्रीय कैलेंडर में जो इसे देते हैं, 2027 की तारीख यही है।
तारीख कैसे निकाली गई है
नियम: वह रात जिसके निशिता काल (रात के पंद्रह मुहूर्तों में आठवें) में तिथि हो। अगर दो दिन ऐसे हों तो जिस दिन तिथि उस समय ज़्यादा देर हो, वह दिन; किसी दिन न हो तो जिस दिन तिथि शुरू हो। पहली रात आधी रात को रोहिणी न हो और अगले दिन सूर्योदय पर अष्टमी व आधी रात को रोहिणी हो, तो अगला दिन लिया जाता है। सूर्य और चंद्रमा की स्थिति हर साल के लिए निकाली जाती है (निरयण, लाहिड़ी अयनांश), इसलिए तारीखें छपी सूची से नहीं ली गईं।
जन्माष्टमी के बारे में सवाल
2027 में जन्माष्टमी कब है?
जन्माष्टमी 2027 बुधवार, 25 अगस्त 2027 को है, और 2028 में रविवार, 13 अगस्त 2028 को। तारीखें नागपुर के लिए उत्तर और मध्य भारत की परंपरा से निकाली गई हैं; ऊपर की तालिका में तिथि और मुहूर्त का समय दिया है।
कुछ सालों में जन्माष्टमी की दो तारीखें क्यों होती हैं?
गृहस्थ (स्मार्त) वह रात लेते हैं जिसमें आधी रात को अष्टमी हो, और रोहिणी नक्षत्र हो तो उसे प्राथमिकता देते हैं। कई वैष्णव और इस्कॉन कैलेंडर वह दिन लेते हैं जिसके सूर्योदय पर अष्टमी हो, इसलिए उनकी तारीख एक दिन बाद हो सकती है। आपका परिवार या मंदिर जो मानता है, वही मानें।
जन्माष्टमी पर निशिता काल क्या है?
रात के पंद्रह मुहूर्तों में आठवाँ, हिंदू आधी रात के आसपास, जो परंपरा से श्री कृष्ण के जन्म का समय है। तालिका में यह नागपुर के लिए दिया है।
किसी दूसरे कैलेंडर में अलग तारीख क्यों दिखती है?
तिथि पूरे भारत में एक ही पल में शुरू और खत्म होती है, पर त्योहार का दिन इस पर निर्भर करता है कि दिन के किस समय (सूर्योदय, दोपहर, शाम या आधी रात) तिथि देखी जाती है, और किस शहर के सूर्योदय से। इसलिए अलग शहर या परंपरा का पंचांग एक दिन आगे पीछे हो सकता है। जो पंचांग आपका परिवार मानता है, वही मानें।
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